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अधर्म का नाश करने के लिए अवतरित होते हैं भगवान : आचार्य अवधेश
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-श्रीकृष्ण जन्म की मार्मिक कथा सुनकर श्रोता हुए भावविभोर
संवाद न्यूज एजेंसी
ड्रमंडगंज। बेलन बरौंधा क्षेत्र के धसड़ा राजा गांव में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को कथावाचक आचार्य अवधेश कुमार शुक्ल ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा धसड़ा राजा गांव गुंजायमान हो उठा।
कथावाचक ने कहा कि बच्चों का नाम भगवान के नाम पर ही रखना चाहिए, ताकि बार-बार नाम पुकारने से नारायण की कृपा प्राप्त होती रहे। एक पौराणिक कथा का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि एक समय देवलोक में देवता अप्सराओं का नृत्य देख रहे थे। उसी समय गुरु वृहस्पति वहां पहुंचे लेकिन उनकी तरफ देवराज इंद्र ने जब नहीं देखा तो गुरु वृहस्पति को लगा कि इंद्र को अहंकार हो गया है। उसके बाद वे वहां से लौट गए। कालांतर में आयोजित यज्ञ अनुष्ठान में इंद्र ने ब्राह्मण गुरु की हत्या कर दी। इससे इंद्र को ब्रह्महत्या लग गई, उसी ब्रह्महत्या को चार भागों में बांट दिया गया। जिसमें से एक भाग गोंद निकलने वाले वृक्ष, दूसरा भाग ऊसर धरती, तीसरा भाग काई जमें जल और चौथा भाग स्त्रियों को दे दिया गया। इसे रजो धर्म कहा जाता है। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की भावपूर्ण कथा का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार कंस के आतंक और कारागार की कठिन परिस्थितियों के बीच भगवान बालकृष्ण का जन्म हुआ। इस दौरान कारागार में जन्में भगवान कृष्ण की लीला का सजीव वर्णन सुनकर श्रोता भावुक हो गए। कथा व्यास ने बताया कि अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए ही भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। भागवत कथा के दौरान प्रस्तुत किए गए भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान पुरोहित कमलेश दत्त त्रिपाठी, बलराम प्रसाद तिवारी, देवदत्त मिश्र आदि रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ड्रमंडगंज। बेलन बरौंधा क्षेत्र के धसड़ा राजा गांव में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को कथावाचक आचार्य अवधेश कुमार शुक्ल ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा धसड़ा राजा गांव गुंजायमान हो उठा।
कथावाचक ने कहा कि बच्चों का नाम भगवान के नाम पर ही रखना चाहिए, ताकि बार-बार नाम पुकारने से नारायण की कृपा प्राप्त होती रहे। एक पौराणिक कथा का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि एक समय देवलोक में देवता अप्सराओं का नृत्य देख रहे थे। उसी समय गुरु वृहस्पति वहां पहुंचे लेकिन उनकी तरफ देवराज इंद्र ने जब नहीं देखा तो गुरु वृहस्पति को लगा कि इंद्र को अहंकार हो गया है। उसके बाद वे वहां से लौट गए। कालांतर में आयोजित यज्ञ अनुष्ठान में इंद्र ने ब्राह्मण गुरु की हत्या कर दी। इससे इंद्र को ब्रह्महत्या लग गई, उसी ब्रह्महत्या को चार भागों में बांट दिया गया। जिसमें से एक भाग गोंद निकलने वाले वृक्ष, दूसरा भाग ऊसर धरती, तीसरा भाग काई जमें जल और चौथा भाग स्त्रियों को दे दिया गया। इसे रजो धर्म कहा जाता है। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की भावपूर्ण कथा का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार कंस के आतंक और कारागार की कठिन परिस्थितियों के बीच भगवान बालकृष्ण का जन्म हुआ। इस दौरान कारागार में जन्में भगवान कृष्ण की लीला का सजीव वर्णन सुनकर श्रोता भावुक हो गए। कथा व्यास ने बताया कि अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए ही भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। भागवत कथा के दौरान प्रस्तुत किए गए भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान पुरोहित कमलेश दत्त त्रिपाठी, बलराम प्रसाद तिवारी, देवदत्त मिश्र आदि रहे।
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