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UP: मझवां सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला, BJP ने सुचिस्मिता को मैदान में उतारा, SP और BSP प्रत्याशी ने नामांकन किया

Thu, 24 Oct 2024 08:16 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर
अमर उजाला नेटवर्क, मिर्जापुर Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Thu, 24 Oct 2024 08:16 PM IST
सार

मझवां सीट से बीजेपी प्रत्याशी की घोषणा के बाद चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। निर्णायक वोटों को लेकर सबकी दावेदारी है। हर कोई जनता और इस विधानसभा के मुद्दों की लड़ाई लड़ने की बात कह रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर में गुरूवार का दिन गहमा गहमी भरा रहा। सपा प्रत्याशी ज्योति बिंद और बसपा प्रत्याशी दीपू तिवारी ने नामांकन दाखिल किया।

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Triangular contest on Majhawan seat BJP fielded Suchismita
मझवां सीट के तीन दावेदार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मिर्जापुर की मझवां सीट पर रण जारी है। आज पूरे दिन प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया और पूरे नामांकन स्थल पर गहमा गहमी का माहौल रहा। समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी ज्योति बिंद अपने पिता रमेश बिंद के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंची और नामांकन पत्र भरकर मझवां के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही। वहीं बसपा प्रत्याशी दीपू तिवारी ने भी नामांकन दाखिल किया और पूरे उत्साह में दिखे।

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भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते खोलते हुए सुचिस्मिता मौर्या को मैदान में उतार दिया। सुचिस्मिता मौर्य राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आती हैं। सुचिस्मिता के ससुर रामचंद्र मौर्य मझवां सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। 
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प्रत्याशियों पर एक नजर
बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर सुचिस्मिता मौर्या मैदान में हैं और इनके श्वसुर रामचंद मौर्य मझवां सीट से बीजेपी के टिकट पर विधायक बन चुके है।  समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी के तौर पर ज्योति बिंद मैदान में हैं। इनके पिता भी मझवां सीट से जीत हासिल कर चुके हैं और बसपा से दीपू तिवारी मैदान में उतरे हैं।
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पिछड़ा और दलित वोटर होता है निर्णायक
कहा जाता है कि इस विधानसभा सीट पर दलित और पिछड़ा वोट ही जीत का निर्धारण करता है या फिर यूं कहें कि दलित और पिछड़ा वोटर निर्णायक भूमिका में होता है। वोट की संख्या पर गौर करें तो यहां लगभग 60000 के करीब दलित वोट है। वहीं यादव समुदाय की संख्या यहां लगभग 40000 है। तीसरे नंबर पर ब्राह्मण समुदाय की संख्या लगभग 30000 है।

ओबीसी समुदाय, जिसमें कुर्मी, नोनिया, और अन्य पिछड़ी जातियां शामिल हैं, की संख्या लगभग 50000 है। मुस्लिम समुदाय के वोट पर गौर करें तो इनकी संख्या लगभग 25000 है ठाकुर समुदाय की संख्या लगभग 20000 है। वैश्य समुदाय की संख्या लगभग 15000 है। अन्य जातीय समूह जैसे गुर्जर, जाट, त्यागी आदि की भी मौजूदगी है और इनकी संख्या का आंकड़ा भी लगभग 30000 हैं। 


मुकाबला त्रिकोणीय
तीनो पार्टियों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं और अब मुकबला पूरी तरह से दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। जातिगत आधार पर प्रत्याशियों को देखें तो बीजेपी और सपा ने पिछड़ी जाति का प्रत्याशी मैदान में उतारा है वहीं बसपा दलित वोटों पर दावेदारी कर रही है। मुकाबला त्रिकोणीय होता हुआ दिखाई दे रहा है।

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