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बयान के बाद मौलवी का छोड़ा, पर बच्चों ने जाने से किया इंकार
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मिर्जापुर। रेलवे स्टेशन मिर्जापुर आठ बच्चों के साथ पकड़े गए मौलवी को दूसरे दिन बच्चों के परिजनों के पहुंचने के बाद सोमवार को छोड़ दिया गया। पर बच्चों ने मौलवी के साथ जाने से इंकार कर दिया। सीडब्ल्यूसी की टीम ने बिहार के अररिया सीडब्ल्यूसी से की। अररिया की सीडब्ल्यूसी की टीम बच्चों के पते का पड़ताल करने के बाद सोनभद्र शेल्टर होम से लेकर बच्चों को उनके घर जाएगी।
आरपीएफ प्रभारी दिनेश कुमार ने रविवार की दोपहर में रेलवे स्टेशन पर भ्रमण के दौरान प्लेटफार्म नंबर दो व तीन पर एक मौलवी के साथ आठ नाबालिग बच्चों को देखकर चाइल्ड लाइन को सूचना दी थी। आरपीएफ और जीआरपी की टीम ने बिहार के अररिया निवासी मौलवी से पूछताछ की। परिजनों को सूचना देकर बुलाया गया। सोमवार को पांच बच्चों के परिजन रेलवे स्टेशन पहुंचे। जीआरपी प्रभारी हरिशरण सिंह ने बताया कि बच्चों के परिजनों ने बताया कि बच्चे उनकी मर्जी से मौलवी के साथ जा रहे थे। उनके अन्य बच्चे भी बंगलौर में मौलवी से पढ़ते हैं। बयान लेने के बाद मौलवी को छोड़ दिया गया। लेकिन बच्चों ने मौलवी के साथ जाने से इंकार कर दिया।
जीआरपी प्रभारी हरिशरण सिंह ने बताया कि परिजनों ने बताया कि उन्होंनेे मौलवी के साथ बच्चों को पढ़ने के लिए भेजा था। जिसके बाद मौलवी को छोड़ दिया गया।
आखिर बिना टिकट के जा रहे मौलवी पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई : नाबालिग बच्चों के साथ रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए मौलवी के पास न तो बिहार से मिर्जापुर स्टेशन तक आने का टिकट था। न ही कर्नाटक जाने का ही आरक्षित टिकट था। उसके पास बच्चों को ले जाने का सहमति पत्र भी नहीं था। फिर भी आरपीएफ और जीआरपी ने उसे छोड़ दिया। कुछ ऐसा ही मामला कुछ दिन पहले प्रयागराज में प्रकाश में आया था। जहां अररिया से बच्चों को ले जाया जा रहा था। उस मामले में कठोर कार्रवाई हुई। पर यहां कार्रवाई को लेकर रेलवे पुलिस गंभीर नजर नहीं आई।
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आरपीएफ प्रभारी दिनेश कुमार ने रविवार की दोपहर में रेलवे स्टेशन पर भ्रमण के दौरान प्लेटफार्म नंबर दो व तीन पर एक मौलवी के साथ आठ नाबालिग बच्चों को देखकर चाइल्ड लाइन को सूचना दी थी। आरपीएफ और जीआरपी की टीम ने बिहार के अररिया निवासी मौलवी से पूछताछ की। परिजनों को सूचना देकर बुलाया गया। सोमवार को पांच बच्चों के परिजन रेलवे स्टेशन पहुंचे। जीआरपी प्रभारी हरिशरण सिंह ने बताया कि बच्चों के परिजनों ने बताया कि बच्चे उनकी मर्जी से मौलवी के साथ जा रहे थे। उनके अन्य बच्चे भी बंगलौर में मौलवी से पढ़ते हैं। बयान लेने के बाद मौलवी को छोड़ दिया गया। लेकिन बच्चों ने मौलवी के साथ जाने से इंकार कर दिया।
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जीआरपी प्रभारी हरिशरण सिंह ने बताया कि परिजनों ने बताया कि उन्होंनेे मौलवी के साथ बच्चों को पढ़ने के लिए भेजा था। जिसके बाद मौलवी को छोड़ दिया गया।
आखिर बिना टिकट के जा रहे मौलवी पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई : नाबालिग बच्चों के साथ रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए मौलवी के पास न तो बिहार से मिर्जापुर स्टेशन तक आने का टिकट था। न ही कर्नाटक जाने का ही आरक्षित टिकट था। उसके पास बच्चों को ले जाने का सहमति पत्र भी नहीं था। फिर भी आरपीएफ और जीआरपी ने उसे छोड़ दिया। कुछ ऐसा ही मामला कुछ दिन पहले प्रयागराज में प्रकाश में आया था। जहां अररिया से बच्चों को ले जाया जा रहा था। उस मामले में कठोर कार्रवाई हुई। पर यहां कार्रवाई को लेकर रेलवे पुलिस गंभीर नजर नहीं आई।
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