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Mirzapur News: लाइसेंस के अभाव में शुरू नहीं हो सका मंडल का सबसे बड़ा ऑक्सीजन प्लांट

Thu, 28 Aug 2025 01:17 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 Aug 2025 01:17 AM IST
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The biggest oxygen plant of the division could not be started due to lack of license
मंडलीय अस्पताल परिसर में लगा 20 हजार लीटर का आक्सजीन प्लांट  स्रोत- संवाद
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में मंडल के सबसे बड़े ऑक्सीजन प्लांट को लगे 14 महीने से अधिक समय बीत गया है। अब तक संचालन करने के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इससे उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है। मंडलीय अस्पताल में तीन और आक्सीजन प्लांट चल रहे हैं। अभी भी बाहर से सिलेंडर खरीदना पड़ता है। 20 हजार लीटर का ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो जाएगा तो बाहर से ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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तीन ऑक्सीजन प्लांट संचालित हैं अस्पताल में
कोरोना संक्रमण काल के समय ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 300 लीटर वाले ऑक्सीजन प्लांट का सबसे पहले शुभारंभ किया था। इसके बाद अस्पताल में 250 लीटर और बाद में महिला अस्पताल में 900 लीटर का ऑक्सीजन प्लांट लगा था। 250 लीटर का ऑक्सीजन प्लांट विंध्याचल सीएचसी में भी लगा है। ये ऑक्सजीन प्लांट हवा से ऑक्सीजन बनाते हैं।
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दिसंबर 2023 में 20 हजार लीटर के प्लांट लगाने का आया आदेश
मंडलीय अस्पताल में दिसंबर 2023 में 20 हजार लीटर का लिक्विड आक्सीजन प्लांट लगाने के लिए शासन से आदेश आया। इसके बाद ऑक्सीजन प्लांट लगाने का कार्य शुरू हुुआ। जून 2024 तक 20 हजार लीटर का आक्सीजन प्लांट लगकर तैयार हो गया। उसे चलाने के लिए शुरुआती कार्रवाई भी हुई पर अब तक उसका संचालन नहीं हो सका है। कारण कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन एक वर्ष बाद भी ऑक्सीजन प्लांट के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका है।
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यहां से लेनी होती है एनओसी
ऑक्सीजन प्लांट संचालन के लिए औषधि व प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत सीडीएससीओ से मेडिकल ऑक्सीजन के लिए लाइसेंस, पेट्रोलियम व विस्फोटक सुरक्षा संगठन से अनुमोदन और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका है जबकि प्लांट लगे एक वर्ष से अधिक का समय बीत गया है।


वर्जन
अस्पताल में तीन ऑक्सीजन प्लांट लगा है। इसके अलावा सिलेंडर भी है। तीन प्लांट चलने से अब सिलेंडर कम खरीदा जाता है। 20 हजार लीटर के प्लांट का संचालन होने से पूरे अस्पताल को ऑक्सीजन की सप्लाई होगी। लाइसेंस की प्रक्रिया के लिए आवेदन किया गया है। जांच के बाद 20 दिन में प्लांट चलने लगेगा।
डा. एसके श्रीवास्तव, सीएमएस, मंडलीय अस्पताल
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