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बारिश का मौसम सिर पर, उजाड़े गए लोगों के आसियाने
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जिगना। लुधियाना से डानकुनी पश्चिम बंगाल तक बन रहे रेल कारीडोर के लिए अधिग्रहीत भूमि को खाली कराए जाने की प्रक्रिया रविवार से शुरू हो गई। दो तहसीलों के एसडीएम व भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रही। उपजिलाधिकारी सदर गौरव श्रीवास्तव और एसडीएम लालगंज आशुतोष दुबे के नेतृत्व में पुलिस जिगना गांव पहुंची।
बता दें कि काफी समय से यादवपुर से लेकर जिगना गांव तक लगभग डेढ़ किलोमीटर तक में जिन किसानों की जमीन कारीडोर में आई है वे बढ़े दर पर मुआवजा की मांग कर रहे। मांग को लेकर रेल मार्ग के निर्माण को रोका था। जिसको लेकर राजस्व विभाग, किसानों और रेल कारीडोर की निर्माण कंपनी जीएमआर के बीच कई बार बैठकें भी हुईं। लेकिन बात नहीं बनी। किसानों का कहना है कि जमीन का अधिग्रहण अब किया जा रहा है तो आज के सर्किल रेट से मुआवजा मिलना चाहिए। बहरहाल रविवार को भारी पुलिस बल देख काम रोकने कोई नहीं आया। अधीग्रहित जमीन से मकान ढहा दिए गए। जिगना गांव में मकान गिराए जाने से रोकने के लिए गीता देवी पत्नी इंद्रबहादुर उर्फ जेलर व उनका लड़का अंकित सिंह सामने आए। लेकिन भारी संख्या में पुलिस बल के आगे उनकी एक न चली। उनके आशियाना को उजाड़ दिया गया। जबकि महिला का आरोप था कि मकान का मालियत दो भाग में करना था, लेकिन उसे तीन हिस्से में बांट दिया गया है। रेल अधिकारियों ने बताया कि मकान का मुआवजा जयश्री सिंह व उनके पुत्र इंद्रबहादुर सिंह व रविंद्र के नाम से है, प्रत्येक का दो लाख, 67 हजार 300 रुपए बना है। जिसमें जयश्री सिंह मुआवजा ले भी चुके हैं। इंद्रबहादुर व उनके परिवार का आरोप है कि रविंद्र सिंह काफी समय से गांव में नहीं रहते हैं। मुआवजे की राशि दो भाग में बंटनी चाहिए। बहरहाल अधिकारियों ने इंद्रबहादुर सिंह उर्फ जेलर के परिवार को रहने के लिए कुछ समय के लिए दो, तीन कमरे छोड़ दिए।
इस मौके पर प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार पांडेय, तहसीलदार ओम प्रकाश पांडेय, नायब तहसीलदार योगेंद्र शरण शाह, संतोष कुमार, राजस्व निरीक्षक व डीएफसीसी के प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद पांडेय, अभय शर्मा, अजय शुक्ला, जीएमआर के प्रोजेक्ट मैनेजर ए पी राय के साथ ही काफी संख्या में महिला आरक्षी व पुलिस और पीएसी के जवान मौजूद रहे।
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बता दें कि काफी समय से यादवपुर से लेकर जिगना गांव तक लगभग डेढ़ किलोमीटर तक में जिन किसानों की जमीन कारीडोर में आई है वे बढ़े दर पर मुआवजा की मांग कर रहे। मांग को लेकर रेल मार्ग के निर्माण को रोका था। जिसको लेकर राजस्व विभाग, किसानों और रेल कारीडोर की निर्माण कंपनी जीएमआर के बीच कई बार बैठकें भी हुईं। लेकिन बात नहीं बनी। किसानों का कहना है कि जमीन का अधिग्रहण अब किया जा रहा है तो आज के सर्किल रेट से मुआवजा मिलना चाहिए। बहरहाल रविवार को भारी पुलिस बल देख काम रोकने कोई नहीं आया। अधीग्रहित जमीन से मकान ढहा दिए गए। जिगना गांव में मकान गिराए जाने से रोकने के लिए गीता देवी पत्नी इंद्रबहादुर उर्फ जेलर व उनका लड़का अंकित सिंह सामने आए। लेकिन भारी संख्या में पुलिस बल के आगे उनकी एक न चली। उनके आशियाना को उजाड़ दिया गया। जबकि महिला का आरोप था कि मकान का मालियत दो भाग में करना था, लेकिन उसे तीन हिस्से में बांट दिया गया है। रेल अधिकारियों ने बताया कि मकान का मुआवजा जयश्री सिंह व उनके पुत्र इंद्रबहादुर सिंह व रविंद्र के नाम से है, प्रत्येक का दो लाख, 67 हजार 300 रुपए बना है। जिसमें जयश्री सिंह मुआवजा ले भी चुके हैं। इंद्रबहादुर व उनके परिवार का आरोप है कि रविंद्र सिंह काफी समय से गांव में नहीं रहते हैं। मुआवजे की राशि दो भाग में बंटनी चाहिए। बहरहाल अधिकारियों ने इंद्रबहादुर सिंह उर्फ जेलर के परिवार को रहने के लिए कुछ समय के लिए दो, तीन कमरे छोड़ दिए।
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इस मौके पर प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार पांडेय, तहसीलदार ओम प्रकाश पांडेय, नायब तहसीलदार योगेंद्र शरण शाह, संतोष कुमार, राजस्व निरीक्षक व डीएफसीसी के प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद पांडेय, अभय शर्मा, अजय शुक्ला, जीएमआर के प्रोजेक्ट मैनेजर ए पी राय के साथ ही काफी संख्या में महिला आरक्षी व पुलिस और पीएसी के जवान मौजूद रहे।
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