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जन्म, मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने संबंधित कार्रवाई करें : एसडीएम
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चुनार। एसडीएम कोर्ट से जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की व्यवस्था बदलने से तहसील क्षेत्र के वादकारियों व अधिवक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मांग की गई है कि जो पत्रावलियां पहले आ चुकी हैं। उन पर आदेश जारी किए जाएं। नागरिकों का कहना है कि पहले प्रमाण पत्र एसडीएम कोर्ट से जारी होता था।
लेकिन अब प्रमाण पत्र जारी करने का क्षेत्राधिकार जनपदीय न्यायिक अधिकारियों को प्राप्त हो गया है। दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद जन्म व मृत्यु के पंजीकरण करने व प्रमाण पत्र जारी करने का क्षेत्राधिकार नगर क्षेत्र में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी व ग्रामीण क्षेत्र में ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी को था लेकिन आवेदन उपजिलाधिकारी न्यायालय में ही करना पड़ता था। न्यायालय से पत्रावली नगर पालिका व ब्लॉक के अधिकारियों के पास जाता और फिर विभागीय जांच के बाद जन्म व मृत्यु संबंधित रिपोर्ट संबंधित कर्मचारी द्वारा लगाकर वापस उसे न्यायालय में प्रेषित किया जाता था जिसके बाद वादकारी को प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए न्यायालय द्वारा आदेश दिया जाता था और उसके बाद वादकारी को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता था।
पूर्व में तमाम पत्रावलियों पर उपजिलाधिकारी का प्रारंभिक आदेश तो ब्लॉक व नगर पालिका के अधिकारियों के लिए हुआ तो है लेकिन अब क्षेत्राधिकार बदल जाने से उपजिलाधिकारी के न्यायालय में पत्रावली नहीं ली जा रही है। उपजिलाधिकारी अनेग सिंह ने बताया कि दो वर्ष तक के प्रकरण में वह कार्रवाई कर सकते हैं। उससे अधिक के प्रकरण उनके क्षेत्राधिकार के बाहर हैं। संवाद
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लेकिन अब प्रमाण पत्र जारी करने का क्षेत्राधिकार जनपदीय न्यायिक अधिकारियों को प्राप्त हो गया है। दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद जन्म व मृत्यु के पंजीकरण करने व प्रमाण पत्र जारी करने का क्षेत्राधिकार नगर क्षेत्र में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी व ग्रामीण क्षेत्र में ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी को था लेकिन आवेदन उपजिलाधिकारी न्यायालय में ही करना पड़ता था। न्यायालय से पत्रावली नगर पालिका व ब्लॉक के अधिकारियों के पास जाता और फिर विभागीय जांच के बाद जन्म व मृत्यु संबंधित रिपोर्ट संबंधित कर्मचारी द्वारा लगाकर वापस उसे न्यायालय में प्रेषित किया जाता था जिसके बाद वादकारी को प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए न्यायालय द्वारा आदेश दिया जाता था और उसके बाद वादकारी को प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता था।
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पूर्व में तमाम पत्रावलियों पर उपजिलाधिकारी का प्रारंभिक आदेश तो ब्लॉक व नगर पालिका के अधिकारियों के लिए हुआ तो है लेकिन अब क्षेत्राधिकार बदल जाने से उपजिलाधिकारी के न्यायालय में पत्रावली नहीं ली जा रही है। उपजिलाधिकारी अनेग सिंह ने बताया कि दो वर्ष तक के प्रकरण में वह कार्रवाई कर सकते हैं। उससे अधिक के प्रकरण उनके क्षेत्राधिकार के बाहर हैं। संवाद
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