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Mirzapur News: आयुष चिकित्सालय में 116 में सिर्फ 12 दवाएं ही बचीं, चार महीने से है कमी
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मंडलीय अस्पताल परिस में स्थित आयुष चिकित्सालय। स्रोत- संवाद
मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल परिसर स्थित आयुष चिकित्सालय में पिछले चार महीने से जरूरी दवाएं नहीं हैं। 116 में से 12 दवाएं ही बची हैं। अन्य जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म है। ठंड शुरू होने के साथ सर्दी, जुकाम बुखार, सांस, एलर्जी के मरीज आने लगे हैं पर इन रोगों के लिए जरूरी दवाएं नहीं हैं। मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। आयुष चिकित्सालय में दी जाने वाले आयुर्वेदिक व यूनानी 116 दवाओं दी जाती थीं।
मंडलीय अस्पताल परिसर में पीछे की ओर आयुष चिकित्सालय है। जहां पर आयुर्वेद और यूनानी की दवाएं मिलती हैं। दोनों में एक-एक डॉक्टर भी तैनात हैं। आयुर्वेद व यूनानी की दवाएं चिकित्सालय में मरीजों को देने के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें दर्द से लेकर शुगर और सर्दी-जुकाम, खांसी की दवा रहती हैं। ठंड में काढ़ा, शीतोपलादि, तालीसादि आदि दवाएं मरीजों के लिए काफी कारगर रहती हैं।
खत्म होनेवाली दवाओं में इम्यूनिटी के लिए हरिद्रा खंड, चार में बस एक काढ़ा रसना सत्त्वक क्वाथ, गिलोय, खुजली, कैल्शियम व एनीमिया से बचाव की टॉनिक ही बची हैं। वे भी खत्म होने की कगार पर हैं। शुगर की डाइवो डिंग और प्रमेह औषधि आदि कोई दवा नहीं है। दशमूल क्वाथ, जटामांसी क्वाथ, एलादि केसी आदि काढ़ा नहीं है। दर्द व बुखार की दवा नहीं है। सर्दी-जुकाम, श्वास और एलर्जी के मरीजों के शीतोपलादि, तालीसादि, लक्ष्मी विलास रस, त्रिफला, सुदर्शन, योगराज गुग्गुल आदि दवाएं नहीं है।
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ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल में खत्म हो गया है च्यवनप्राश: जिले में 54 यूनानी और आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। यहां पर हाल ही में दवाएं आई हैं पर ठंड में जरूरी च्यवनप्राश नहीं है।
चेतगंज के कोन के हरसिंहपुर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के डॉक्टर भारती उमर ने बताया कि हमारे यहां 52 दवाएं उपलब्ध हैं। च्यवनप्राश नहीं है। सीखड़: राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय खैरा में सभी दवा उपलब्ध हैं।
काफी अर्से से च्यवनप्राश नहीं आ रहा है। हलिया: मतवार व उमरिया में आयुर्वेद चिकित्सालय में 15 से 20 दवाएं उपलब्ध हैं। च्यवनप्राश नहीं आ रहा है।
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मंडलीय अस्पताल परिसर में पीछे की ओर आयुष चिकित्सालय है। जहां पर आयुर्वेद और यूनानी की दवाएं मिलती हैं। दोनों में एक-एक डॉक्टर भी तैनात हैं। आयुर्वेद व यूनानी की दवाएं चिकित्सालय में मरीजों को देने के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें दर्द से लेकर शुगर और सर्दी-जुकाम, खांसी की दवा रहती हैं। ठंड में काढ़ा, शीतोपलादि, तालीसादि आदि दवाएं मरीजों के लिए काफी कारगर रहती हैं।
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खत्म होनेवाली दवाओं में इम्यूनिटी के लिए हरिद्रा खंड, चार में बस एक काढ़ा रसना सत्त्वक क्वाथ, गिलोय, खुजली, कैल्शियम व एनीमिया से बचाव की टॉनिक ही बची हैं। वे भी खत्म होने की कगार पर हैं। शुगर की डाइवो डिंग और प्रमेह औषधि आदि कोई दवा नहीं है। दशमूल क्वाथ, जटामांसी क्वाथ, एलादि केसी आदि काढ़ा नहीं है। दर्द व बुखार की दवा नहीं है। सर्दी-जुकाम, श्वास और एलर्जी के मरीजों के शीतोपलादि, तालीसादि, लक्ष्मी विलास रस, त्रिफला, सुदर्शन, योगराज गुग्गुल आदि दवाएं नहीं है।
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ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल में खत्म हो गया है च्यवनप्राश: जिले में 54 यूनानी और आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। यहां पर हाल ही में दवाएं आई हैं पर ठंड में जरूरी च्यवनप्राश नहीं है।
चेतगंज के कोन के हरसिंहपुर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के डॉक्टर भारती उमर ने बताया कि हमारे यहां 52 दवाएं उपलब्ध हैं। च्यवनप्राश नहीं है। सीखड़: राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय खैरा में सभी दवा उपलब्ध हैं।
काफी अर्से से च्यवनप्राश नहीं आ रहा है। हलिया: मतवार व उमरिया में आयुर्वेद चिकित्सालय में 15 से 20 दवाएं उपलब्ध हैं। च्यवनप्राश नहीं आ रहा है।

मंडलीय अस्पताल परिस में स्थित आयुष चिकित्सालय। स्रोत- संवाद