जमालपुर। हसौली गांव में श्रीराम कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथा वाचक पं रामचन्द्र मिश्र व्यास जी महाराज ने कहा कि पुण्य करने से पाप का नाश होता हैं। भगवान के कार्य मेें बाधा डालने वाला अंधा हो जाता है। कथा को विस्तार देते हुए ब्रह्मर्षि विश्वामित्र का राजा दशरथ के यहां आगमन व चारों भाईयों के मांगने सहित पुष्प वाटिका फुलवारी एवं अहिल्या उद्धार की प्रसंग की मार्मिक ढंग से चर्चा करते हुए कहा की प्रभु राम संस्कार पुरूषोतम हैं। भाइयों के प्रति राम का तो बहनो के प्रति माता सीता का संस्कार अनुकरणीय हैं। कथा वाचक ने कहा भगवान राम राम अयोध्या में पिता के अनुशासन में रहते है। तो फुलवारी में गुरू विश्वामित्र के संस्कार व अनुशासन के साथ रहते हैं। बताया कि गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं कि आयषु मांगी करहि पुर काजा, देखी चरित हरषहीं मन राजा। गुरु विश्वामित्र के साथ रहते हुए गुरु के अनुशासन का पालन करते हुए रहते हैं। समय जानि गुरू आयषु पाई, लेन प्रसुन चले दोनो भाई। गुरु की पूजा का समय जान कर गुरू से आज्ञा लेते हुए पुष्प वाटिका में पुजा के लिए पुष्प लेने जाते हैं। वही पर माता सीता भी मां सुनैना से आज्ञा लेकर सखियों के साथ पुष्प वाटिका में गौरी जी के मदिंर में पूजा करने जाती हैं। वहां साथ में दो सुंदर सन्यासी बालक के रूप को देखती हैं। प्रभु राम के रूप को देखकर मंत्र मुग्ध हो जाती हैं। राम कथा में करूणाशंकर पांडेय, श्रीकांत द्विवेदी, अनिल श्रीवास्तव, रामचन्द्र पाल, सुर्य नारायण मिश्र, नितेश द्विवेदी, शम्भू नाथ मौर्य, गोलू तिवारी, अंशु, पंकज मिश्रा, अजित यादव, अचलेश्वर द्विवेदी, सत्यम दूबे, राहुल दूबे उपस्थित थे। संचालन राजेश दूबे ने किया।