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तीन हजार गोवंश के लिए बनेगा आश्रय स्थल
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मिर्जापुर। जिले में वृहद गोआश्रय स्थल खोलने की कवायद तेज हो गई है। फिलहाल हलिया विकास खंड के नौगवां में उपयुक्त जमीन की बात कही जा रही है। अभी उपजिलाधिकारी के स्तर से लेखपाल इसकी पड़ताल कर रहे हैं। इसके बाद ही अंतिम रूप से कुछ कहा जा सकता है। इसी प्रकार कोन के गढवां में भी पर्याप्त जमीन होने की बात कही जा रही है।
वृहद गोशाला जिसमें तीन हजार गोवंशों के रहने की व्यवस्था होगी, के लिए कम से कम आठ एकड़ जमीन केवल गोशाला के लिए आवश्यक होगी। इसी प्रकार जब इतने गोवंश होंगे तो बायोगैस प्लांट, बर्मी कंपोस्ट, चारागाह आदि के लिए भी कम से कम 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। इतनी जमीन एक साथ किसी ग्राम सभा में उपलब्ध होना कठिन है। इसी लिए जिन जमीनों के प्रस्ताव आए हैं। पहले उनकी लेखपाल के माध्यम से पड़ताल की जा रही है। कागजों पर भूमि के उपलब्ध होने के बाद ही आगे कदम बढ़ाया जाएगा। विभाग के अनुसार इस प्रकार के गोआश्रय स्थल पर कम से कम 12 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अभी 300 गोवंश के आश्रय स्थल पर तकरीबन एक करोड़ रुपये का खर्च आता है। वैसे तो यह योजना जिले के सभी चार तहसीलों के लिए है लेकिन पहले चरण में अभी सदर तहसील में ही जगह तलाशी जा रही है।
मिर्जापुर। गोशाला में गाय के गोबर से कंपोस्ट खाद संग गोबर गैस अर्थात ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा। गोशाला की उपजाऊ जमीन पर पशुओं के लिए हरा चारा भी उगाया जाएगा। वृहद गोशाला 2000-3000 योजना के तहत चारों तहसीलों में इसकी व्यवस्था करने की तैयारी चल रही है। 25 से 50 एकड़ जमीन पर प्रति तहसील में वृहद गोशाला बनाया जाएगा। दूध, कंपोस्ट व खाद आदि की बिक्री से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। गोशालाओं को आपस में लिंक करके ईंधन उत्पादन का बेहतर कार्य किया जा सकता है।
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वर्जन
गोशाला के लिए भूमि तलाशी जा रही है। कई जगह से प्रस्ताव आए हैं लेकिन पहले उनकी स्थिति व वैधानिक स्थिति के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। - डा. केएन कुशवाहा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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वृहद गोशाला जिसमें तीन हजार गोवंशों के रहने की व्यवस्था होगी, के लिए कम से कम आठ एकड़ जमीन केवल गोशाला के लिए आवश्यक होगी। इसी प्रकार जब इतने गोवंश होंगे तो बायोगैस प्लांट, बर्मी कंपोस्ट, चारागाह आदि के लिए भी कम से कम 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। इतनी जमीन एक साथ किसी ग्राम सभा में उपलब्ध होना कठिन है। इसी लिए जिन जमीनों के प्रस्ताव आए हैं। पहले उनकी लेखपाल के माध्यम से पड़ताल की जा रही है। कागजों पर भूमि के उपलब्ध होने के बाद ही आगे कदम बढ़ाया जाएगा। विभाग के अनुसार इस प्रकार के गोआश्रय स्थल पर कम से कम 12 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अभी 300 गोवंश के आश्रय स्थल पर तकरीबन एक करोड़ रुपये का खर्च आता है। वैसे तो यह योजना जिले के सभी चार तहसीलों के लिए है लेकिन पहले चरण में अभी सदर तहसील में ही जगह तलाशी जा रही है।
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मिर्जापुर। गोशाला में गाय के गोबर से कंपोस्ट खाद संग गोबर गैस अर्थात ऊर्जा का उत्पादन भी किया जाएगा। गोशाला की उपजाऊ जमीन पर पशुओं के लिए हरा चारा भी उगाया जाएगा। वृहद गोशाला 2000-3000 योजना के तहत चारों तहसीलों में इसकी व्यवस्था करने की तैयारी चल रही है। 25 से 50 एकड़ जमीन पर प्रति तहसील में वृहद गोशाला बनाया जाएगा। दूध, कंपोस्ट व खाद आदि की बिक्री से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। गोशालाओं को आपस में लिंक करके ईंधन उत्पादन का बेहतर कार्य किया जा सकता है।
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गोशाला के लिए भूमि तलाशी जा रही है। कई जगह से प्रस्ताव आए हैं लेकिन पहले उनकी स्थिति व वैधानिक स्थिति के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। - डा. केएन कुशवाहा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी