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Mirzapur News: डिघिया नाले पर लाल निशान से 19 सेमी बह रही सरयू
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डिघिया नाले पर बना गेज।
शारदा, गिरिजा और सरयू बैराज से शुक्रवार को 2.57 लाख क्यूसेक पानी सरयू नदी में छोड़ा गया। इसका प्रभाव शनिवार सुबह तक जलस्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। गेज रीडर महेंद्र के अनुसार बदरहुआ नाले पर बृहस्पतिवार की शाम चार बजे नदी का जलस्तर 70.62 मीटर दर्ज किया गया था। शुक्रवार को 23 सेंटीमीटर बढ़कर 70.85 मीटर पहुंच गया। वहीं डिघिया नाले पर जलस्तर 69.95 मीटर से बढ़कर 70.21 मीटर हो गया। यहां 24 घंटे में 26 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। डिघिया नाले पर खतरे का निशान 70.40 मीटर है। ऐसे में नदी का जलस्तर अब लाल निशान से महज 19 सेंटीमीटर नीचे रह गया है। वहीं बदरहुआ नाले पर खतरे का बिंदु 71.68 मीटर निर्धारित है। बीते 96 घंटे में बैराजों से करीब 10.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े गए। जलस्तर में लगभग एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसके चलते बाढ़ का पानी अब खेतों की ओर फैलने लगा है और तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के सहबदिया गांव के सामने शुक्रवार को तेज कटान के चलते किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि नदी में समा गई। जय सिंह की करीब 10 बिस्वा और अन्य किसानों की तीन बिस्वा भूमि कटकर घाघरा नदी में समा गई। इसके अलावा जगदीश, पतिराज और रामदरस की कृषि भूमि भी कटान की चपेट में आ गई। ग्रामीणों का कहना है कि 15 बिस्वा भूमि और लगभग 50 परक्यूपाइन के ढांचे भी नदी में बह गए हैं।
पूर्व प्रधान जोखन पटेल ने कहा कि कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से ढाई करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सुरक्षात्मक कार्य और लगाए गए परक्यूपाइन अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो कटान और तेज हो सकती है।
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उपजिलाधिकारी सगड़ी संजीव कुमार राय ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराने के निर्देश संबंधित लेखपाल को दिए गए हैं। कटान से प्रभावित किसानों की रिपोर्ट तैयार कर तहसील को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि शासन की ओर से नियमानुसार मुआवजे की कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके। वहीं, प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए है और तटवर्ती गांवों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
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सगड़ी तहसील क्षेत्र के सहबदिया गांव के सामने शुक्रवार को तेज कटान के चलते किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि नदी में समा गई। जय सिंह की करीब 10 बिस्वा और अन्य किसानों की तीन बिस्वा भूमि कटकर घाघरा नदी में समा गई। इसके अलावा जगदीश, पतिराज और रामदरस की कृषि भूमि भी कटान की चपेट में आ गई। ग्रामीणों का कहना है कि 15 बिस्वा भूमि और लगभग 50 परक्यूपाइन के ढांचे भी नदी में बह गए हैं।
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पूर्व प्रधान जोखन पटेल ने कहा कि कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से ढाई करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सुरक्षात्मक कार्य और लगाए गए परक्यूपाइन अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो कटान और तेज हो सकती है।
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उपजिलाधिकारी सगड़ी संजीव कुमार राय ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराने के निर्देश संबंधित लेखपाल को दिए गए हैं। कटान से प्रभावित किसानों की रिपोर्ट तैयार कर तहसील को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि शासन की ओर से नियमानुसार मुआवजे की कार्रवाई समय पर सुनिश्चित की जा सके। वहीं, प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए है और तटवर्ती गांवों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।