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Mirzapur News: रामगया घाट पर आज से पिंडदान, अव्यवस्थाओं का बोलबाला
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पितृपक्ष में रोज हजारों श्रद्धालु पहुंचेंगे, कीचड़-गंदगी और बैरिकेडिंग के अभाव से बढ़ेगी परेशानी
विंध्याचल। पितृपक्ष शुरू होते ही शनिवार से विंध्य क्षेत्र के प्रमुख रामगया घाट पर पिंडदान और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। 15 दिनों तक रोजाना हजारों लोग पितरों का तर्पण और पिंडदान करने पहुंचेंगे। अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, लेकिन घाट पर तैयारियों के नाम पर अव्यवस्था हावी है।
बारिश के कारण रामगया घाट के दोनों ओर कीचड़ है। घाट पर बैरिकेडिंग नहीं कराई गई है। शिवपुर बाजार से घाट तक भी गंदगी और कीचड़ से श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ेगी। शौचालय और पेयजल की व्यवस्था भी नदारद है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाट पर जगह पहले ही कम हो गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं को एकमात्र चबूतरे पर पिंडदान करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। चबूतरे के ऊपर पेड़ से लटका जर्जर टिनशेड भी खतरे का सबब बना हुआ है। आरोप है कि नगरपालिका की ओर से घाट की समुचित सफाई, सिल्ट हटाने और बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं कराई गई है। पितृपक्ष में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद व्यवस्थाएं दुरुस्त न होने से हादसे आशंका बनी हुई है।
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विंध्याचल। पितृपक्ष शुरू होते ही शनिवार से विंध्य क्षेत्र के प्रमुख रामगया घाट पर पिंडदान और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। 15 दिनों तक रोजाना हजारों लोग पितरों का तर्पण और पिंडदान करने पहुंचेंगे। अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, लेकिन घाट पर तैयारियों के नाम पर अव्यवस्था हावी है।
बारिश के कारण रामगया घाट के दोनों ओर कीचड़ है। घाट पर बैरिकेडिंग नहीं कराई गई है। शिवपुर बाजार से घाट तक भी गंदगी और कीचड़ से श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ेगी। शौचालय और पेयजल की व्यवस्था भी नदारद है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाट पर जगह पहले ही कम हो गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं को एकमात्र चबूतरे पर पिंडदान करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। चबूतरे के ऊपर पेड़ से लटका जर्जर टिनशेड भी खतरे का सबब बना हुआ है। आरोप है कि नगरपालिका की ओर से घाट की समुचित सफाई, सिल्ट हटाने और बैरिकेडिंग की व्यवस्था नहीं कराई गई है। पितृपक्ष में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बावजूद व्यवस्थाएं दुरुस्त न होने से हादसे आशंका बनी हुई है।
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