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Mirzapur News: एक एक्सरे मशीन खराब, दूसरी पर लंबी कतार
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मिर्जापुर। मंडलीय अस्पताल में मरीजों को एक्स-रे कराने में खासी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। यहां दो डिजिटल एक्सरे मशीन लगाई गई हैं, जिसमें से एक लंबे समय से खराब है।
ऐसे में मरीजों को पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। सुबह ओपीडी में पहुंचे मरीज को जांच कराने में शाम हो जाती है। ऐसे में लोगों को विवश होकर लोग निजी डायग्नोस्टिक सेंटर जाना पड़ता है।
मंडलीय अस्पताल में दो डिजिटल और एक मैनुअल एक्सरे मशीन लगाई है।
मैनुअल एक्सरे मशीन पर सिर्फ मेडिको लीगल के मामलों में जांच होता है। डिजिटल एक्सरे मशीन पहले एक थी, जो अक्सर खराब हो जाती थी। लोगों को बाहर एक्सरे कराना पड़ता था।
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एक साल पहले एक और डिजिटल एक्सरे मशीन मंगाई गई थी। इससे मरीजों की समस्या का समाधान होने की उम्मीद जगी थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विभिन्न विभागों की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 180 मरीजों को एक्स-रे जांच लिखी जाती है।
एक मशीन खराब होने के कारण जांच के लिए मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। चार से पांच घंटे तक मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। सुबह अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को एक्सरे कराने में शाम हो जाती है।
दो बजे के बाद अस्पताल की ओपीडी बंद हो जाती है। ऐसे में मरीज एक्सरे की जांच रिपोर्ट उस दिन डाॅक्टर को नहीं दिखा पाते। विवश होकर लोग निजी जांच कंद्रों पर चले जाते है। लोगाें का भी आरोप है कि जानबूझ कर मशीन खराब कर दी जाती है, ताकि मरीज बाहर जाकर एक्सरे कराएं, जिससे उनको कमीशन मिलता रहे।
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ऐसे में मरीजों को पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। सुबह ओपीडी में पहुंचे मरीज को जांच कराने में शाम हो जाती है। ऐसे में लोगों को विवश होकर लोग निजी डायग्नोस्टिक सेंटर जाना पड़ता है।
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मंडलीय अस्पताल में दो डिजिटल और एक मैनुअल एक्सरे मशीन लगाई है।
मैनुअल एक्सरे मशीन पर सिर्फ मेडिको लीगल के मामलों में जांच होता है। डिजिटल एक्सरे मशीन पहले एक थी, जो अक्सर खराब हो जाती थी। लोगों को बाहर एक्सरे कराना पड़ता था।
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एक साल पहले एक और डिजिटल एक्सरे मशीन मंगाई गई थी। इससे मरीजों की समस्या का समाधान होने की उम्मीद जगी थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विभिन्न विभागों की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 180 मरीजों को एक्स-रे जांच लिखी जाती है।
एक मशीन खराब होने के कारण जांच के लिए मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। चार से पांच घंटे तक मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। सुबह अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को एक्सरे कराने में शाम हो जाती है।
दो बजे के बाद अस्पताल की ओपीडी बंद हो जाती है। ऐसे में मरीज एक्सरे की जांच रिपोर्ट उस दिन डाॅक्टर को नहीं दिखा पाते। विवश होकर लोग निजी जांच कंद्रों पर चले जाते है। लोगाें का भी आरोप है कि जानबूझ कर मशीन खराब कर दी जाती है, ताकि मरीज बाहर जाकर एक्सरे कराएं, जिससे उनको कमीशन मिलता रहे।