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जैविक खेती को बढ़ावा देना जरूरी
ब्यूरो/अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Tue, 09 Feb 2016 12:40 AM IST
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स्थापना के शताब्दी वर्ष पर कृषि विज्ञान केंद्र में दो दिवसीय राष्ट्रीय
संगोष्ठी शुभारंभ सोमवार को हुआ। जिसमें कृषि वैज्ञानिकों ने जैविक खेती को
बढ़ावा देने पर बल दिया। शुुुुभारंभ मुख्य अतिथि व एबीटीएल के डॉ. निलेश
देश पांडेय ने महामना की मूर्ति पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
मुख्य अतिथि ने स्मारिका एवं पुस्तक का विमोचन किया ।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कृषि में जैविक खेती प्रभाव द्वारा सतत ग्रामीण विकास विषय पर चर्चा की जा रही है। गोष्ठी में देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। मुख्य अतिथि डॉ. निलेश देशपांडे ने एबीटीएल कंपनी के द्वारा बनाये जा रहे जैविक उत्पादों के बारे में बताया। साथ ही कपंनी के जादुई बाल्टी के बारे में बताया। जिसमें घर के कचरे को उनके कपंनी द्वारा बनाये गये रसायन द्वारा खाद में बदल कर इस उपयोग गृहवाटिका या खेत में करने के बारे में जानकारी दी, साथ ही बने उत्पाद को पर्यावरण मित्र भी बताया।
उन्होंने कहा कि इसके प्रयोग से मृदा दूषित नहीं होती। संगोष्ठी के अध्यक्षीय उद्बोधन में कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक, प्रो. रवि प्रताप सिंह ने जैविक खेती का आज की जरूरत बताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से आज मृदा बंजर हो रही है।
जिसके दूरगामी प्रभाव दिखने लगे हैं। हमें रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक उर्वरकों पर बल देने की जरूरत है, जिससे न केवल धीरे-धीरे मृदा का स्वास्थ्य सुधरेगा बल्कि फसलोत्पादन में भी वृद्धि होगी। विशिष्ट अतिथि शैलेन्द्र सिंह, पूर्व डिप्टी एसपी ने मृदा स्वास्थ्य सुधारने एवं जैविक खेती की तकनीक के बारे में बताया।
संगोष्ठी में आये हुए प्रतिभागियों एवं अतिथियोें का स्वागत केन्द्र के अध्यक्ष/कार्यक्रम समन्वयक एवं संगोष्ठी निदेशक प्रो. श्रीराम सिंह ने किया। स्वागत भाषण में जैविक खेती के महत्व को बिन्दुवार बताया।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में 10 अग्रणी शोध पत्र पढ़े गए और 75 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए एवं 40 पोस्टरों का प्रदर्शन भी किया गया। संचालन आयोजन सचिव प्रो. गुरु प्रसाद सिंह द्वारा किया गया। वहीं धन्यवाद भाषण आयोजन सचिव डॉ. एसएन सिंह द्वारा किया गया।
अग्रणी बैंक इलाहाबाद बैंक, मीरजापुर, कोरो मंडल, भारतीय जीवन बीमा निगम, इंदौर बायोटेक के प्रतिनिधियों को संगोष्ठी में उनके सहयोग के लिए सम्मानित किया गया। केंद्र के वरिष्ठ प्रो. एसपी सिंह, प्रो. संत प्रसाद, डॉ. जय पी. राय, डॉ. एसके गोयल, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. मुकेश कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में कृषि में जैविक खेती प्रभाव द्वारा सतत ग्रामीण विकास विषय पर चर्चा की जा रही है। गोष्ठी में देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। मुख्य अतिथि डॉ. निलेश देशपांडे ने एबीटीएल कंपनी के द्वारा बनाये जा रहे जैविक उत्पादों के बारे में बताया। साथ ही कपंनी के जादुई बाल्टी के बारे में बताया। जिसमें घर के कचरे को उनके कपंनी द्वारा बनाये गये रसायन द्वारा खाद में बदल कर इस उपयोग गृहवाटिका या खेत में करने के बारे में जानकारी दी, साथ ही बने उत्पाद को पर्यावरण मित्र भी बताया।
उन्होंने कहा कि इसके प्रयोग से मृदा दूषित नहीं होती। संगोष्ठी के अध्यक्षीय उद्बोधन में कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक, प्रो. रवि प्रताप सिंह ने जैविक खेती का आज की जरूरत बताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से आज मृदा बंजर हो रही है।
जिसके दूरगामी प्रभाव दिखने लगे हैं। हमें रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक उर्वरकों पर बल देने की जरूरत है, जिससे न केवल धीरे-धीरे मृदा का स्वास्थ्य सुधरेगा बल्कि फसलोत्पादन में भी वृद्धि होगी। विशिष्ट अतिथि शैलेन्द्र सिंह, पूर्व डिप्टी एसपी ने मृदा स्वास्थ्य सुधारने एवं जैविक खेती की तकनीक के बारे में बताया।
संगोष्ठी में आये हुए प्रतिभागियों एवं अतिथियोें का स्वागत केन्द्र के अध्यक्ष/कार्यक्रम समन्वयक एवं संगोष्ठी निदेशक प्रो. श्रीराम सिंह ने किया। स्वागत भाषण में जैविक खेती के महत्व को बिन्दुवार बताया।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में 10 अग्रणी शोध पत्र पढ़े गए और 75 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए एवं 40 पोस्टरों का प्रदर्शन भी किया गया। संचालन आयोजन सचिव प्रो. गुरु प्रसाद सिंह द्वारा किया गया। वहीं धन्यवाद भाषण आयोजन सचिव डॉ. एसएन सिंह द्वारा किया गया।
अग्रणी बैंक इलाहाबाद बैंक, मीरजापुर, कोरो मंडल, भारतीय जीवन बीमा निगम, इंदौर बायोटेक के प्रतिनिधियों को संगोष्ठी में उनके सहयोग के लिए सम्मानित किया गया। केंद्र के वरिष्ठ प्रो. एसपी सिंह, प्रो. संत प्रसाद, डॉ. जय पी. राय, डॉ. एसके गोयल, डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. मुकेश कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।