Vindhyachal: नवरात्र मेले में तंबाकू व धूम्रपान प्रतिबंधित, मिर्जापुर DM बोलीं- नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
विंध्याचल नवरात्र मेला में कोटपा अधिनियम 2003 के तहत क्षेत्र को तंबाकू व धूम्रपान मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने मंगलवार को बताया कि यदि इसका उल्लंघन किया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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शारदीय नवरात्र के अवसर पर विंध्याचल धाम में श्रद्धालुओं का तांत लगा हुआ है। नवरात्र मेला में कोटपा अधिनियम 2003 के तहत क्षेत्र को तंबाकू व धूम्रपान मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने बताया कि यदि इसका उल्लंघन किया गया तो कार्रवाई की जाएगी। निर्देश दिया कि इसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाय।
मेला क्षेत्र में तंबाकू व धूम्रपान की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है। डीएम के अनुसार मेला क्षेत्र में आने वाले लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। विंध्याचल नवरात्र मेला 25 सितंबर को शुरू हुआ जो चार अक्तूबर तक चलेगा। देश के कोने-कोने से लोग यहां माता विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने और मुंडन संस्कार कराने आते हैं।
खाद्य सामग्री के पांच नमूने लिए गए
विंध्याचल धाम में लगे मेले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से अभियान चलाकर खाद्य पदार्थों की जांच की गई। दूध व दुग्ध पदार्थ से निर्मित मिठाइयां व अन्य खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से पांच नमूने संकलित किए गए। जिसमें कतवारू का पुरा से मूंगफली का दाना, प्रसाद का पुरा स्थित दो दुकान से मखाना व किशमिश तथा दो अन्य दुकानों से बिस्कुट और बेसन के लड्डू का नमूना लिया गया।
नवरात्र मेला के तीसरे दिन दर्शनार्थियों का तांता
शारदीय नवरात्र मेला के तीसरे दिन विंध्यवासिनी धाम में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। देवी दरबार पहुंचे आस्थावानों ने मां चंद्रघंटा स्वरूप में माता विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया। भोर में माता के भव्य श्रृंगार पूजन आरती के पूर्व से ही विंध्य धाम की गलियां श्रद्धालुओं से पट गईं। मां के भव्य स्वरूप के दर्शन के लिए लंबी कतार में खड़े भक्त लालायित दिखे। देवी धाम में मां के दर्शन पूजन के लिए दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा।
देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने बड़े श्रद्धा भाव से देवी धाम में मत्था टेका। इसके पूर्व देवी भक्तों ने विंध्याचल के गंगा घाटों पर स्नान ध्यान किया। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अष्टभुजा पहाड़ी पर विराजमान महाकाली और मां अष्टभुजी देवी के दरबार में जाकर शीश नवाया। आदिशक्ति के जयघोष के बीच घंटा घड़ियाल, शंख, डमरू और शहनाई की गूंज से संपूर्ण मंदिर परिसर गुंजायमान रहा।