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लालटेन युग से उजाले की ओर लौटने की आस ने बढ़ाई रौनक
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अहरौरा । लालटेन युग में जी रहे राजस्व गांव जंगल महाल व छातो ग्रामसभा के मजरों में जल्द ही दूधिया रोशनी जगमगाएगी। इलाके के मेड़रिया घुघ्घा, मदना सारादह कुम्हियां सहित कई इलाको एवं विद्युतीकरण से वंचित मजरों पर विभाग की नजरें इनायत हो गई हैै। अब इन क्षेत्रों के लोग भी लालटेन युग से बाहर आधुनिक भारत से जुड़ सकेंगे। गुरुवार को दिन भर विद्युत विभाग की टीम ने गांव के कई इलाकों का सर्वे किया। साथ ही ग्रामसभा छातो के लतीफपुर फुलवरिया और हिनौता का भी सर्वे कराया गया है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो एक महीने के भीतर गांव में बिजली की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
बताते चले कि संपूर्ण विद्युतीकरण के हवा- हवाई दावों को गंभीरता से लेते हुए अमर उजाला ने ऊर्जा राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र की पड़ताल की तो मामला प्रकाश में आया कि ग्रामसभा जंगल महाल और छातो के कई मजरे आज भी विद्युतीकरण से वंचित है। पड़ताल के बाद ‘ऊर्जा राज्यमंत्री के इलाके में अब भी लालटेन ही सहारा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर विभाग को आइना दिखाया तो विभाग सकते में आ गया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा हाथो हाथ लिया गया। आनन-फानन में इन स्थलों की पड़ताल की गई तो विभाग की सूची में इन मजरों का नाम ही नदारद मिला, इतना ही नहीं हाय तौबा मचा तो गुरुवार को स्थलीय निरीक्षण भी किया गया। जहां चिह्नित गांवों/मजरो के अलावा मदना मजरा भी मिला जहां विद्युत विस्तार नहीं हुआ है। गुरुवार को देर शाम तक विभाग के अलम गारों ने जंगलमहाल के मेरड़िया, सारादह, मदीना, घुघ्घा, और कुम्हिया का भी निरीक्षण किया। इतना ही नहीं छातो गांव के लतीफपुर फुलवरिया हिनौता में भी पर्याप्त विद्युतीकरण नहीं पाया गया। विभागीय लोगों के क्षेत्र में सर्वे से ग्रामीणों में लालटेन युग से बाहर आने की आस जगी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन गांव के किसानों मजदूरों को विद्युतीकरण की सौगात मिल जाएगी। यहां के लोग भी टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसे बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल करन पाएंगे। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी। इस संबंध में जंगल महाल ग्रामसभा की प्रधान उर्मिला देवी के पति रामविलास ने बताया कि गुरुवार को विद्युत विभाग के कई अफसरों ने गांव के मजारों की पड़ताल की जहां विद्युतीकरण नहीं किया गया है तथा उन्होंने शीघ्र ही विद्युतीकरण कराए जाने का आश्वासन दिया है जिससे कयास लगाया जा रहा है कि जल्द ही जंगलमहाल और छातो के विद्युतीकरण से वंचित गांव के मजरे दूधिया रोशनी से जगमगाएंगे।
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बताते चले कि संपूर्ण विद्युतीकरण के हवा- हवाई दावों को गंभीरता से लेते हुए अमर उजाला ने ऊर्जा राज्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र की पड़ताल की तो मामला प्रकाश में आया कि ग्रामसभा जंगल महाल और छातो के कई मजरे आज भी विद्युतीकरण से वंचित है। पड़ताल के बाद ‘ऊर्जा राज्यमंत्री के इलाके में अब भी लालटेन ही सहारा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर विभाग को आइना दिखाया तो विभाग सकते में आ गया। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा हाथो हाथ लिया गया। आनन-फानन में इन स्थलों की पड़ताल की गई तो विभाग की सूची में इन मजरों का नाम ही नदारद मिला, इतना ही नहीं हाय तौबा मचा तो गुरुवार को स्थलीय निरीक्षण भी किया गया। जहां चिह्नित गांवों/मजरो के अलावा मदना मजरा भी मिला जहां विद्युत विस्तार नहीं हुआ है। गुरुवार को देर शाम तक विभाग के अलम गारों ने जंगलमहाल के मेरड़िया, सारादह, मदीना, घुघ्घा, और कुम्हिया का भी निरीक्षण किया। इतना ही नहीं छातो गांव के लतीफपुर फुलवरिया हिनौता में भी पर्याप्त विद्युतीकरण नहीं पाया गया। विभागीय लोगों के क्षेत्र में सर्वे से ग्रामीणों में लालटेन युग से बाहर आने की आस जगी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन गांव के किसानों मजदूरों को विद्युतीकरण की सौगात मिल जाएगी। यहां के लोग भी टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसे बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल करन पाएंगे। बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलेगी। इस संबंध में जंगल महाल ग्रामसभा की प्रधान उर्मिला देवी के पति रामविलास ने बताया कि गुरुवार को विद्युत विभाग के कई अफसरों ने गांव के मजारों की पड़ताल की जहां विद्युतीकरण नहीं किया गया है तथा उन्होंने शीघ्र ही विद्युतीकरण कराए जाने का आश्वासन दिया है जिससे कयास लगाया जा रहा है कि जल्द ही जंगलमहाल और छातो के विद्युतीकरण से वंचित गांव के मजरे दूधिया रोशनी से जगमगाएंगे।
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