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निर्माण सामग्री का करोड़ों बकाया, प्रधान परेशान
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मनरेगा के कराए गए कार्यों में प्रयुक्त निर्माण सामग्री का भुगतान नहीं होने से ग्राम प्रधानों व सप्लायरों के बीच आए दिन तकरार हो रही है। अधिकारियों के निर्देश पर जिले के अधिकांश विकास खंडों में स्थित ग्राम पंचायतों में पक्के निर्माण कार्य कराए दिए गए, लेकिन आठ माह बीत गए और अभी तक निर्माण सामग्री का भुगतान नहीं हुआ है।
सिटी ब्लॉक के अलावा छानबे, लालगंज, कोन, हलिया, राजगढ़, पटेहरा, नरायनपुर, मझवां, सीखड़ सहित अन्य विकास खंडों में ग्राम प्रधान भुगतान के लिए ब्लॉक मुख्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं, वहीं सप्लायर और ग्राम प्रधानों के बीच भुगतान को लेकर आए दिन तकरार हो रही है। ग्राम पंचायतों में गिट्टी, बालू, ईंट, सीमेंट, इंटरलांकिंग ब्रिक आदि का करोड़ों रुपये बकाया है। सप्लायरों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में निर्माण सामग्री लेकर काम तो करा लिए गए, लेकिन अभी तक उसका भुगतान नहीं किया गया है। भुगतान नहीं होने से नाराज कई सप्लायरों ने अधिकांश ग्राम पंचायत को निर्माण सामग्री देने से मना कर दिया है। इससे मनरेगा के तहत कराए जाने वाले काम बंद हो गए और मनरेगा मजदूरों के समक्ष भी भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। जिला मुख्यालय से सटे खजुरी, हरिहरपुर बेदौली, चेरुईराम, राजपुर, धौरुपुर, भरुहना, अघौली, अर्जुनपुर सहित अन्य ग्राम पंचायतों का लगभग छह करोड़ रुपये मैटेरियल का बकाया है। उधर, विकास खंड छानबे में मनरेगा सामग्री मद में पांच करोड़ रुपये का भुगतान अधर में लटका हुआ है। ग्राम प्रधान संतोष कुमार तिवारी, शहीदा बानो, सरिता यादव, सीता देवी, कृपा शंकर तिवारी आदि का कहना है कि मनरेगा में पक्का कार्य कराने के लिए आपूर्तिकर्ता बकाया की वजह से निर्माण सामग्री देने को तैयार नहीं हैं। इससे गांव का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। उधर, नरायनपुर ब्लॉक क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत हुए पक्के कार्यों का लगभग 82 लाख रुपये बकाया है। सीखड़ ब्लॉक में मनरेगा के तहत हुए पक्के कार्यों का लगभग 70 लाख रुपये सप्लायरों का भुगतान बकाया चला आ रहा है। पटेहरा विकास खंड में मनरेगा के तहत हुए पक्के कार्यों का लगभग दो करोड़ रुपये भुगतान बकाया होने से ग्राम प्रधानों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पहले तो मनरेगा के कार्यों में 60-40 का अनुपात बैठाना मुश्किल होता है। जब कभी बीडीओ से अनुमति मिली भी तो कोरम पूर्ण कर गांव के विकास के लिए जरूरी काम भी कराए गए। अब भुगतान के लिए आठ महीने से ग्राम प्रधान भुगतान के लिए ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। राजेश पटेल, पवन कुमार, विभा तिवारी, दिव्या सिंह, समेत कई अन्य ग्राम प्रधानों का आरोप है कि तत्कालीन परियोजना निदेशक के मौखिक आदेश पर 60-40 के अनुपात की अनदेखी कर रूर्बन के तहत 15 ग्राम पंचायतों में डेढ़ करोड़ का ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास कर पक्का काम कराने का अधिकार देकर काम करवा लिया गया। अब जब भुगतान की बारी आई तो वर्तमान पीडी द्वारा 60-40 के अनुपात की बात कर प्रधानों को पशोपेश में डाल दिया गया है। राजगढ विकास खंड के 83 ग्राम पंचायतों के 186 कार्यों के कुल 668 लाख रुपये बकाया चल रहा है।
एपीओ मनरेगा पंकज कुमार ने बताया कि जैसे ही शासन से धन उपलब्ध होगा, ग्राम पंचायतों का भुगतान कर दिया जाएगा। भुगतान नहीं होने से मनरेगा मजदूर ग्राम प्रधानों से आए दिन मजदूरी को लेकर तकरार कर रहे हैं। हलिया विकास खंड के 79 ग्राम पंचायतों में लगभग 8 माह पूर्व हुए मनरेगा के कार्य के तहत मैटेरियल का भुगतान नहीं हो पा रहा है। विकासखंड में वर्ष 2021- 22 में कुल 7 करोड़ 20 लाख 81 हजार तथा वर्ष 2022 -23 में 64 लाख 46 हजार रुपये बकाया है। ग्राम प्रधान मड़वा धनावल रमेश सिंह कहना है कि 8 माह पूर्व तथा विगत वर्ष के मैटेरियल का बकाया धनराशि नहीं मिलने के कारण मैटेरियल सप्लायर निर्माण सामग्री नहीं दे रहे हैं। कर्ज लेकर कार्य किया जा रहा है। कछवां विकासखंड के मझवां में कुल 45 लाख रुपये मनरेगा के पक्के कार्यों का मजदूरों का बकाया है। इससे श्रमिक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। डीसी मनरेगा मो.नफीस का कहना है कि मनरेगा के तहत हुए कार्यों में प्रयुक्त मैटेरियल के भुगतान का मामला भारत सरकार से जुड़ा हुआ है। भुगतान के लिए सरकार को पत्र भी लिखा गया है। संभवत: वहां से पैसा जारी भी कर दिया गया है। आगामी 10 से 12 दिनों में बकाए का भुगतान हो जाएगा।
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सिटी ब्लॉक के अलावा छानबे, लालगंज, कोन, हलिया, राजगढ़, पटेहरा, नरायनपुर, मझवां, सीखड़ सहित अन्य विकास खंडों में ग्राम प्रधान भुगतान के लिए ब्लॉक मुख्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं, वहीं सप्लायर और ग्राम प्रधानों के बीच भुगतान को लेकर आए दिन तकरार हो रही है। ग्राम पंचायतों में गिट्टी, बालू, ईंट, सीमेंट, इंटरलांकिंग ब्रिक आदि का करोड़ों रुपये बकाया है। सप्लायरों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में निर्माण सामग्री लेकर काम तो करा लिए गए, लेकिन अभी तक उसका भुगतान नहीं किया गया है। भुगतान नहीं होने से नाराज कई सप्लायरों ने अधिकांश ग्राम पंचायत को निर्माण सामग्री देने से मना कर दिया है। इससे मनरेगा के तहत कराए जाने वाले काम बंद हो गए और मनरेगा मजदूरों के समक्ष भी भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। जिला मुख्यालय से सटे खजुरी, हरिहरपुर बेदौली, चेरुईराम, राजपुर, धौरुपुर, भरुहना, अघौली, अर्जुनपुर सहित अन्य ग्राम पंचायतों का लगभग छह करोड़ रुपये मैटेरियल का बकाया है। उधर, विकास खंड छानबे में मनरेगा सामग्री मद में पांच करोड़ रुपये का भुगतान अधर में लटका हुआ है। ग्राम प्रधान संतोष कुमार तिवारी, शहीदा बानो, सरिता यादव, सीता देवी, कृपा शंकर तिवारी आदि का कहना है कि मनरेगा में पक्का कार्य कराने के लिए आपूर्तिकर्ता बकाया की वजह से निर्माण सामग्री देने को तैयार नहीं हैं। इससे गांव का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। उधर, नरायनपुर ब्लॉक क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत हुए पक्के कार्यों का लगभग 82 लाख रुपये बकाया है। सीखड़ ब्लॉक में मनरेगा के तहत हुए पक्के कार्यों का लगभग 70 लाख रुपये सप्लायरों का भुगतान बकाया चला आ रहा है। पटेहरा विकास खंड में मनरेगा के तहत हुए पक्के कार्यों का लगभग दो करोड़ रुपये भुगतान बकाया होने से ग्राम प्रधानों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। पहले तो मनरेगा के कार्यों में 60-40 का अनुपात बैठाना मुश्किल होता है। जब कभी बीडीओ से अनुमति मिली भी तो कोरम पूर्ण कर गांव के विकास के लिए जरूरी काम भी कराए गए। अब भुगतान के लिए आठ महीने से ग्राम प्रधान भुगतान के लिए ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। राजेश पटेल, पवन कुमार, विभा तिवारी, दिव्या सिंह, समेत कई अन्य ग्राम प्रधानों का आरोप है कि तत्कालीन परियोजना निदेशक के मौखिक आदेश पर 60-40 के अनुपात की अनदेखी कर रूर्बन के तहत 15 ग्राम पंचायतों में डेढ़ करोड़ का ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास कर पक्का काम कराने का अधिकार देकर काम करवा लिया गया। अब जब भुगतान की बारी आई तो वर्तमान पीडी द्वारा 60-40 के अनुपात की बात कर प्रधानों को पशोपेश में डाल दिया गया है। राजगढ विकास खंड के 83 ग्राम पंचायतों के 186 कार्यों के कुल 668 लाख रुपये बकाया चल रहा है।
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एपीओ मनरेगा पंकज कुमार ने बताया कि जैसे ही शासन से धन उपलब्ध होगा, ग्राम पंचायतों का भुगतान कर दिया जाएगा। भुगतान नहीं होने से मनरेगा मजदूर ग्राम प्रधानों से आए दिन मजदूरी को लेकर तकरार कर रहे हैं। हलिया विकास खंड के 79 ग्राम पंचायतों में लगभग 8 माह पूर्व हुए मनरेगा के कार्य के तहत मैटेरियल का भुगतान नहीं हो पा रहा है। विकासखंड में वर्ष 2021- 22 में कुल 7 करोड़ 20 लाख 81 हजार तथा वर्ष 2022 -23 में 64 लाख 46 हजार रुपये बकाया है। ग्राम प्रधान मड़वा धनावल रमेश सिंह कहना है कि 8 माह पूर्व तथा विगत वर्ष के मैटेरियल का बकाया धनराशि नहीं मिलने के कारण मैटेरियल सप्लायर निर्माण सामग्री नहीं दे रहे हैं। कर्ज लेकर कार्य किया जा रहा है। कछवां विकासखंड के मझवां में कुल 45 लाख रुपये मनरेगा के पक्के कार्यों का मजदूरों का बकाया है। इससे श्रमिक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। डीसी मनरेगा मो.नफीस का कहना है कि मनरेगा के तहत हुए कार्यों में प्रयुक्त मैटेरियल के भुगतान का मामला भारत सरकार से जुड़ा हुआ है। भुगतान के लिए सरकार को पत्र भी लिखा गया है। संभवत: वहां से पैसा जारी भी कर दिया गया है। आगामी 10 से 12 दिनों में बकाए का भुगतान हो जाएगा।
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