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ललही छठ : महिलाओं ने पुत्र के दिर्घायु के लिए की मंगल कामना

Fri, 15 Aug 2025 01:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 15 Aug 2025 01:21 AM IST
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Lalahi Chhath: Women prayed for the long life of their son
बरियाघाट में ललही माता का पूजन अर्चन करती नगर की महिलाएं।-संवाद।
मिर्जापुर। शहर से लेकर गांव तक बृहस्पतिवार को ललही छठ पर पूजन कर महिलाओं ने पुत्रों के लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की मंगल कामना की । गाजे-बाजे के साथ फल-फूल सजे थाल के साथ तालाब व पोखरे के पास टोली में एकत्रित हुईं। दूध-दही से कुंड भरकर ललही माता को महुआ और तिन्नी का चावल चढ़ाकर पूजन किया। इस दौरान महिलाओं ने ललही माता से जुड़ी कथा को सुना और सुनाया।
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नगर में बरियाघाट, फतहांघाट, संकठाघाट, बाबाघाट, नारघाट के अलावा अन्य गंगाघाटों पर दोपहर तक पूजन का दौर चलता रहा। पक्कापोखरा, रमईपट्टी, शुक्लहा, महुवरिया, शबरी, पथरहिया, भरुहना सहित अन्य क्षेत्रों में पूजन किया गया। अघौली, अर्जुनपुर, खजुरी, हरहिरपुर बेदौली, चेरुईराम, भटौली, देवापुर पचवल, राजपुर, लच्छापट्टी, संडवा, पथरा दशौंधी, सिंनहरकला, पिपराडाड़, लोहंदीकला आदि गांवों में ललही माता का पूजन अर्चन किया गया। ड्रमंडगंज में व्रती महिलाओं ने विधि विधान से हल षष्ठी (ललही छठ) की पूजा की। ड्रमंडगंज बाजार, बेलन बरौंधा बाजार, नैड़ी कठारी, रतेह चौराहा, खुंटहा सहित अन्य सभी गांवों में महिलाओं ने फल फूल, दही दूध व महुआ अर्पित करने के बाद शृंगार की वस्तुएं भेंट कर कुंड में स्थापित ललही मां की विधिवत पूजा की। इस दौरान व्रती महिलाओं ने देवी गीत और ललही माता के महात्म की कथा का श्रवण किया। महिलाओं ने एक-दूसरे को प्रसाद वितरण किया। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज बलराम का जन्म हुआ था। पौराणिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में श्रीकृष्ण के जन्म से पहले शेषनाग ने बलराम के रूप में जन्म लिया था। हलिया में पोखरा, मंदिर और जलाशयों के पास एकत्रित महिलाएं गड्ढे में कुश, पलाश, बैर, महुआ आदि वृक्षों की डाल स्थापित कर ललही माता का पूजन अर्चन किया। इस दिन हल से जोते हुए खेत का अनाज नहीं खाया जाता है। इसके बजाय तिन्नी का चावल, भैंस का दूध-दही व घी का उपयोग किया जाता है। कलवारी में राजगढ़ थाना क्षेत्र के रैकरी, रैकरा, कलवारी, धुरकर आदि कई क्षेत्रों में ललही छठ का पर्व धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व भगवान बलराम के जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है। महिलाएं पूजा स्थान पर ही महुए के पत्ते पर महुआ, तिन्नी चावल व दही प्रसाद के रूप में वितरित कीं।
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षष्ठी माता के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु
विंध्याचल। विंध्य पर्वत पर विराजमान माता षष्ठी देवी का बृहस्पतिवार को महिलाओं ने दर्शन-पूजन कर पुत्रों के दीर्घायु के लिए मंगल कामना की। मंदिर को फूलों और झालरों से सजाया गया था। सुबह से देर रात तक षष्ठी माता के दर्शन-पूजन क्रम चलता रहा। माता के धाम में नव दंपती गाजे-बाजे के साथ हाजिरी लगाई। पुत्र प्राप्ति की कामना की। विंध्य पर्वत पर विराजमान पुत्रदायनी मां षष्टी देवी जिन्हें भक्तजन खरष्टि देवी के नाम से पुकारते हैं। बता दें कि भाद्र पद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को ललही छठ का पर्व मां विंध्याचल में धूमधाम से मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार ललही छठ पर्व के दिन महिलाएं पुत्र के लंबी उम्र के लिए मां छठ देवी (कात्यायनी) की पूजा अर्चना बड़े श्रद्धाभाव से करती हैं।
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बरियाघाट में ललही माता का पूजन अर्चन करती नगर की महिलाएं।-संवाद।

बरियाघाट में ललही माता का पूजन अर्चन करती नगर की महिलाएं।-संवाद।

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