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रामकथा सुनने आते हैं लड्डू गोपाल

Wed, 27 Sep 2017 12:24 AM IST
mirzapur news
mirzapur news Updated Wed, 27 Sep 2017 12:24 AM IST
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Laddoo Gopal comes to hear the story
लड्डू गोपाल के साथ पद्मारानी

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 रामकथा का मोह ही ऐसा है कि अच्छे अच्छे खिंचे चले आते हैँ। आजकल प्रतिदिन लड्डू गोपाल कालीखोह मोड़ पर समय से मोरारी बापू की श्रीदेवी मानस कथा सुनने चले आते हैं। उनको यहां लाने की जिम्मेदारी उठाती हैं कांदीवली मुंबई से आई 72 वर्षीया पद्मारानी। पद्मारानी न केवल लड्डू गोपाल को रामकथा सुनाती हैं बल्कि उनके हर सुख सुविधा का ध्यान भी रखती हैं। रामकथा की समाप्ति के बाद लड्डू गोपाल अपने बाक्स में बंद हो जाते हैं। सब कुछ के बाद पद्मारानी कहती हैं कि मै उन्हें नहीं लाती बल्कि लड्डू गोपाल मुझे कथा सुनाने लाते हैं।  

पद्मारानी रोजाना सुबह साढे नौ बजे के पहले कथा स्थल पर पहुंच जाती हैं। उनके साथ एक सजा धजा बाक्स होता है। इस बाक्स में लड्डू गोपाल यानि बाल कृष्ण की प्रतिमा होती है। कृष्ण के इस बाल स्वरूप को पद्मारानी पुत्रवत प्रेम करती हैं। पूरी कथा के दौरान वे लड्डू गोपाल से बातें करती रहती हैं। मंगलवार की कथा के दौरान पद्मारानी सफेद कपड़े को बार बार पानी से भिगो कर लड्डू गोपाल की प्रतिमा को लपेटती रहीं। अपने पंखे से हवा करती रहीं और थोड़ी थोड़ी देर पर पानी के छींटे भी मारती रहीं। पूछने पर बताया कि गर्मी बहुत है लड्डू गोपाल परेशान हैं। मैने सोचा था कि यहां ठंड होगी तो गर्म कपड़े लाई थी लेकिन यहां तो गर्मी है। उन्होंने बताया कि रोज इन्हें सुलाना और भोग लगाना दिनचर्या में शामिल है। इन्हें रामकथा बेहद पसंद है। गिनती नहीं कर सकी हूं कि कितनी रामकथाएं सुन चुकी हूं लड्डू गोपाल के साथ । पद्मारानी का पूरा परिवार मुंबई के कांदीवली में है। बहू बेटे वहां प्ले स्कूल चलाते हैं। पति का बीमारी के चलते निधन हो गया है। पद्मारानी ने बताया कि पति की हालत बेहद खराब थी तो डाक्टर ने कहा था कि 40 दिन से अधिक जीवित नहीं रह पाएंगे लेकिन लड्डू गोपाल के साथ रामकथा सुनने का प्रतिफल यह मिला कि वे बीमारी के बाद 38 वर्ष तक जीवित रहे। मै बता नहीं सकती कि लड्डू गोपाल मेरे लिए क्या हैं। कैलाश पर्वत पर दर्शन करने के लिए गई थी तो लड्डू गोपाल ने ही मेरे प्राण बचाये थे।
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