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राम जागें सदा रावण को सुलाए रखिए : राजेश राज
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काव्यगोष्ठी में उपस्थित अतिथि, सोशल मीडिया
मिर्जापुर। शारदीय नवरात्र व दशहरा के उपलक्ष्य में हिंदी श्री साहित्य संस्थान के सौजन्य से अनगढ़ रोड स्थित सृष्टि राज के आवास पर मंगलवार को काव्य गोष्ठी हुई। गोरखपुर से कवि व आशु संचालक राजेश राज और उनकी धर्मपत्नी नीलम श्रीवास्तव मुख्य अतिथि रहे।
स्वागत अंग वस्त्रम व स्मृति चिह्न देकर मिर्जापुर के कवियों व कवयित्रियों ने किया। प्रारंभ सरस्वती वंदना से इला जायसवाल ने किया। मुख्य अतिथि राजेश राज ने कहा कि हमें अपने अंदर के राम को जगाकर रखना होगा और रावण को सुलाकर।
उन्होंने सुनाया, दीप तुलसी की तरह एक जलाए रखिए। अपने मानस में उजाले को बसाए रखिए। राम रावण सदा हर दिल में रहा करते हैं। राम जागें सदा रावण को सुलाए रखिए। काव्यपाठ के क्रम में आनंद अमित ने सुनाया, रोशन मेरा घर कर देना दिवाली में अबकी चंदा। दीपक जला नहीं पाऊंगा कंगाली में अबकी चंदा।
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अनिल यादव ने पढ़ा, आंखों को तसल्ली मिलती है बहुत यकीनन। चेहरे-चेहरे यहां मुस्कान सजाए हुए हैं। नीलम श्रीवास्तव ने कहा इस प्रकार की कवि गोष्ठियां सुखद अनुभव देती हैं। नंदिनी वर्मा ने सुनाया, ऐ मनुज तू अपनी शक्ति को जरा पहचान ले। बाजुओं में बल है फिर तू क्यों भला एहसान ले। विजय ने पढ़ा, हे आदि पुरुष लें, मनुज रूप जग को मर्यादा बतलाया। संवाद
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स्वागत अंग वस्त्रम व स्मृति चिह्न देकर मिर्जापुर के कवियों व कवयित्रियों ने किया। प्रारंभ सरस्वती वंदना से इला जायसवाल ने किया। मुख्य अतिथि राजेश राज ने कहा कि हमें अपने अंदर के राम को जगाकर रखना होगा और रावण को सुलाकर।
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उन्होंने सुनाया, दीप तुलसी की तरह एक जलाए रखिए। अपने मानस में उजाले को बसाए रखिए। राम रावण सदा हर दिल में रहा करते हैं। राम जागें सदा रावण को सुलाए रखिए। काव्यपाठ के क्रम में आनंद अमित ने सुनाया, रोशन मेरा घर कर देना दिवाली में अबकी चंदा। दीपक जला नहीं पाऊंगा कंगाली में अबकी चंदा।
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अनिल यादव ने पढ़ा, आंखों को तसल्ली मिलती है बहुत यकीनन। चेहरे-चेहरे यहां मुस्कान सजाए हुए हैं। नीलम श्रीवास्तव ने कहा इस प्रकार की कवि गोष्ठियां सुखद अनुभव देती हैं। नंदिनी वर्मा ने सुनाया, ऐ मनुज तू अपनी शक्ति को जरा पहचान ले। बाजुओं में बल है फिर तू क्यों भला एहसान ले। विजय ने पढ़ा, हे आदि पुरुष लें, मनुज रूप जग को मर्यादा बतलाया। संवाद