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कात्यायनी स्वरूप का दर्शन किया भक्तों ने
mirzapur news
Updated Wed, 27 Sep 2017 12:15 AM IST
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मंदिर मे भीड़
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शारदीय नवरात्र के छठवें दिन भक्तों ने मां कात्यायनी के अलौकिक स्वरूप का दर्शन किया। जयकारे से विंध्य धाम गुुंजायमान रहा। मां विंध्यवासिनी के एक झलक पाने को भक्त घंटों लाइन में खड़े रहे। नारियल, चुनरी, माला, फूल, प्रसाद की दूकानों पर मां के भक्तों की कतारें लगी रहीं। गंगा घाटों पर स्नान करने वालों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। मंदिर की छत पर मुंडन संस्कार कराने वालों का तांता लगा रहा। श्रद्घालुओं ने मनौती के अनुसार मां को हलवा और पूड़ी बना कर भोग लगाया।
विंध्यधाम में मां का जयकारा लगाते भक्त दर्शन पाने को लालायित रहे। कोई मां का दर्शन करने के लिए कतार में खड़ा है तो कोई परिवार के साथ विंध्यधाम आकर अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने में लगा रहा। मेला क्षेत्र में कई स्थानों पर भक्तों ने मां को अति प्रिय भोग हलवा व पूड़ी बना कर चढ़ाया। नवरात्र में श्रद्घालु बच्चों का मुंडन कराने के लिए परिवार समेत धाम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बगीचा व कमरों मे रह कर मां को कढ़ाई चढ़ाया। इस अवसर पर परिवार के लोग देवी गीत गाते रहे। गंगा घाटों पर श्रद्घालुओं ने मां गंगा को प्रणाम करके आस्था की डुबकी लगाई। उसके बाद नारियल, चुनरी व प्रसाद लेकर मां भगवती के दर्शन को कतार में खड़े हो गए। चारों ओर मां की जयकारे की गूंज सुनाई दे रही थी। मंदिर बंद होने की स्थिति में भक्त कतार में खड़े होकर आरती में मगन रहे। झांकी के ठीक सामने भक्तों ने घी व कपूर की दीपक जला कर मां की आरती उतारते रहे। किसी ने गर्भ गृह तो किसी ने झांकी से मां का दर्शन पूजन किया।
भैरव व हनुमान से लेनी पड़ती है अनुमति
विंध्याचल। आद्या शक्ति मां भुवनेश्वरी विंध्यवासिनी देवी के त्रिकोण क्षेत्र में दो शशक्त द्वारपाल भैरव व हनुमान विराजमान हैं। बिना इनकी अनुमति के कोई भी साधक विंध्य क्षेत्र में प्रवेश नही कर सकता है। भय को हरने वाले भैरव व हनुमान से चारों दिशाओं से आने वालों भक्तों को विंध्य धाम में प्रवेश के लिए अनुमति लेनी होती है। मां के दर्शन करने के बाद भी भैरव व हनुमान का दर्शन की जाती है। मान्यता है कि इनके दर्शन के बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। मां के दरबार में भी दक्षिण मुखी हनुमान व भैरव विद्यमान हैं। बटुक भैरव यहां लौकिक व पारलौकिक के रूप में विराजमान हैं।
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विंध्यधाम में मां का जयकारा लगाते भक्त दर्शन पाने को लालायित रहे। कोई मां का दर्शन करने के लिए कतार में खड़ा है तो कोई परिवार के साथ विंध्यधाम आकर अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराने में लगा रहा। मेला क्षेत्र में कई स्थानों पर भक्तों ने मां को अति प्रिय भोग हलवा व पूड़ी बना कर चढ़ाया। नवरात्र में श्रद्घालु बच्चों का मुंडन कराने के लिए परिवार समेत धाम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बगीचा व कमरों मे रह कर मां को कढ़ाई चढ़ाया। इस अवसर पर परिवार के लोग देवी गीत गाते रहे। गंगा घाटों पर श्रद्घालुओं ने मां गंगा को प्रणाम करके आस्था की डुबकी लगाई। उसके बाद नारियल, चुनरी व प्रसाद लेकर मां भगवती के दर्शन को कतार में खड़े हो गए। चारों ओर मां की जयकारे की गूंज सुनाई दे रही थी। मंदिर बंद होने की स्थिति में भक्त कतार में खड़े होकर आरती में मगन रहे। झांकी के ठीक सामने भक्तों ने घी व कपूर की दीपक जला कर मां की आरती उतारते रहे। किसी ने गर्भ गृह तो किसी ने झांकी से मां का दर्शन पूजन किया।
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भैरव व हनुमान से लेनी पड़ती है अनुमति
विंध्याचल। आद्या शक्ति मां भुवनेश्वरी विंध्यवासिनी देवी के त्रिकोण क्षेत्र में दो शशक्त द्वारपाल भैरव व हनुमान विराजमान हैं। बिना इनकी अनुमति के कोई भी साधक विंध्य क्षेत्र में प्रवेश नही कर सकता है। भय को हरने वाले भैरव व हनुमान से चारों दिशाओं से आने वालों भक्तों को विंध्य धाम में प्रवेश के लिए अनुमति लेनी होती है। मां के दर्शन करने के बाद भी भैरव व हनुमान का दर्शन की जाती है। मान्यता है कि इनके दर्शन के बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। मां के दरबार में भी दक्षिण मुखी हनुमान व भैरव विद्यमान हैं। बटुक भैरव यहां लौकिक व पारलौकिक के रूप में विराजमान हैं।
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