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तुर्की में कथक प्रस्तुत करेंगी नम्रता श्रीमाली
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Tue, 19 Apr 2016 12:24 AM IST
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तुर्की में नृत्य करेंगे कथक नृत्यांगना
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विंध्याचल की कथक नृत्यांगना नम्रता श्रीमाली 25 अप्रैल को तुर्की के अंकारा में भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेंगी। जिले की बिटिया के लिए यह पहला मौका नहीं है, जब वह विदेशी धरती पर देश की अनुपम धरोहर को बड़े मंच से प्रस्तुत करेंगी। उन्होंने अब तक साउथ अफ्रीका, रूस, सिंगापुर, थाईलैंड और चीन आदि देशों में कथक का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जनपद तथा देश को गौरवान्वित किया है।
जगत जननी मां विंध्यवासिनी के धाम क्षेत्र में पली-बढ़ी नम्रता में बचपन से ही शास्त्रीय नृत्यों के प्रति रुझान था। पिता मोहन लाल श्रीमाली व माता प्रेमशीला सहित गुरु पं. महेश्वरपति त्रिपाठी को आदर्श मानने वाली नम्रता के पुरस्कारों की फेहरिस्त काफी लंबी है। दिल्ली, मुंबई, कोलकता, शिमला, जयपुर, वाराणसी, कानपुर और बिहार में कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।
नम्रता जब आठ साल की थीं, तभी से अपने गुरु पं. महेश्वरपति त्रिपाठी व संगीता सिन्हा से कथक सीखना शुरू किया और 12 साल की अवस्था से ही मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। इसके बाद नई दिल्ली में बिरजू महाराज के बड़े बेटे जयकिशन महाराज से शिक्षा ग्रहण की।
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कथक में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल करने के साथ ही इंदिरा संगीत कला केंद्र, खैरागढ़ से मास्टर आफ डांस की डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में नई दिल्ली स्थित कथक केंद्र में मास्टर ट्रेनर के पद पर कार्यरत नम्रता ने बताया कि वह जो भी हैं, मां विंध्यवासिनी की कृपा से हैं। कथक की नई ऊंचाईयों को छूने की सपना संजोए नम्रता का कहना है कि वह इस अनुपम धरोहर को नई पीढ़ी को प्रदान करना चाहती हैं।
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जगत जननी मां विंध्यवासिनी के धाम क्षेत्र में पली-बढ़ी नम्रता में बचपन से ही शास्त्रीय नृत्यों के प्रति रुझान था। पिता मोहन लाल श्रीमाली व माता प्रेमशीला सहित गुरु पं. महेश्वरपति त्रिपाठी को आदर्श मानने वाली नम्रता के पुरस्कारों की फेहरिस्त काफी लंबी है। दिल्ली, मुंबई, कोलकता, शिमला, जयपुर, वाराणसी, कानपुर और बिहार में कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।
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नम्रता जब आठ साल की थीं, तभी से अपने गुरु पं. महेश्वरपति त्रिपाठी व संगीता सिन्हा से कथक सीखना शुरू किया और 12 साल की अवस्था से ही मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। इसके बाद नई दिल्ली में बिरजू महाराज के बड़े बेटे जयकिशन महाराज से शिक्षा ग्रहण की।
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कथक में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा की डिग्री हासिल करने के साथ ही इंदिरा संगीत कला केंद्र, खैरागढ़ से मास्टर आफ डांस की डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में नई दिल्ली स्थित कथक केंद्र में मास्टर ट्रेनर के पद पर कार्यरत नम्रता ने बताया कि वह जो भी हैं, मां विंध्यवासिनी की कृपा से हैं। कथक की नई ऊंचाईयों को छूने की सपना संजोए नम्रता का कहना है कि वह इस अनुपम धरोहर को नई पीढ़ी को प्रदान करना चाहती हैं।