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Mirzapur News: रातभर रुक-रुक हुई बूंदाबांदी, भीगने से फसल हो रही बर्बाद

Sat, 02 Dec 2023 12:53 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 12:53 AM IST
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Intermittent drizzle throughout the night, crops getting ruined due to getting wet
मिर्जापुर। बेमौसम बारिश के बीच बृहस्पतिवार को रातभर हुई बूंदाबांदी से शुक्रवार को पारा लुढ़क गया। जिससे ठंड में भले ही इजाफा रहा। लेकिन खेत और खलिहानों में काटकर पड़ी धान की देखकर किसानों को पसीना छूट रहा है। पानी से भीगे धान की फसल और प्रभावित हो रहे गेहूं की बुआई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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शुक्रवार को अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा। ग्रामीण अंचलों में इन दिनों धान की कटाई और मड़ाई का कार्य अंतिम दौर में है। पहले से काटकर खेतों में पड़ी धान की फसलें बारिश के चलते पानी से भीग गए। दूसरे दिन भी हुई बूंदाबांदी के बीच किसान फसलों को सहेजने में जुटे रहे। शेरवां, दलहनी व तिलहनी फसलों के लिए बूंदाबांदी अमृत साबित हो रही है। क्षेत्र के जिन किसानों ने हार्वेस्टर से धान की फसल कटवाया है उनकी स्थिति और नाजुक बनी हुई है। क्योंकि बरसात से खलिहान भी पूरी तरह भीग गया। आसमान में बादल छाए होने के कारण धान को सूख भी नहीं पा रहे हैं।
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सिकंदरपुर के किसान अमुल्य सिंह पटेल ने करीब 20 बीघा का धान की हार्वेस्टिंग करके खलिहान में खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है जो पानी से पूरी तरह से भीग गया गया है। चौकिया मनऊर गांव के किसान गोपाल सिंह, संतोष सिंह, शेरवां के किसान बंशीधर चतुर्वेदी की लगभग पचास बीघा घान की फसल कटाई के बाद खलिहान में पहुंचने से पहले ही पानी से भीगकर नष्ट हो रहा है। जमालपुर, बेमौसम बारिश के चलते धान की फसल नुकसानी के साथ ही रबी की बुआई प्रभावित हो रही है। गेहूं बुआई के लिए पलेवा कर हुई खेतों की सिंचाई के बाद पानी से फिर भीग गए। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा भू-भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के नोडल अधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह व तकनीकी अधिकारी (मौसम वैज्ञानिक) शिव मंगल सिंह का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव है। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा जम्मू कश्मीर, गुजरात सहित अन्य राज्यों में हुई बारिश के चलते इसका असर रहा। मौसम वैज्ञानिकों ने एक, दो दिन में मौसम साफ होने की संभावना व्यक्त किया है।
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बेमौसम बारिश से किसानों की कमर टूट रही है। काटकर खेतों में पड़ी धान की फसल पानी से भींगकर खराब हो रहे हैं, दूसरे मोल के पानी से गेहूं बोआई के लिए खेतों की सिंचाई के बाद खेत पानी से भींगकर कच्चे हो गए।
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