विंध्यवासिनी की दर पर आस्था का रेला
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मां विंध्यवासिनी धाम में भोर से दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक चलता रहा। देवी को हलवा-पूड़ी का भोग लगाया गया। क्या छोटे क्या बड़े सभी मां की भक्ति में तल्लीन दिखाई दिए। सुबह बर्फीली हवाओं की परवाह किए बगैर श्रद्धालु विंध्यधाम पहुंचे। भोर में मंगला आरती के बाद से ही दर्शन-पूजन करने के लिए आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा।
नववर्ष की पूर्व संध्या पर विंध्य धाम में मां विंध्यवासिनी का वार्षिक श्रृंगार-पूजन व भव्य देवी जागरण का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर की तरह-तरह के पुष्पों, चुनरी व बिजली झालरों से आकर्षक सजावट की गई।
तीर्थ पुरोहित राजीव पाठक उर्फ राजू ने ज्योति पूजन कर किया। उसके बाद अमित दूबे ने अपने मधुर भजन सुनाए। सबका से सुंदर मोरी मईया विंध्याचल मईया..तथा बम-बम बोल रहा है काशी.. जैसे भजनों से आस्थावानों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कुसुम पांडेय ने- मां मुरादें पूरी कर दे हलवा बाटूंगी..व जब भक्त नहीं होंगे भगवान कहां होगा..सुनाया। संचालन करते हुए स्थानीय कलाकार सोनी तिवारी ने किया। इलाहाबाद से आए कलाकाराें ने शंकर-पार्वती, राधा-कृष्ण एवं मां काली की मनोहारी झांकी को प्रस्तुत की।
आर्गन पर मुन्ना प्रेमी, ढोलक पर सतीश सिंह, बैंजाें पर बबलू मास्टर व पैड पर रवि नाहर ने संगत किया। एस पाठक, संजय दूबे, अभिषेक त्रिपाठी, गणेश उपाध्याय,, बृजेश अग्रहरि, ऋतुराज मौजूद रहे। मंदिर के बाहर कतार में खड़े श्रद्धालु जगत जननी का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़े जा रहे थे। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में स्थित मां काली, मां सरस्वती, मां दुर्गा, मां शीतला, दक्षिणमुखी हनुमान, राधा-कृष्ण, श्री पंचमुखी महादेव जी सहित बटुक भैरव में दर्शन किया। अष्टभुजा पहाड़ पर जाकर त्रिकोण परिक्रमा की। कालीखोह स्थित महाकाली मंदिर व अष्टभुजी देवी मंदिर में भीड़ लगी रही।