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प्रवेश के नाम पर मनमानी वसूली
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Sat, 02 Apr 2016 12:59 AM IST
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नगर के वासलीगंज बाजार में दूकान से कापी किताब खरीदते अभिभावक और बच्चे
- फोटो : mirzapur
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एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होने के बाद स्कूलों में प्रवेश का दौर आरंभ हो गया है। स्कूलों द्वारा प्रवेश के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जा रही है। कॉपी-किताब और यूनिफार्म के लिए प्रबंध तंत्र ने दूकानों का भी निर्धारण कर दिया है। इन्हीं दूकानों से अभिभावकों को बच्चों के लिए ऊंचे दामों पर किताबें खरीदनी पड़ रही है। वहीं अंग्रेजी माध्यम के कई स्कूलों में ही बकायदा काउंटर खोलकर बच्चों से मोटी रकम वसूलकर किताब-कापियां बेची जा रही है।
कुछ स्कूलों में हॉस्टल और डे बोर्डिंग के नाम पर अभिभावकों से वसूली की जा रही है।
नया सत्र शुरू होने के बाद स्कूलों में प्रवेश के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जा रही है। इसके लिए अभिभावकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। स्कूलों द्वारा कापी-किताब और यूनिफार्म के लिए दूकानों का निर्धारण कर दिया जाता है।
इन दूकानों के अलावा और उस स्कूल से संबंधित कॉपी-किताब और यूनिफार्म नहीं मिलते हैं। दूकानदार किताबों पर लेबल लगा कर अधिक दाम दर्ज कर अभिभावकों की जेब ढीली करते हैं। कुछ स्कूलों में तो प्रबंध तंत्र द्वारा बाकायदा काउंटर खोल दिया जाता है, जहां से अभिभावकों को कॉपी-किताब और यूनिफार्म खरीदना पड़ता है।
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जिले में कई स्कूलों की ओर से हॉस्टल और डे बोर्डिग चलाया जा रहा है। इसके नाम पर भी अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जा रही है, जबकि इनमें सुविधाए नदारद हैं।
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कुछ स्कूलों में हॉस्टल और डे बोर्डिंग के नाम पर अभिभावकों से वसूली की जा रही है।
नया सत्र शुरू होने के बाद स्कूलों में प्रवेश के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जा रही है। इसके लिए अभिभावकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। स्कूलों द्वारा कापी-किताब और यूनिफार्म के लिए दूकानों का निर्धारण कर दिया जाता है।
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इन दूकानों के अलावा और उस स्कूल से संबंधित कॉपी-किताब और यूनिफार्म नहीं मिलते हैं। दूकानदार किताबों पर लेबल लगा कर अधिक दाम दर्ज कर अभिभावकों की जेब ढीली करते हैं। कुछ स्कूलों में तो प्रबंध तंत्र द्वारा बाकायदा काउंटर खोल दिया जाता है, जहां से अभिभावकों को कॉपी-किताब और यूनिफार्म खरीदना पड़ता है।
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जिले में कई स्कूलों की ओर से हॉस्टल और डे बोर्डिग चलाया जा रहा है। इसके नाम पर भी अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जा रही है, जबकि इनमें सुविधाए नदारद हैं।