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Mirzapur News: पर्चा और दवा के लिए लगाने पड़ रहे दो अस्पतालों के चक्कर
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मिर्जापुर। सिविल लाइन में नवनिर्मित नेत्र चिकित्सालय में शुक्रवार को अव्यवस्था के बीच चेत्र विभाग की ओपीडी शुरु कर दी गई। अस्पताल का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है और कार्यदायी संस्था ने हैंडओवर किया है। जगह-जगह गंदगी फैली है और पानी तक की व्यवस्था नहीं। वहीं, पर्चा कटाने और दवा लेने के लिए मरीजों दो अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
सिविल लाइन में बन रहा नेत्र चिकित्सालय मेडिकल काॅलेज के अधीन संचालित करने के लिए मंडलीय अस्पताल के चार विभागों नेत्र, ईएनटी, चर्म और मानसिक रोग विभाग को स्थानांतरित किया गया है। कार्यदायी संस्था ने भवन को अभी तक हैंडओवर नहीं किया है। अस्पताल जाने का मार्ग नहीं बना है। मंडलीय अस्पताल से समान पूरा नहीं पहुंचा। अस्पताल के चारों तल पर गंदगी ही गंदगी है। इसके बावजूद शुक्रवार को द्वितीय तल पर कमरा नंबर 207 में नेत्र विभाग की ओपीडी शुरु कर दी गई है। पहले दिन डाॅ. नंदलाल, डाॅ. अरविंद सिन्हा, डाॅ. तन्मय श्रीवास्तव, डाॅ. साक्षी सिंह, डाॅ. खुशबू शिखांगी, डाॅ. आलोक यादव ने ओपीडी में मरीज देखे। बिजली न होने पर पंखा बंद हो जा रहा था। डाॅक्टर और मरीज गर्मी में बैठे रहे।
बड़ी बात ये है अभी अस्पताल में न तो पर्चा काउंटर बना है न दवा वितरण केंद्र बना है। इसके बाद भी ओपीडी शुरु कर दी गई है। मंडलीय अस्पताल से पर्चा कटाने के बाद आधा किमी दूर सिविल लाइन नेत्र चिकित्सालय में आकर डाक्टर को दिखा रहा है। इसके बाद दवा लेने के लिए दोबारा मंडलीय अस्पताल जाना पड़ रहा है। दोपहर साढ़े 12 बजे तक 62 मरीज आए। जिनको दो चक्कर लगाना पड़ा। बिना व्यवस्था के आखिर अस्पताल शुरु करने की क्या जल्दी है समझ नहीं आ रहा। 30 अप्रैल तक जिलाधिकारी द्वारा पूजन किया जाना है। देखना होगा तब तक अस्पताल में सारी सुविधा शुरु हो जाती है या नहीं।
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वर्जन
अस्पताल का भवन जल्द हैंडओवर होगा। वहां अभी नेत्र विभाग की ओपीडी शुरू की गई है। पर्चा काउंटर और दवा काउंटर बनाने का काम चल रहा है। दूसरे विभागों की ओपीडी 30 अप्रैल तक शुरू होगी। अभी एक कर्मचारी हाथ से पर्चा बना रहा है। - डॉ. एसके श्रीवास्तव, सीएमएस, मंडलीय अस्पताल
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सिविल लाइन में बन रहा नेत्र चिकित्सालय मेडिकल काॅलेज के अधीन संचालित करने के लिए मंडलीय अस्पताल के चार विभागों नेत्र, ईएनटी, चर्म और मानसिक रोग विभाग को स्थानांतरित किया गया है। कार्यदायी संस्था ने भवन को अभी तक हैंडओवर नहीं किया है। अस्पताल जाने का मार्ग नहीं बना है। मंडलीय अस्पताल से समान पूरा नहीं पहुंचा। अस्पताल के चारों तल पर गंदगी ही गंदगी है। इसके बावजूद शुक्रवार को द्वितीय तल पर कमरा नंबर 207 में नेत्र विभाग की ओपीडी शुरु कर दी गई है। पहले दिन डाॅ. नंदलाल, डाॅ. अरविंद सिन्हा, डाॅ. तन्मय श्रीवास्तव, डाॅ. साक्षी सिंह, डाॅ. खुशबू शिखांगी, डाॅ. आलोक यादव ने ओपीडी में मरीज देखे। बिजली न होने पर पंखा बंद हो जा रहा था। डाॅक्टर और मरीज गर्मी में बैठे रहे।
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बड़ी बात ये है अभी अस्पताल में न तो पर्चा काउंटर बना है न दवा वितरण केंद्र बना है। इसके बाद भी ओपीडी शुरु कर दी गई है। मंडलीय अस्पताल से पर्चा कटाने के बाद आधा किमी दूर सिविल लाइन नेत्र चिकित्सालय में आकर डाक्टर को दिखा रहा है। इसके बाद दवा लेने के लिए दोबारा मंडलीय अस्पताल जाना पड़ रहा है। दोपहर साढ़े 12 बजे तक 62 मरीज आए। जिनको दो चक्कर लगाना पड़ा। बिना व्यवस्था के आखिर अस्पताल शुरु करने की क्या जल्दी है समझ नहीं आ रहा। 30 अप्रैल तक जिलाधिकारी द्वारा पूजन किया जाना है। देखना होगा तब तक अस्पताल में सारी सुविधा शुरु हो जाती है या नहीं।
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अस्पताल का भवन जल्द हैंडओवर होगा। वहां अभी नेत्र विभाग की ओपीडी शुरू की गई है। पर्चा काउंटर और दवा काउंटर बनाने का काम चल रहा है। दूसरे विभागों की ओपीडी 30 अप्रैल तक शुरू होगी। अभी एक कर्मचारी हाथ से पर्चा बना रहा है। - डॉ. एसके श्रीवास्तव, सीएमएस, मंडलीय अस्पताल