{"_id":"572116704f1c1b522ba91974","slug":"i-can-not-x-ray-ultrasound","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं हो रहा एक्स रे, अल्ट्रासाउंड ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं हो रहा एक्स रे, अल्ट्रासाउंड
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर।
Updated Thu, 28 Apr 2016 01:13 AM IST
विज्ञापन
जिला अस्पताल परिसर में बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड कक्ष।
- फोटो : mirzapur
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिला चिकित्सालय की चिकित्सीय व्यवस्था इस समय चरमरा गई है। मरीजों का न अल्ट्रासाउंड हो पा रहा है ना ही एक्स-रे। वार्ड में पट्टियां समाप्त होने के कारण मरीजों का ड्रेसिंग नहीं हो पा रही है। इससे मरीजों को बाहर से पटिटयां लाकर अपना ड्रेसिंग कराना पड़ रहा है। बुधवार को पट्टी नहीं मिलने पर मरीजों ने हंगामा किया।
बता दें कि शासन की मंशा के अनुरूप इस समय स्वास्थ्य अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं। इससे लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें निजी चिकित्सालयों का सहारा लेना पड़ रहा है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें आर्थिक क्षति का सामना पड़ रहा है।
जिला चिकित्सालय की तो इस समय स्थिति सबसे स्थिति खराब है। पट्टी समाप्त होने से वार्ड में भर्ती मरीजों का ड्रेसिंग नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
मरीज के परिजन बाहर से पट्टी लाकर कर्मचारियों को दे रहे हैं तब उनकी ड्रेसिंग हो रही है। इतना ही नहीं पिछले दो दिनों से अल्ट्रासाउंड्र डिजिटल और नार्मल एक्स-रे बंद है। इसके अलावा टिटनेस की सूई भी इमरजेंसी में नहीं है। वार्ड की एसी और कुछ कूलर भी खराब पड़े हैं।
सूत्रों की माने तो सारा खेल कमीशन का है। इससे लोग बाहर से सामान खरीद कर ले आएं तो अधिकारियों का कमीशन बनेगा। सूत्रों की माने तो नार्मल एक्सरे का प्लेट डिजिटल एक्स-रे से काफी सस्ता मिलता है। नार्मल एक्स-रे का प्लेट लगभग 70 रुपये में आता है जबकि डिजिटल का 45 रुपये में आता है। फिर भी अधिकारी नार्मल का खरीद कर इस्तेमाल करा रहे हैं। इससे समझा जा सकता है कि कहा खेल हो रहा है।
विज्ञापन
बता दें कि शासन की मंशा के अनुरूप इस समय स्वास्थ्य अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं। इससे लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। मजबूरन उन्हें निजी चिकित्सालयों का सहारा लेना पड़ रहा है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें आर्थिक क्षति का सामना पड़ रहा है।
विज्ञापन
जिला चिकित्सालय की तो इस समय स्थिति सबसे स्थिति खराब है। पट्टी समाप्त होने से वार्ड में भर्ती मरीजों का ड्रेसिंग नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
मरीज के परिजन बाहर से पट्टी लाकर कर्मचारियों को दे रहे हैं तब उनकी ड्रेसिंग हो रही है। इतना ही नहीं पिछले दो दिनों से अल्ट्रासाउंड्र डिजिटल और नार्मल एक्स-रे बंद है। इसके अलावा टिटनेस की सूई भी इमरजेंसी में नहीं है। वार्ड की एसी और कुछ कूलर भी खराब पड़े हैं।
सूत्रों की माने तो सारा खेल कमीशन का है। इससे लोग बाहर से सामान खरीद कर ले आएं तो अधिकारियों का कमीशन बनेगा। सूत्रों की माने तो नार्मल एक्सरे का प्लेट डिजिटल एक्स-रे से काफी सस्ता मिलता है। नार्मल एक्स-रे का प्लेट लगभग 70 रुपये में आता है जबकि डिजिटल का 45 रुपये में आता है। फिर भी अधिकारी नार्मल का खरीद कर इस्तेमाल करा रहे हैं। इससे समझा जा सकता है कि कहा खेल हो रहा है।