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त्रिकोण मार्ग में गड्ढे, चलें कैसे श्रद्धालु
ब्यूरो, अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Wed, 03 Aug 2016 12:18 AM IST
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रैन बसेरा का हाल
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शक्ति क्षेत्र अष्टभुजा पहाड़ पर दर्शन करने हजारों श्रद्धालु रोज आते हैं लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने उनकी राह कठिन कर दी है। पहाड़ पर स्थित त्रिकोण मार्ग के गड्ढायुक्त होने से जहां त्रिकोण परिक्रमा करने वाले भक्तों को ऊबड़ - खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। पहाड़ पर प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे असुरक्षा का भाव बना रहता है।
अष्टभुजा पहाड़ पर स्थित मंदिर के समीप रैन बसेरा में न तो प्रकाश की व्यवस्था है और न ही पेयजल व साफ-सफाई की। रैनबसेरा की छत टपक रही है, जिससे यात्रियों को भीगना पड़ता है। अष्टभुजा पहाड़ पर मात्र दो हैंडपंप लगे हैं। यहां आने वाले हजारों यात्रियों की जरूरत के लिहाज से ये नाकाफी है। अष्टभुजा मंदिर सीढ़ी से लेकर मुख्य मार्ग तक सड़क क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे भक्तों को आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर की तरफ जाने वाली सीढ़ी पर लगी रेलिंग जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे सुरक्षा को खतरा है।
मंदिर के नीचे लगे मात्र एक ट्यूबवेल के सहारे जलापूर्ति कराई जाती है। मंदिर के समीप के वाहन स्टैंड पर भी दर्शनार्थियों से मनमानी वसूली की जाती है क्योंकि कोई रेट तय नहीं है। इससे आए दिन किचकिच भी होती है।
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पहाड़ पर गेरुआ तालाब से अष्टभुजा मंदिर और डाक बंगला से गेरुआ तालाब तक, सीता कुंड से मोतिया तालाब तक, कालीखोह मंदिर की तरफ जाने वाले मोड़ से कालीखोह मंदिर तक तथा कालीखोह मंदिर के पीछे से सीढ़ी पर प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने से भक्तों को परेशानी होती है। पहाड़ पर सुरक्षा के लिए पुलिस र्की तैनाती नहीं होने से दूरदराज से आने वाले भक्तों को असुविधा का सामना करना पड़ता है, बावजूद इसके भक्तों के हित के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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अष्टभुजा पहाड़ पर स्थित मंदिर के समीप रैन बसेरा में न तो प्रकाश की व्यवस्था है और न ही पेयजल व साफ-सफाई की। रैनबसेरा की छत टपक रही है, जिससे यात्रियों को भीगना पड़ता है। अष्टभुजा पहाड़ पर मात्र दो हैंडपंप लगे हैं। यहां आने वाले हजारों यात्रियों की जरूरत के लिहाज से ये नाकाफी है। अष्टभुजा मंदिर सीढ़ी से लेकर मुख्य मार्ग तक सड़क क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे भक्तों को आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर की तरफ जाने वाली सीढ़ी पर लगी रेलिंग जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे सुरक्षा को खतरा है।
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मंदिर के नीचे लगे मात्र एक ट्यूबवेल के सहारे जलापूर्ति कराई जाती है। मंदिर के समीप के वाहन स्टैंड पर भी दर्शनार्थियों से मनमानी वसूली की जाती है क्योंकि कोई रेट तय नहीं है। इससे आए दिन किचकिच भी होती है।
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पहाड़ पर गेरुआ तालाब से अष्टभुजा मंदिर और डाक बंगला से गेरुआ तालाब तक, सीता कुंड से मोतिया तालाब तक, कालीखोह मंदिर की तरफ जाने वाले मोड़ से कालीखोह मंदिर तक तथा कालीखोह मंदिर के पीछे से सीढ़ी पर प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने से भक्तों को परेशानी होती है। पहाड़ पर सुरक्षा के लिए पुलिस र्की तैनाती नहीं होने से दूरदराज से आने वाले भक्तों को असुविधा का सामना करना पड़ता है, बावजूद इसके भक्तों के हित के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।