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सोने-चांदी की महंगाई : सास के पुराने गहनों के नाम भी भूल गईं आज की बहुएं
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सोने-चांदी का भाव बढ़ने से महिलाएं कम ही गहने खरीद रही हैं। 60 वर्ष पहले महिलाओं के शृंगार में 101 गहने होते थे। शादी में वर पक्ष की ओर से वधु पक्ष को इन 101 गहनों का चढ़ावा दिया जाता था। अब पुराने गहने दिखना तो दूर की बात है, उनके नाम भी नई दुल्हनों को याद नहीं हैं।
दो दशक पहले सबसे चर्चित गहने सीतारामी, हथफूल और रानी हार को आज की महिलाएं जानती भी नहीं हैं। ज्वेलर्स सुधांशु सोनी ने कहा कि अगर सोना 50 हजार व चांदी 70 हजार रुपये के भाव पर लौट भी आए तो भी पुराने गहने बनाना मुश्किल है। इन बेशकीमती आभूषणों को संजोकर कुछ ही परिवार रखे हैं। आज की दुल्हनें अपने सास के पुराने गहनों के नाम भी नहीं जानती हैं। सोने-चांदी महंगा होने से दुल्हन के शृंगार में पांच-सात गहने ही दिखाई देते हैं।
इसमें अंगूठी, हार, कुंडल, अंगूठी, कड़े व लौंग आदि शामिल हैं। अब धनाढ्य परिवार की महिलाएं भी आर्टिफिशियल ज्वेलरी से काम चला रही हैं। दुकानदार संजय कुमार सेठ बताते हैं कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को कीमती गहने उपहार स्वरूप देने का चलन है। पहले दुल्हन के चढ़ावे में कम से कम 101 गहने होते थे।
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करीब 60 वर्ष में सोना 200 रुपये 12 ग्राम तोले से 1.24 लाख रुपये दस ग्राम तोले तक का सफर तय कर लिया है। चांदी भी 250 रुपये किलो से बढ़कर करीब 1.54 लाख रुपये पर पहुंच गई है। संवाद
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दो दशक पहले सबसे चर्चित गहने सीतारामी, हथफूल और रानी हार को आज की महिलाएं जानती भी नहीं हैं। ज्वेलर्स सुधांशु सोनी ने कहा कि अगर सोना 50 हजार व चांदी 70 हजार रुपये के भाव पर लौट भी आए तो भी पुराने गहने बनाना मुश्किल है। इन बेशकीमती आभूषणों को संजोकर कुछ ही परिवार रखे हैं। आज की दुल्हनें अपने सास के पुराने गहनों के नाम भी नहीं जानती हैं। सोने-चांदी महंगा होने से दुल्हन के शृंगार में पांच-सात गहने ही दिखाई देते हैं।
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इसमें अंगूठी, हार, कुंडल, अंगूठी, कड़े व लौंग आदि शामिल हैं। अब धनाढ्य परिवार की महिलाएं भी आर्टिफिशियल ज्वेलरी से काम चला रही हैं। दुकानदार संजय कुमार सेठ बताते हैं कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को कीमती गहने उपहार स्वरूप देने का चलन है। पहले दुल्हन के चढ़ावे में कम से कम 101 गहने होते थे।
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करीब 60 वर्ष में सोना 200 रुपये 12 ग्राम तोले से 1.24 लाख रुपये दस ग्राम तोले तक का सफर तय कर लिया है। चांदी भी 250 रुपये किलो से बढ़कर करीब 1.54 लाख रुपये पर पहुंच गई है। संवाद