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परमात्मा की लीला सभी सीमाओं से परे : निर्मल कुमार
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परमात्मा की लीला तर्क और बुद्धि से समझ में नहीं आती। मनुष्य की बुद्धि की एक सीमा है, किंतु परमात्मा समस्त सीमाओं से परे हैं। लालडिग्गी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा मंगलवार को ये बातें व्यास पं. निर्मल कुमार शुक्ल ने कहीं।
व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मोहक वर्णन किया। उन्होंने माखन चोरी, गो चारण, ब्रह्मा जी का मोह, चीर हरण और गोवर्धन पूजन समेत अन्य प्रसंग सुनाए। व्यास ने कहा कि एक दिन भगवान श्री कृष्ण ने ग्वालों से नाना प्रकार के खाद्य पदार्थ मंगाकर वन में सामूहिक भोज का आयोजन किया। सभी ग्वालों ने एक जगह एकत्र होकर भोजन प्रारंभ किया। एक-दूसरे के मुंह में निवाला डालने लगे। इसी बीच ब्रह्मा जी भगवान कृष्ण की लीला देखने आए थे। एक-दूसरे का जूठन खाते देख ब्रह्मा ने सोचा यह कैसा ब्रह्म है। उन्होंने भगवान की परीक्षा लेने के लिए सारे ग्वालों बछड़ों और गायों को चुराकर कंदरा में बंद कर दिया। ब्रह्मा जी की यह शरारत देखकर श्रीकृष्ण ने अपनी कल्पना से वैसी ही गायें, बछड़े और ग्वाले बना दिए। साल भर बाद ब्रह्मा ने आकर देखा तो जो गायें, बछड़े और ग्वाले कंदरा में बंद हैं, वही भगवान के पीछे-पीछे जा रहे हैं। यह अद्भुत दृश्य देखकर कर ब्रह्मा को अपनी बुद्धि पर पछतावा हुआ और भगवान के शरण में जाकर उन्होंने छमा मांगी।
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कान्हा ने बचपन में ही कर दिया कंस के दैत्यों का वध
नरायनपुर। छोटा मिर्ज़ापुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में व्यास डॉ. पुंडरीक शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण ने बचपन में कंस के सात महादैत्यों का वध कर दिया था। उन सभी दैत्यों को कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए भेजा था। व्यास ने कहा पूतना ने सुंदर महिला का रूप धारण कर श्रीकृष्ण को विष पिलाने की कोशिश की, जिसका उन्होंने वध कर दिया। त्रिणावर्त एक पवन राक्षस था, जिसने तूफान उत्पन्न कर कान्हा को उड़ाने की कोशिश की लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे भी मार दिया। इस अवसर पर दंडी स्वामी नारायण, गीता सिंह, जयदीप सिंह, मनदीप सिंह, ओंकारेश्वर उपाध्याय, कैलाश, सुनील तिवारी आदि मौजूद रहे। संवाद
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व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मोहक वर्णन किया। उन्होंने माखन चोरी, गो चारण, ब्रह्मा जी का मोह, चीर हरण और गोवर्धन पूजन समेत अन्य प्रसंग सुनाए। व्यास ने कहा कि एक दिन भगवान श्री कृष्ण ने ग्वालों से नाना प्रकार के खाद्य पदार्थ मंगाकर वन में सामूहिक भोज का आयोजन किया। सभी ग्वालों ने एक जगह एकत्र होकर भोजन प्रारंभ किया। एक-दूसरे के मुंह में निवाला डालने लगे। इसी बीच ब्रह्मा जी भगवान कृष्ण की लीला देखने आए थे। एक-दूसरे का जूठन खाते देख ब्रह्मा ने सोचा यह कैसा ब्रह्म है। उन्होंने भगवान की परीक्षा लेने के लिए सारे ग्वालों बछड़ों और गायों को चुराकर कंदरा में बंद कर दिया। ब्रह्मा जी की यह शरारत देखकर श्रीकृष्ण ने अपनी कल्पना से वैसी ही गायें, बछड़े और ग्वाले बना दिए। साल भर बाद ब्रह्मा ने आकर देखा तो जो गायें, बछड़े और ग्वाले कंदरा में बंद हैं, वही भगवान के पीछे-पीछे जा रहे हैं। यह अद्भुत दृश्य देखकर कर ब्रह्मा को अपनी बुद्धि पर पछतावा हुआ और भगवान के शरण में जाकर उन्होंने छमा मांगी।
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कान्हा ने बचपन में ही कर दिया कंस के दैत्यों का वध
नरायनपुर। छोटा मिर्ज़ापुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में व्यास डॉ. पुंडरीक शास्त्री महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण ने बचपन में कंस के सात महादैत्यों का वध कर दिया था। उन सभी दैत्यों को कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए भेजा था। व्यास ने कहा पूतना ने सुंदर महिला का रूप धारण कर श्रीकृष्ण को विष पिलाने की कोशिश की, जिसका उन्होंने वध कर दिया। त्रिणावर्त एक पवन राक्षस था, जिसने तूफान उत्पन्न कर कान्हा को उड़ाने की कोशिश की लेकिन श्रीकृष्ण ने उसे भी मार दिया। इस अवसर पर दंडी स्वामी नारायण, गीता सिंह, जयदीप सिंह, मनदीप सिंह, ओंकारेश्वर उपाध्याय, कैलाश, सुनील तिवारी आदि मौजूद रहे। संवाद