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शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना कोरोना संक्रमित
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शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना कोरोना संक्रमित
पंचायत चुनाव के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे संक्रमित
संक्रमित मिलने के बाद गांव में 577 हाट स्पाट तो शहर में 140 ही
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। जिले के ग्रामीण क्षेेत्रों में कोरोना संक्रमण अधिक फैला है। जिले में बनाए जा रहे हाट स्पाट से ही इसका अंजादा लगाया जा सकता है। जिले में इस समय 717 हाट स्पाट है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 577 और शहरी क्षेत्र में 140 हाट स्पाट हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण फैलने का कारण पंचायत चुनाव को माना जा रहा है। पंचायत चुनाव बाद शहर में हाट स्पाट की संख्या घटी है तो ग्रामीण क्षेत्र में संख्या बढ़ी है।
एक अप्रैल को जिले में 18 हाट स्पाट थे। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 14 और शहरी क्षेत्र में मात्र चार हाट स्पाट था। माना जा रहा था कि चुनाव और बड़े शहरों से पलायन कर लोग अपने गांव पहुंचे। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्र में संक्रमण फैला। 10 अप्रैल शहर में भी संक्रमण की चपेट में आ गया। 10 अप्रैल को हाट स्पाट गांव से अधिक शहर में हो गया। जिले में 26 अप्रैल को पंचायत चुनाव था। 25 अप्रैल तक ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण में वृद्धि हुई। इसका कारण पंचायत चुनाव को माना जा रहा है। कुल 829 हाट स्पाट में ग्रामीण क्षेत्र में 598 तो शहर में 231 हाट स्पाट था। इसके बाद से शहरी क्षेत्र के हाट स्पाट में लगातार कमी हो रही है, पर ग्रामीण क्षेत्र में वृद्धि जारी रही। दो मई को मतगणना के बाद तो ग्रामीण क्षेत्र के हाट स्पाटों में अब तक की रिकार्ड वृद्धि होकर 637 जबकि शहर में कमी हो 181 हो गई। शुक्रवार सात मई को जिले में 717 हाट स्पाट में 577 ग्रामीण और 140 शहरी क्षेत्र में है। इस लिहाज से शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना संक्रमित मिल रहे हैं।
क्या है हाट स्पाट या कंटोनमेंट जोन
जिले में संक्रमित मिलने के बाद उस स्थान को हाट स्पाट या कंटोनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता है। पहले हाट स्पाट एरिया में दुकानें और घर बंद रहते थे। किसी के आने जाने की अनुमति नहीं थी। अब इसमें काफी ढील है। कहे तो सिर्फ कागजों पर ही हाट स्पाट बन रहा है।
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फिर दोहराई गई पुरानी गलती, नहीं किया प्रवासी को क्वारंटीन
मिर्जापुर। पिछली बार कोरोना संक्रमण फैला था तो बाहर से आने वाले लोगों को क्वारंटीन न करने के चलते संक्रमण बढ़ा था। इस बार सब कुछ पता होने के बाद भी वही हाल रहा। मुंबई, दिल्ली, गुजरात आदि प्रदेशों मेें संक्रमण बढ़ने पर बाहर से आने वाले लोग लौटे तो उनको क्वारंटीन नहीं किया गया। नाम मात्र के लिए रेलवे स्टेशन पर एक-दो ट्रेनों से आने वाले यात्रियों की कोरोना जांच की जा रही थी। जिला प्रशासन ने कागजों पर तो कई स्कूलों को क्वारंटीन बनाने का दावा किया, पर बाहर से आने वाले किसी को क्वारंटीन नहीं किया गया।
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संक्रमितों के मिलने के बाद ये है हाट स्पाट
दिन ग्रामीण शहर कुल
01 अप्रैल 14 04 18
05 अप्रैल 25 19 44
10 अप्रैल 77 112 189
15 अप्रैल 224 139 383
20 अप्रैल 412 208 620
25 अप्रैल 598 231 829
30 अप्रैल 599 211 829
01 मई 594 195 789
02 मई 625 187 812
03 मई 637 181 818
04 मई 616 168 784
05 मई 595 159 754
06 मई 595 159 754
07 मई 577 140 717
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सीएचसी-पीएचसी पर हो रही जांच
मिर्जापुर। जिले के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के सीएचसी-पीएचसी पर कोविड जांच की जा रही है। चुनाव के समय लोगों की ड्यूटी लगने और स्वास्थ्य कर्मियों के संक्रमित होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र में जांच की व्यवस्था गड़बड़ाई थी, पर अब ग्रामीण क्षेत्र के सीएसचसी-पीएचसी पर जांच हो रहा है। चुनार, कोविड सुपरवाइजर सर्वेस सिंह ने बताया कि नियमित 75 एंटीजन व 50 आरटीपीसीआर जांच की किया जा रहा है। हलिया, तीन महीने के अंतराल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 112 पॉजिटिव मरीज पाए गए। जिसमें 62 होम आइसोलेशन के लिए भेज दिया गया है। कछवां, स्वास्थ्य केन्द्र में रोजाना करीब 115 कोविड जांच किया जा रहा है। एक सप्ताह में 50 से अधिक संक्रमित मिले है। जिगना, विजयपुर सर्रोई डा. वी के भारती ने बताया कि लगभग 100 लोगों की प्रतिदिन जांच हो रही है। 15 से 20 संक्रमित मिल रहे हैं।
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गांवों में नाम के हाट-स्पाट, नहीं हो रहा सैनिटाइजेशन
प्रधान के कार्यभार ग्रहण न करने कारण अधिकारी कर रहे हीलाहवाली
मिर्जापुर। जिस स्थान पर संक्रमित मिल रहे है, उसे हाट स्पाट घोषित कर वहां पर सैनिटाइजेशन और कांट्रेक्ट ट्रेसिंग के जरिए जांच होना है। शहरी क्षेत्र में तो कुछ इलाकों में सैनिटाइजेशन किया गया, पर ग्रामीण क्षेत्र में तो सैनिटाइजेशन कहीं नहीं किया जा रहा है। जबकि हर ग्राम सभा में सैनिटाइजेशन के लिए पिछले बार ही मशीन दिलाया गया था। प्रधान का चुनाव होने के कारण प्रशासक नियुक्त है। अधिकारी टाल मटौल अपनाए है। सीखड़,कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ी है, पर सीखड़ विकासखंड में किसी भी ग्राम सभा में सैनिटाइजेशन नहीं किया गया है, ना ही सफाई कर्मचारी किसी गांव में दिखाई दे रहे हैं।
कोविड जैसे लक्षण से हुई मौत, नहीं हुई कोई जांच
मिर्जापुर। कोरोना संक्रमितों की कोविड अस्पताल में मौत हो रही है, पर मंडलीय अस्ताल और अन्य स्थानों पर सांस लेने में परेशानी और आक्सीजन की कमी से हो रही मौतों ने लोगों को परेशान कर दिया है। ये सब लक्षण भी कोविड के है। क्षेत्र के गांव में लगातार ऐसी मौतें हो रही हैं, पर गांव में न तो कोई जांच न ही सैनटिाइजेशन हो रहा है। लालगंज, क्षेत्र के मरीजों की जांच में कोविड भी नहीं पाया गया है। इसके बाद भी उनकी कोविड जैसे लक्षण से मौत हुई।
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ग्रामीण क्षेत्र में नहीं बन सका कोविड अस्पताल
चुनार/मड़िहान। ग्रामीण क्षेत्र में कोविड मरीजों के उपचार करने के लिए मड़िहान और चुनार के 30 बेड की सीएचसी को बढ़ाकर 50 बेड का कोविड अस्पताल बनाया जाना है, पर अब तक कोविड अस्पताल नहीं बन सका है। कोविड मरीजों के लिए चेचरी मोड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोविड अस्पताल बनना था, लेकिन अब तक नहीं बन सका है। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अजय सिंह ने बताया कि केन्द्र अधीक्षक को शीघ्र अस्पताल संचालित करने के लिए आवश्यक सामानों की पूर्ति के लिए सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
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वर्जन
कोविड संक्रमित मिलने पर हाट स्पाट घोषित करके संक्रमित के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच की जा रही है। सैनिटाइजेशन शहर क्षेत्र में नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत विभाग का है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए सीएसचसी-पीएचसी पर जांच की सुविधा है। ग्रामीण क्षेत्र में मड़िहान और चुनार सीएसचसी को कोविड अस्पताल बनाया जा रहा है।
- डा. पीडी गुप्ता, सीएमओ
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पंचायत चुनाव के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे संक्रमित
संक्रमित मिलने के बाद गांव में 577 हाट स्पाट तो शहर में 140 ही
संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। जिले के ग्रामीण क्षेेत्रों में कोरोना संक्रमण अधिक फैला है। जिले में बनाए जा रहे हाट स्पाट से ही इसका अंजादा लगाया जा सकता है। जिले में इस समय 717 हाट स्पाट है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 577 और शहरी क्षेत्र में 140 हाट स्पाट हैं। ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण फैलने का कारण पंचायत चुनाव को माना जा रहा है। पंचायत चुनाव बाद शहर में हाट स्पाट की संख्या घटी है तो ग्रामीण क्षेत्र में संख्या बढ़ी है।
एक अप्रैल को जिले में 18 हाट स्पाट थे। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 14 और शहरी क्षेत्र में मात्र चार हाट स्पाट था। माना जा रहा था कि चुनाव और बड़े शहरों से पलायन कर लोग अपने गांव पहुंचे। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्र में संक्रमण फैला। 10 अप्रैल शहर में भी संक्रमण की चपेट में आ गया। 10 अप्रैल को हाट स्पाट गांव से अधिक शहर में हो गया। जिले में 26 अप्रैल को पंचायत चुनाव था। 25 अप्रैल तक ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना संक्रमण में वृद्धि हुई। इसका कारण पंचायत चुनाव को माना जा रहा है। कुल 829 हाट स्पाट में ग्रामीण क्षेत्र में 598 तो शहर में 231 हाट स्पाट था। इसके बाद से शहरी क्षेत्र के हाट स्पाट में लगातार कमी हो रही है, पर ग्रामीण क्षेत्र में वृद्धि जारी रही। दो मई को मतगणना के बाद तो ग्रामीण क्षेत्र के हाट स्पाटों में अब तक की रिकार्ड वृद्धि होकर 637 जबकि शहर में कमी हो 181 हो गई। शुक्रवार सात मई को जिले में 717 हाट स्पाट में 577 ग्रामीण और 140 शहरी क्षेत्र में है। इस लिहाज से शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना संक्रमित मिल रहे हैं।
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क्या है हाट स्पाट या कंटोनमेंट जोन
जिले में संक्रमित मिलने के बाद उस स्थान को हाट स्पाट या कंटोनमेंट जोन घोषित कर दिया जाता है। पहले हाट स्पाट एरिया में दुकानें और घर बंद रहते थे। किसी के आने जाने की अनुमति नहीं थी। अब इसमें काफी ढील है। कहे तो सिर्फ कागजों पर ही हाट स्पाट बन रहा है।
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फिर दोहराई गई पुरानी गलती, नहीं किया प्रवासी को क्वारंटीन
मिर्जापुर। पिछली बार कोरोना संक्रमण फैला था तो बाहर से आने वाले लोगों को क्वारंटीन न करने के चलते संक्रमण बढ़ा था। इस बार सब कुछ पता होने के बाद भी वही हाल रहा। मुंबई, दिल्ली, गुजरात आदि प्रदेशों मेें संक्रमण बढ़ने पर बाहर से आने वाले लोग लौटे तो उनको क्वारंटीन नहीं किया गया। नाम मात्र के लिए रेलवे स्टेशन पर एक-दो ट्रेनों से आने वाले यात्रियों की कोरोना जांच की जा रही थी। जिला प्रशासन ने कागजों पर तो कई स्कूलों को क्वारंटीन बनाने का दावा किया, पर बाहर से आने वाले किसी को क्वारंटीन नहीं किया गया।
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संक्रमितों के मिलने के बाद ये है हाट स्पाट
दिन ग्रामीण शहर कुल
01 अप्रैल 14 04 18
05 अप्रैल 25 19 44
10 अप्रैल 77 112 189
15 अप्रैल 224 139 383
20 अप्रैल 412 208 620
25 अप्रैल 598 231 829
30 अप्रैल 599 211 829
01 मई 594 195 789
02 मई 625 187 812
03 मई 637 181 818
04 मई 616 168 784
05 मई 595 159 754
06 मई 595 159 754
07 मई 577 140 717
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सीएचसी-पीएचसी पर हो रही जांच
मिर्जापुर। जिले के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के सीएचसी-पीएचसी पर कोविड जांच की जा रही है। चुनाव के समय लोगों की ड्यूटी लगने और स्वास्थ्य कर्मियों के संक्रमित होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र में जांच की व्यवस्था गड़बड़ाई थी, पर अब ग्रामीण क्षेत्र के सीएसचसी-पीएचसी पर जांच हो रहा है। चुनार, कोविड सुपरवाइजर सर्वेस सिंह ने बताया कि नियमित 75 एंटीजन व 50 आरटीपीसीआर जांच की किया जा रहा है। हलिया, तीन महीने के अंतराल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 112 पॉजिटिव मरीज पाए गए। जिसमें 62 होम आइसोलेशन के लिए भेज दिया गया है। कछवां, स्वास्थ्य केन्द्र में रोजाना करीब 115 कोविड जांच किया जा रहा है। एक सप्ताह में 50 से अधिक संक्रमित मिले है। जिगना, विजयपुर सर्रोई डा. वी के भारती ने बताया कि लगभग 100 लोगों की प्रतिदिन जांच हो रही है। 15 से 20 संक्रमित मिल रहे हैं।
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गांवों में नाम के हाट-स्पाट, नहीं हो रहा सैनिटाइजेशन
प्रधान के कार्यभार ग्रहण न करने कारण अधिकारी कर रहे हीलाहवाली
मिर्जापुर। जिस स्थान पर संक्रमित मिल रहे है, उसे हाट स्पाट घोषित कर वहां पर सैनिटाइजेशन और कांट्रेक्ट ट्रेसिंग के जरिए जांच होना है। शहरी क्षेत्र में तो कुछ इलाकों में सैनिटाइजेशन किया गया, पर ग्रामीण क्षेत्र में तो सैनिटाइजेशन कहीं नहीं किया जा रहा है। जबकि हर ग्राम सभा में सैनिटाइजेशन के लिए पिछले बार ही मशीन दिलाया गया था। प्रधान का चुनाव होने के कारण प्रशासक नियुक्त है। अधिकारी टाल मटौल अपनाए है। सीखड़,कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ी है, पर सीखड़ विकासखंड में किसी भी ग्राम सभा में सैनिटाइजेशन नहीं किया गया है, ना ही सफाई कर्मचारी किसी गांव में दिखाई दे रहे हैं।
कोविड जैसे लक्षण से हुई मौत, नहीं हुई कोई जांच
मिर्जापुर। कोरोना संक्रमितों की कोविड अस्पताल में मौत हो रही है, पर मंडलीय अस्ताल और अन्य स्थानों पर सांस लेने में परेशानी और आक्सीजन की कमी से हो रही मौतों ने लोगों को परेशान कर दिया है। ये सब लक्षण भी कोविड के है। क्षेत्र के गांव में लगातार ऐसी मौतें हो रही हैं, पर गांव में न तो कोई जांच न ही सैनटिाइजेशन हो रहा है। लालगंज, क्षेत्र के मरीजों की जांच में कोविड भी नहीं पाया गया है। इसके बाद भी उनकी कोविड जैसे लक्षण से मौत हुई।
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ग्रामीण क्षेत्र में नहीं बन सका कोविड अस्पताल
चुनार/मड़िहान। ग्रामीण क्षेत्र में कोविड मरीजों के उपचार करने के लिए मड़िहान और चुनार के 30 बेड की सीएचसी को बढ़ाकर 50 बेड का कोविड अस्पताल बनाया जाना है, पर अब तक कोविड अस्पताल नहीं बन सका है। कोविड मरीजों के लिए चेचरी मोड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोविड अस्पताल बनना था, लेकिन अब तक नहीं बन सका है। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अजय सिंह ने बताया कि केन्द्र अधीक्षक को शीघ्र अस्पताल संचालित करने के लिए आवश्यक सामानों की पूर्ति के लिए सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
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वर्जन
कोविड संक्रमित मिलने पर हाट स्पाट घोषित करके संक्रमित के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच की जा रही है। सैनिटाइजेशन शहर क्षेत्र में नगर पालिका और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत विभाग का है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए सीएसचसी-पीएचसी पर जांच की सुविधा है। ग्रामीण क्षेत्र में मड़िहान और चुनार सीएसचसी को कोविड अस्पताल बनाया जा रहा है।
- डा. पीडी गुप्ता, सीएमओ