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चार किमी सड़क गड्ढे में तब्दील
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हलिया क्षेत्र के बस्तरा मोड़ से जड़कुड़ बार्डर तक लगभग 49 किलोमीटर लंबे 135 सी राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 4 किलोमीटर वन अभ्यारण्य क्षेत्र है। वन अभयारण्य क्षेत्र में स्थित करीब चार किलोमीटर सड़क पर कई जगह छोटे-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इसके चलते राहगीरों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उधर, वन विभाग की तरफ से आपत्ति लगाए जाने के कारण अभयारण्य क्षेत्र में स्थित क्षतिग्रस्त सड़क का निर्माण नहीं हो पा रहा है।
हलिया से गुर्गी मार्ग पर कई जगह बडे़ - बड़े गड्ढे हो गए हैं। गड्ढे में फंसकर आए दिन वाहन खराब हो रहे हैं, जबकि मनिगढ़ा, बरयां, देवरी, पिपरा आदि गांवों से सवारी लेकर रोडवेज की बसें मिर्जापुर की ओर आती-जाती हैं। रास्ता खराब होने से अक्सर वाहन खराब हो जाते हैं। इसके अलावा सड़क क्षतिग्रस्त होने से यात्रियों को तीन घंटे के सफर के लिए छह घंटे से अधिक समय बर्बाद करना पड़ता है। गुर्गीगांव से बड़ौही तक सड़क पर कई जगह गड्ढे हो गए हैं। गड्ढों के पास पहुंचने पर सवारी उतार कर बस को आगे बढ़ाना पड़ता है। सड़क निर्माण का कार्य एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की तरफ से कराया गया था, लेकिन लगभग चार किलोमीटर हिस्सा हलिया कैमूर वन्यजीव प्रभाग अभयारण्य का होने के कारण निर्माण कार्य रोक दिया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी कैमूर वन्य जीव प्रभाग आशुतोष जायसवाल ने बताया कि अभ्यारण्य क्षेत्र में मार्ग का निर्माण कार्य भारत सरकार की ओर से अनुमति मिलने के बाद ही कराया जा सकता है।
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हलिया से गुर्गी मार्ग पर कई जगह बडे़ - बड़े गड्ढे हो गए हैं। गड्ढे में फंसकर आए दिन वाहन खराब हो रहे हैं, जबकि मनिगढ़ा, बरयां, देवरी, पिपरा आदि गांवों से सवारी लेकर रोडवेज की बसें मिर्जापुर की ओर आती-जाती हैं। रास्ता खराब होने से अक्सर वाहन खराब हो जाते हैं। इसके अलावा सड़क क्षतिग्रस्त होने से यात्रियों को तीन घंटे के सफर के लिए छह घंटे से अधिक समय बर्बाद करना पड़ता है। गुर्गीगांव से बड़ौही तक सड़क पर कई जगह गड्ढे हो गए हैं। गड्ढों के पास पहुंचने पर सवारी उतार कर बस को आगे बढ़ाना पड़ता है। सड़क निर्माण का कार्य एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की तरफ से कराया गया था, लेकिन लगभग चार किलोमीटर हिस्सा हलिया कैमूर वन्यजीव प्रभाग अभयारण्य का होने के कारण निर्माण कार्य रोक दिया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी कैमूर वन्य जीव प्रभाग आशुतोष जायसवाल ने बताया कि अभ्यारण्य क्षेत्र में मार्ग का निर्माण कार्य भारत सरकार की ओर से अनुमति मिलने के बाद ही कराया जा सकता है।
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