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आसमान से बरस रही आग, किसान चिंतित
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सावन के महीने में पानी की फुहार के बजाय आसमान से आग बरस रही है। पानी नहीं बरसने से धान की नर्सरियां सूख रही हैं। मौसम की बेरुखी से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
जिले में मिर्जापुर नहर प्रखंड, सिंचाई खंड चुनार सहित सिरसी बांध से जुड़े नहरों का जाल बिछा हुआ है। सीजन के दौरान अधिकांश नहरों में इन दिनों पानी के बजाय तलहटी से धूल उड़ रही है। धान की नर्सरियों सहित सब्जी की खेती को बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी बिजली कटौती के चलते काम नहीं आ रही है। विकास खंड छानबे में वर्तमान में उमापुर लिफ्ट कैनाल की मांडारजबाहा में दो किलोमीटर तक ही पानी पहुंच रहा है। टेल पर बसे किसान पानी के लिए तरह रहे हैं। बेलन नहर प्रखंड की मांडारजबाहा, हरगढ़ प्रथम व द्वितीय लिफ्ट कैनाल अर्जुनपुर व नरायन घाट पंप कैनाल, बरबटा बंधी, चितौली माइनर, हाथी बार, कामापुर कला माइनर में पानी नहीं है। बारिश नहीं होने तथा प्रचंड धूप तथा गर्मी से धान की नर्सरी सहित अन्य साग सब्जी की फसलें सूख रहीं है। राजगढ़, घाघर नहर से क्षेत्र में खेतों की सिंचाई होती है। घाघर से निकली सेमरा माइनर, कोन माइनर, विशुनपुरा माइनर, निकरीका माइनर, भीटी माइनर, करौदा माइनर, पतेरी माइनर के माध्यम से जुड़े लुसा, करौदा, बघौडा, पतेरी, राजगढ़, कुड़ी, दरबान, भीटी, ददरा, नदीहार, निकरीका, सेमरा, भगवानपुर, गढ़वा आदि गांवों की हजारों बीघा खेत की सिंचाई होती है। अभी तक धान की खेती के लिए नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है। चिलचिलाती धूप के चलते धान के कटोरे में डाली गई धान की नर्सरी सूख रही है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। सावन माह में खेतों से हरियाली की जगह धूल उड़ रही है। किसानों का कहना है कि सावन माह के शुरूआत में रिमझिम फुहार पड़नी चाहिए, जबकि बारिश हो ही नहीं रही है। बहुआर गांव निवासी राजेंद्रनाथ तिवारी व वंशीधर ने बताया 15 जुलाई तक अच्छी बारिश नहीं होने पर सूखा मानते हुए जिले को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर देना चाहिए।
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जिले में मिर्जापुर नहर प्रखंड, सिंचाई खंड चुनार सहित सिरसी बांध से जुड़े नहरों का जाल बिछा हुआ है। सीजन के दौरान अधिकांश नहरों में इन दिनों पानी के बजाय तलहटी से धूल उड़ रही है। धान की नर्सरियों सहित सब्जी की खेती को बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी बिजली कटौती के चलते काम नहीं आ रही है। विकास खंड छानबे में वर्तमान में उमापुर लिफ्ट कैनाल की मांडारजबाहा में दो किलोमीटर तक ही पानी पहुंच रहा है। टेल पर बसे किसान पानी के लिए तरह रहे हैं। बेलन नहर प्रखंड की मांडारजबाहा, हरगढ़ प्रथम व द्वितीय लिफ्ट कैनाल अर्जुनपुर व नरायन घाट पंप कैनाल, बरबटा बंधी, चितौली माइनर, हाथी बार, कामापुर कला माइनर में पानी नहीं है। बारिश नहीं होने तथा प्रचंड धूप तथा गर्मी से धान की नर्सरी सहित अन्य साग सब्जी की फसलें सूख रहीं है। राजगढ़, घाघर नहर से क्षेत्र में खेतों की सिंचाई होती है। घाघर से निकली सेमरा माइनर, कोन माइनर, विशुनपुरा माइनर, निकरीका माइनर, भीटी माइनर, करौदा माइनर, पतेरी माइनर के माध्यम से जुड़े लुसा, करौदा, बघौडा, पतेरी, राजगढ़, कुड़ी, दरबान, भीटी, ददरा, नदीहार, निकरीका, सेमरा, भगवानपुर, गढ़वा आदि गांवों की हजारों बीघा खेत की सिंचाई होती है। अभी तक धान की खेती के लिए नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है। चिलचिलाती धूप के चलते धान के कटोरे में डाली गई धान की नर्सरी सूख रही है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। सावन माह में खेतों से हरियाली की जगह धूल उड़ रही है। किसानों का कहना है कि सावन माह के शुरूआत में रिमझिम फुहार पड़नी चाहिए, जबकि बारिश हो ही नहीं रही है। बहुआर गांव निवासी राजेंद्रनाथ तिवारी व वंशीधर ने बताया 15 जुलाई तक अच्छी बारिश नहीं होने पर सूखा मानते हुए जिले को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर देना चाहिए।
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