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मृत दिखाकर करा लिया फर्जी वरासत व मुआवजे का भुगतान
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मिर्जापुर। सिटी ब्लाक के टेढ़वा गांव निवासी मिश्रीलाल उर्फ मंगरू को उसके पट्टिदारों ने मृत दिखाकर फर्जी वरासत करा लिया। इतना ही नहीं उस जमीन पर एनएच-7 के अधिग्रहण का मिलने वाला मुुआवजा भी ले लिया। मिश्रीलाल ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर पुश्तैनी जमीन में वरासत दर्ज नहीं होने पर 14 फरवरी को आत्मदाह की चेतावनी दी है।
क्षेत्र निवासी मिश्रीलाल उर्फ मंगरु ने बताया कि सिरसी गहरवार में उसकी दादी दुलारी देवी के नाम जमीन संक्रमणीय काश्तकार दर्ज था। उनको दो पुत्र थे। वह छोटे पुत्र दुक्खी की संतान है। आरोप लगाया कि पटिदारों ने राजस्वकर्मियों को पैसा देकर उसे और उसके पिता को मृृत दिखाकर नियम विरुद्ध ढंग से जालसाजी करके वरासत में अपना नाम दर्ज करा लिया। जानकारी होने पर 19 दिसंबर 2019 को मुकदमा दाखिल किया, पर लेखपाल 20 हजार रुपये की मांग करने लगा। पैसा न देने पर लेखपाल ने विपक्षी से मिलकर भ्रामक रिपोर्ट लगा दिया। इसके बाद सिविल जज के यहां मामला दाखिल किया। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। वह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग में सम्मलित हुई है। मामले में विशेष भूमि अध्यप्ति अधिकारी सिंचाई को कई बार प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद भी आपत्ति की सुनवाई किए बिना विपक्षियों को उस भूमि का एक करोड़ 16 लाख 94 हजार 265 रुपये का भुगतान कर दिया गया। मामले में कई बार शिकायत किया गया, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जमीन कब्जा होने और मुआवजा न मिलने से परिवार भुखमरी के कगार पर है। मांग किया कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर वरासत दर्ज नहीं हुआ तो 14 फरवरी को कलेक्ट्रेट पर आत्मदाह कर लूंगा।
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क्षेत्र निवासी मिश्रीलाल उर्फ मंगरु ने बताया कि सिरसी गहरवार में उसकी दादी दुलारी देवी के नाम जमीन संक्रमणीय काश्तकार दर्ज था। उनको दो पुत्र थे। वह छोटे पुत्र दुक्खी की संतान है। आरोप लगाया कि पटिदारों ने राजस्वकर्मियों को पैसा देकर उसे और उसके पिता को मृृत दिखाकर नियम विरुद्ध ढंग से जालसाजी करके वरासत में अपना नाम दर्ज करा लिया। जानकारी होने पर 19 दिसंबर 2019 को मुकदमा दाखिल किया, पर लेखपाल 20 हजार रुपये की मांग करने लगा। पैसा न देने पर लेखपाल ने विपक्षी से मिलकर भ्रामक रिपोर्ट लगा दिया। इसके बाद सिविल जज के यहां मामला दाखिल किया। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। वह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग में सम्मलित हुई है। मामले में विशेष भूमि अध्यप्ति अधिकारी सिंचाई को कई बार प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद भी आपत्ति की सुनवाई किए बिना विपक्षियों को उस भूमि का एक करोड़ 16 लाख 94 हजार 265 रुपये का भुगतान कर दिया गया। मामले में कई बार शिकायत किया गया, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जमीन कब्जा होने और मुआवजा न मिलने से परिवार भुखमरी के कगार पर है। मांग किया कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर वरासत दर्ज नहीं हुआ तो 14 फरवरी को कलेक्ट्रेट पर आत्मदाह कर लूंगा।
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