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लग्जरी बसों से वापस लौट रहे प्रवासी
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लालगंज। राहत की बात यह है कि कोरोनावायरस लाक डाउन के दौरान घर आए प्रवासी मजदूरों की कार्यस्थल पर वापसी शुरू हो चुकी है। प्राइवेट कंपनियों ने लग्जरी बसें भेज करके अपने कंपनी के मजदूरों को बुलाना शुरू कर दिया है। मार्च से ही श्रमिक गांव में रहकर मनरेगा योजना से जुड़कर परिवार का भरण पोषण कर रहे थे।ऐसे में कंपनी के वापस बुलाने पर उनकी बांछे खिल उठी हैं।
उपरौध क्षेत्र मजदूरों का मुंबई सूरत दिल्ली लगातार वापसी हो रही है। कंपनी निजी लक्जरी बस भेज करके उन्हें कार्यस्थल पर बुला रही है। अभी संदेश दे रही है कि उनको रोजगार मिलेगा, घबराने की जरूरत नहीं है काम शुरू हो चुका है। इस खबर ने मजदूरों के अंदर उत्साह बढ़ा दिया है क्योंकि उनका विकास बाहर की कमाई पर ही निर्भर था। बच्चों की पढ़ाई लिखाई समेत गृहस्थी के खर्च को बड़ी आसानी से बाहर की कमाई से पूरा कर लेते थे। काम बंद होने के कारण उनके सामने अंधकार जैसा दिखाई देने लगा था। बरडीहा ,मेढ़रा, मानिकपुर, खरिहट, पंजरा, कोलकम, उसका, तेंदुहनी,कोठी,मड़वा,रानीबारी,रेही आदि गांव के मजदूर खुशी से अपने कंपनी के गाड़ी से जा रहे हैं। सूरत में काम करने वाले कल्लू कोल कहते है कि कंपनी में काम करने से इकट्ठा पैसा मिल जाता है जो दिखाई देता है और उससे विकास होता है । यही बात नरेना के निवासी रामधनी कहते हैं कि बाहर काम करने से महीने भर की कमाई का पैसा इकट्ठा हो जाता है जो परिवार के भरण-पोषण और विकास के काम में आता है। वहां जाकर काम करने में कोई परेशानी नहीं है व्यवस्थाएं सुरक्षित हैं।
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उपरौध क्षेत्र मजदूरों का मुंबई सूरत दिल्ली लगातार वापसी हो रही है। कंपनी निजी लक्जरी बस भेज करके उन्हें कार्यस्थल पर बुला रही है। अभी संदेश दे रही है कि उनको रोजगार मिलेगा, घबराने की जरूरत नहीं है काम शुरू हो चुका है। इस खबर ने मजदूरों के अंदर उत्साह बढ़ा दिया है क्योंकि उनका विकास बाहर की कमाई पर ही निर्भर था। बच्चों की पढ़ाई लिखाई समेत गृहस्थी के खर्च को बड़ी आसानी से बाहर की कमाई से पूरा कर लेते थे। काम बंद होने के कारण उनके सामने अंधकार जैसा दिखाई देने लगा था। बरडीहा ,मेढ़रा, मानिकपुर, खरिहट, पंजरा, कोलकम, उसका, तेंदुहनी,कोठी,मड़वा,रानीबारी,रेही आदि गांव के मजदूर खुशी से अपने कंपनी के गाड़ी से जा रहे हैं। सूरत में काम करने वाले कल्लू कोल कहते है कि कंपनी में काम करने से इकट्ठा पैसा मिल जाता है जो दिखाई देता है और उससे विकास होता है । यही बात नरेना के निवासी रामधनी कहते हैं कि बाहर काम करने से महीने भर की कमाई का पैसा इकट्ठा हो जाता है जो परिवार के भरण-पोषण और विकास के काम में आता है। वहां जाकर काम करने में कोई परेशानी नहीं है व्यवस्थाएं सुरक्षित हैं।
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