मिर्जापुर। लाकडाउन के दूसरे चरण में सोमवार को सिर्फ सरकारी दफ्तर खुलने थे। वो भी सीमित कर्मचारियों के साथ, पर सोमवार को शहर से लेकर गांव तक पुलिस सुस्ताती नजर आई। लॉक डाउन के 27 दिनों में पहली बार लगा कि जैसे लॉक डाउन में ढील दे दीगई हो। ऐसा नहीं था कि लाक डाउन का पालन कराने के लिए सड़कों पर पुलिस की तैनाती नहीं थी। पुलिस तो तैनात थी, पर उसका तेवर बाकी दिनों की तरह नहीं दिखा। जैसे पुलिस भी गफलत में आ गई थी कि लाकडाउन है कि नहीं।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने आदेश दिया था कि सिर्फ सरकारी कार्यालय खुुलेंगे। कार्यालय में अधिकारियों के साथ सिर्फ 33 प्रतिशत कर्मचारी की कार्यालय आएंगे। रविवार की रात से ही एक लेटर सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा। जिसमें जरुरत की कई अन्य दुकानों को खोले जाने की बात लिखी थी। सोमवार की सुबह होते ही सड़क पर लोग सड़कों पर निकल गए। नगर का ऐसा कोई इलाका नहीं था। जहां लगे कि लॉक डाउन का पालन हो रहा है। पुलिस तो प्रतिदिन की तरह अपने तय स्थान पर तैनात थी, पर उसका हनक अन्य दिनों की तरह दिखाई नहीं दे रहा था। एक महिला चार बच्चों के साथ बिना मास्क के पैदल चली जा रही थी। पूछने पर बताया कि सामान लेने जा रही है, लॉक डाउन में छूट मिल गई है। बच्चे पैदल टहल रहे थे। कुछ बच्चे साइकिल से टहल रहे थे। कई दुकानदार भी आधा शटर उठाकर दुकान खोले हुए थे। उनका भी कहना था कि आज से जरुरी दुकान खोलने की छूट है। जब लोगों ने बताया तो दुकानदार ने दुकान बंद किया। आमजन तो छूट की अफवाह के चलते गफलत में आ गए, पर पुलिस की कार्यशैली देखकर लगा कि आखिर वो गफलत में क्यों आ गई। उसे तो नियमों के बारे में पूरी जानकारी थी। आला अधिकारी भी जब क्षेत्र में निकले तो उन्हें व्यवस्था ढीली नजर आई। मंगलवार से ऐसी स्थिति न हो, इसको लेकर मातहतों को कड़े निर्देश दिए गए हैं।