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Mirzapur News: मेडिकल काॅलेज के इमरजेंसी सेवा, ट्रामा सेंटर की व्यवस्था को परखा
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मिर्जापुर। प्रदेश के मेडिकल काॅलेजों की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए शासन की तरफ से चिकित्सा शिक्षा द्वारा गठित टीम ने शुक्रवार को मेडिकल काॅलेज की इमरजेंसी और ट्रामा सेेंटर की व्यवस्था को परखा। इसके अलावा अस्पताल के ब्लड बैंक, पैथालाॅजी, रेेडियोलाजी विभाग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य और डाॅक्टर के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं को और बेहतर करने के लिए सलाह दी।
आकस्मिक चिकित्सा, ट्राॅमा और आईसीयू सर्विस डिपार्टमेंट आफ चिकित्सा शिक्षा के नोडल डाॅ. एलडी मिश्रा और प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट डाॅ. अर्पित श्रीवास्तव शुक्रवार की दोपहर मेडिकल काॅलेज पहुंचे। वहां से प्राचार्य डाॅ. आरबी कमल के साथ मंडलीय अस्पताल परिसर में स्थित इमरजेंसी और ट्राॅमा सेंटर की सुविधाओं का निरीक्षण किया। इमरजेंसी में डिफैब्रिलेटर मशीन लगाए जाने और ट्रायज कक्ष को बेहतर करने का निर्देश दिया। इस दौरान इमरजेंसी में आई एक वृद्धा का ड्यूटी पर तैनात डाॅक्टर पवन से इलाज का लाइव डैमो लिया। इसके बाद ट्राॅमा सेंटर पहुंचे। नोडल डाॅ. राजकुमार दवा ट्राली और डिफैब्रिलेटर की जानकारी ली। ट्रामा सेंटर में आने वाले मरीज के उपचार के लिए पैथाेलाॅजी और रेडियोलाजी सुविधा के बारे में जानकारी ली। प्राचार्य डाॅ. आरबी कमल से अस्पताल के बेड के बारे में जानकारी ली। इस अवसर पर डाॅ. नंदलाल, डाॅ. सचिन किशोर, डाॅ. अरविंद सिन्हा, डाॅ. दिलीप चौरसिया, डाॅ. राजकुमार, डाॅ. प्रशांत त्रिपाठी, डाॅ. सुनील सिंह, प्रबंधक अनुज ठाकुर, प्रदीप त्रिपाठी आदि रहे।
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इमरजेंसी, ट्रामा और आईसीयू को करें एकीकृत - डाॅ. एलडी मिश्रा
मिर्जापुर। निरीक्षण करने के बाद डाॅ. प्रो. एलडी मिश्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने यूपी में बने नए और पुराने सभी मेडिकल काॅलेज में इमरजेंसी सेवा और गहन चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर करना चाहती है। लोग इलाज कराने के लिए लखनऊ, दिल्ली जा रहे हैं। इसे लेकर सरकार चिंतित है। सरकार चाहती है कि लोगों को बेहतर इलाज उनके जिले में ही मिले। इसके लिए सलाह दिया जा रहा है कि कैसे और बेहतर करें। बताया कि नया मेडिकल काॅलेज है तो व्यवस्था को बेहतर करने में समय लग रहा है। जो कमियां मिली हैं। उसे बेहतर करने का निर्देश दिया गया है। इमरजेंसी, ट्रामा और आईसीयू अलग-अलग हैं। इसे एकीकृत करने को कहा गया है। इससे डाक्टर और अन्य स्टाफ की कमी नहीं होगी। अलग-अलग होने से हर स्थान पर मैनपावर अधिक लगता है। मरीज की जान बचाने के लिए जो उपकरण चाहिए। उसे खरीदने का निर्देश दिया गया है। इमरजेंसी में दो अल्ट्रासाउंड जरूरी है। उसे खरीदने के लिए कहा गया है।
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आकस्मिक चिकित्सा, ट्राॅमा और आईसीयू सर्विस डिपार्टमेंट आफ चिकित्सा शिक्षा के नोडल डाॅ. एलडी मिश्रा और प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट डाॅ. अर्पित श्रीवास्तव शुक्रवार की दोपहर मेडिकल काॅलेज पहुंचे। वहां से प्राचार्य डाॅ. आरबी कमल के साथ मंडलीय अस्पताल परिसर में स्थित इमरजेंसी और ट्राॅमा सेंटर की सुविधाओं का निरीक्षण किया। इमरजेंसी में डिफैब्रिलेटर मशीन लगाए जाने और ट्रायज कक्ष को बेहतर करने का निर्देश दिया। इस दौरान इमरजेंसी में आई एक वृद्धा का ड्यूटी पर तैनात डाॅक्टर पवन से इलाज का लाइव डैमो लिया। इसके बाद ट्राॅमा सेंटर पहुंचे। नोडल डाॅ. राजकुमार दवा ट्राली और डिफैब्रिलेटर की जानकारी ली। ट्रामा सेंटर में आने वाले मरीज के उपचार के लिए पैथाेलाॅजी और रेडियोलाजी सुविधा के बारे में जानकारी ली। प्राचार्य डाॅ. आरबी कमल से अस्पताल के बेड के बारे में जानकारी ली। इस अवसर पर डाॅ. नंदलाल, डाॅ. सचिन किशोर, डाॅ. अरविंद सिन्हा, डाॅ. दिलीप चौरसिया, डाॅ. राजकुमार, डाॅ. प्रशांत त्रिपाठी, डाॅ. सुनील सिंह, प्रबंधक अनुज ठाकुर, प्रदीप त्रिपाठी आदि रहे।
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इमरजेंसी, ट्रामा और आईसीयू को करें एकीकृत - डाॅ. एलडी मिश्रा
मिर्जापुर। निरीक्षण करने के बाद डाॅ. प्रो. एलडी मिश्रा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने यूपी में बने नए और पुराने सभी मेडिकल काॅलेज में इमरजेंसी सेवा और गहन चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर करना चाहती है। लोग इलाज कराने के लिए लखनऊ, दिल्ली जा रहे हैं। इसे लेकर सरकार चिंतित है। सरकार चाहती है कि लोगों को बेहतर इलाज उनके जिले में ही मिले। इसके लिए सलाह दिया जा रहा है कि कैसे और बेहतर करें। बताया कि नया मेडिकल काॅलेज है तो व्यवस्था को बेहतर करने में समय लग रहा है। जो कमियां मिली हैं। उसे बेहतर करने का निर्देश दिया गया है। इमरजेंसी, ट्रामा और आईसीयू अलग-अलग हैं। इसे एकीकृत करने को कहा गया है। इससे डाक्टर और अन्य स्टाफ की कमी नहीं होगी। अलग-अलग होने से हर स्थान पर मैनपावर अधिक लगता है। मरीज की जान बचाने के लिए जो उपकरण चाहिए। उसे खरीदने का निर्देश दिया गया है। इमरजेंसी में दो अल्ट्रासाउंड जरूरी है। उसे खरीदने के लिए कहा गया है।
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