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बलि देने को लेकर हुआ विवाद, पहुंची फोर्स
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मिर्जापुर। कटरा कोतवाली क्षेत्र के बथुआ गांधी घाट के पास स्थित बाबा कीनाराम आश्रम के पीछे बलि दिए जाने को लेकर विवाद हो गया। दूसरे पक्ष ने अपनी जमीन पर बलि देने का विरोध किया। इस पर आश्रम में आए औघड़ इकट्ठा हो गए। सूचना पर कटरा कोतवाली पुलिस पहुंची। प्रभारी एसपी संजय कुमार वर्मा ने नगर मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी को मौके पर भेजा। दोनों पक्षों से बात करने के बाद बलि दूसरी जगह दिए जाने की बात पर मामला शांत हुआ। जमीन विवाद सुलझाने के लिए नगर मजिस्ट्रेट ने टीम का गठन किया।
गांधी घाट के पास बाबा कीनाराम का प्राचीन आश्रम है। जहां पर नौ दिसंबर को प्रतिवर्ष औघड़ और साधक इकट्ठा होकर पूजा-पाठ करते हैं और बकरे की बलि देते हैं। इस वर्ष भी बृहस्पतिवार को आश्रम के पीछे नदी की ओर जमीन पर बलि दिए जाने की तैयारी थी। पर जमीन के मालिक ने बलि देने से रोक दिया। इससे औघड़ आक्रोशित हो गए। विवाद की सूचना पर कटरा कोतवाल राम नरायन राम मौके पर पहुंचे। नगर मजिस्ट्रेट विनय सिंह और सीओ सिटी प्रभात राय भी मौके पर पहुंचे। आश्रम के बाबा औघड़ शत्रुघ्न राम उर्फ मामा बाबा ने बताया कि 400 वर्ष पुराना आश्रम है। आश्रम के पीछे हर वर्ष बलि होती है। वहां पर बाबा की समाधि है। नदी की जमीन आश्रम की है, विपक्षी अपनी जमीन बताकर बलि देने से रोक रहे हैं। जमीन कब्जा कर रहे विपक्षियों ने वहां स्थापित काली मूर्ति को भी हटा दिया। वहीं देवेंद्र चौधरी का कहना है कि उनकी जमीन है। जमीन को एक वर्ष पूर्व खरीदा गया है। बलि आश्रम में दे।
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गांधी घाट के पास बाबा कीनाराम का प्राचीन आश्रम है। जहां पर नौ दिसंबर को प्रतिवर्ष औघड़ और साधक इकट्ठा होकर पूजा-पाठ करते हैं और बकरे की बलि देते हैं। इस वर्ष भी बृहस्पतिवार को आश्रम के पीछे नदी की ओर जमीन पर बलि दिए जाने की तैयारी थी। पर जमीन के मालिक ने बलि देने से रोक दिया। इससे औघड़ आक्रोशित हो गए। विवाद की सूचना पर कटरा कोतवाल राम नरायन राम मौके पर पहुंचे। नगर मजिस्ट्रेट विनय सिंह और सीओ सिटी प्रभात राय भी मौके पर पहुंचे। आश्रम के बाबा औघड़ शत्रुघ्न राम उर्फ मामा बाबा ने बताया कि 400 वर्ष पुराना आश्रम है। आश्रम के पीछे हर वर्ष बलि होती है। वहां पर बाबा की समाधि है। नदी की जमीन आश्रम की है, विपक्षी अपनी जमीन बताकर बलि देने से रोक रहे हैं। जमीन कब्जा कर रहे विपक्षियों ने वहां स्थापित काली मूर्ति को भी हटा दिया। वहीं देवेंद्र चौधरी का कहना है कि उनकी जमीन है। जमीन को एक वर्ष पूर्व खरीदा गया है। बलि आश्रम में दे।
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