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माता दरबार में भक्तों का डेरा
ब्यूरो/ अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Fri, 08 Apr 2016 12:23 AM IST
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मां विंध्यवासिनी
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गुरुवार देर रात विंध्यधाम में नवरात्र मेले का आगाज हो गया। मां भवानी के मुख्य मंदिर को रंगीन झालरों और झिलमिल सितारों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। दूरदराज से आए हजारों भक्तों ने गंगा स्नान के बाद मां के श्रीचरणों का दर्शन कर खुद को धन्य किया। नवरात्र में प्रवास के लिए भक्तों ने विंध्य धाम में डेरा डाल दिया है।
नवरात्र के दौरान विंध्या धाम में हजारों श्रद्धालु प्रवास करते हैं। इसके लिए भ्ाक्तों का जत्था सुबह से ही रेलवे और बस स्टेशन से आने लगा। दूरदराज से आए भक्तों ने पहले गंगा स्नान किया। इसके बाद मां विंध्यवासिनी, अष्टभुजा समेत अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शन पूजन किया।
मंदिरों के आसपास अस्थायी दूकानें भी सज गई हैं। उधर, गंगा आरती को भव्य बनाने के लिए देर शाम तक गंगा घाटों पर तैयारी चलती रही। पक्का घाट पर गुरुवार को देर शाम तक स्टील की रेलिंग लगाई जा रही थी।
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मंदिर परिसर में मेटल डिटेक्टर लगाए जाने का काम देर तक चला। अष्टभुजा पहाड़ पर दर्शनार्थियों के पेयजल के लिए एक मिनी ट्यूबवेल लगाया गया है, जो बिजली की उपलब्धता पर ही पानी उगलता है।
पहाड़ मंदिर से आधा किलोमीटर दूर जाने पर श्रद्धालुओं को पीने के लिए हैंडपंप का पानी मिलेगा। हालांकि मां के मुख्य मंदिर को रंगीन पन्नियों से सजाया गया है। मंदिर के खंभों को रंगीन चादरों से ढंक कर खूबसूरत ढंग से सजा दिया गया है। दूकानदारों ने भी अपनी दूकानों को खूबसूरत ढंग से तैयार किया है। गलियों में सफाई का कार्य अनवरत ढंग से किया जा रहा है, फिर कहीं कहीं गंदगी दिखाई पड़ ही जा रही है।
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नवरात्र के दौरान विंध्या धाम में हजारों श्रद्धालु प्रवास करते हैं। इसके लिए भ्ाक्तों का जत्था सुबह से ही रेलवे और बस स्टेशन से आने लगा। दूरदराज से आए भक्तों ने पहले गंगा स्नान किया। इसके बाद मां विंध्यवासिनी, अष्टभुजा समेत अन्य प्रमुख देवी मंदिरों में दर्शन पूजन किया।
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मंदिरों के आसपास अस्थायी दूकानें भी सज गई हैं। उधर, गंगा आरती को भव्य बनाने के लिए देर शाम तक गंगा घाटों पर तैयारी चलती रही। पक्का घाट पर गुरुवार को देर शाम तक स्टील की रेलिंग लगाई जा रही थी।
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मंदिर परिसर में मेटल डिटेक्टर लगाए जाने का काम देर तक चला। अष्टभुजा पहाड़ पर दर्शनार्थियों के पेयजल के लिए एक मिनी ट्यूबवेल लगाया गया है, जो बिजली की उपलब्धता पर ही पानी उगलता है।
पहाड़ मंदिर से आधा किलोमीटर दूर जाने पर श्रद्धालुओं को पीने के लिए हैंडपंप का पानी मिलेगा। हालांकि मां के मुख्य मंदिर को रंगीन पन्नियों से सजाया गया है। मंदिर के खंभों को रंगीन चादरों से ढंक कर खूबसूरत ढंग से सजा दिया गया है। दूकानदारों ने भी अपनी दूकानों को खूबसूरत ढंग से तैयार किया है। गलियों में सफाई का कार्य अनवरत ढंग से किया जा रहा है, फिर कहीं कहीं गंदगी दिखाई पड़ ही जा रही है।