{"_id":"577810f04f1c1bd42c79bb98","slug":"guilty-iniquity-of-ten-years-rigorous-imprisonment","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुकर्म के दोषी को दस वर्ष का कठोर कारावास ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कुकर्म के दोषी को दस वर्ष का कठोर कारावास
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
Updated Sun, 03 Jul 2016 12:37 AM IST
विज्ञापन
कुकर्म
- फोटो : Misdeed
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यायालय विशेष न्यायाधीश एससी -एसटी एक्ट विशेष शर्मा ने मूक-बधिर किशोर के साथ कुकर्म करने के आरोपी को दोष सिद्ध पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अभियुक्त को 28 हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित करते हुए उसे जेल भेज दिया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार देहात कोतवाली क्षेत्र के खुटहा गांव निवासी आरोपी राजेश पाल पुत्र शिवबरन 24 अप्रैल वर्ष 2012 के विरुद्ध पीड़ित के पिता द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप लगाया कि उसके मूक बधिर पुत्र को धमकाकर अभियुक्त अरहर के खेत में ले गया। वहां उसके साथ अप्राकृतिक दुराचार किया।
ता की तहरीर पर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया। मूक-बधिर विशेषज्ञ टीचर को न्यायालय में बुलाकर उसकी भाषा को समझकर बयान के रूप में दर्ज किया गया। जिसमें पीड़ित ने आरोपी के खिलाफ उसके साथ कुकर्म करने की बात बताई।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रमेंद्र कुमार शुक्ल ने सभी गवाहाें को प्रस्तुत कराया। जिसकी सुनवाई शनिवार को हुई। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य तथा गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने आरोपी राजेश पाल को दोषसिद्ध पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उसे जेल भेज दिया। 28 हजार रुपये जुर्माने की राशि से 20 हजार रुपया पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया।
साथ ही धारा 257 के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण में पीड़ित पक्ष के द्वारा प्रार्थना पत्र देने पर और मुआवजा देने के लिए आदेशित किया।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के अनुसार देहात कोतवाली क्षेत्र के खुटहा गांव निवासी आरोपी राजेश पाल पुत्र शिवबरन 24 अप्रैल वर्ष 2012 के विरुद्ध पीड़ित के पिता द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप लगाया कि उसके मूक बधिर पुत्र को धमकाकर अभियुक्त अरहर के खेत में ले गया। वहां उसके साथ अप्राकृतिक दुराचार किया।
विज्ञापन
ता की तहरीर पर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दिया। मूक-बधिर विशेषज्ञ टीचर को न्यायालय में बुलाकर उसकी भाषा को समझकर बयान के रूप में दर्ज किया गया। जिसमें पीड़ित ने आरोपी के खिलाफ उसके साथ कुकर्म करने की बात बताई।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रमेंद्र कुमार शुक्ल ने सभी गवाहाें को प्रस्तुत कराया। जिसकी सुनवाई शनिवार को हुई। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य तथा गवाहों के बयान के आधार पर न्यायालय ने आरोपी राजेश पाल को दोषसिद्ध पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उसे जेल भेज दिया। 28 हजार रुपये जुर्माने की राशि से 20 हजार रुपया पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया।
साथ ही धारा 257 के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण में पीड़ित पक्ष के द्वारा प्रार्थना पत्र देने पर और मुआवजा देने के लिए आदेशित किया।