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रेंजर के हत्यारोपी को आजीवन कारावास
Updated Sun, 16 Jul 2017 12:18 AM IST
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मिर्जापुर। अपर सत्र न्यायाधीश पी एन श्रीवास्तव ने 20 वर्ष पूर्व हुए रेंजर की हत्या की सुनवाई करते हुए आरोपी सुरक्षा गार्ड सुरेश नारायण पांडेय का दोषसिद्घ पाए जाने पर शनिवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंडित की आधी धनराशि को मृतक के पत्नी व बच्चों को देने का आदेश दिया।
अभियोजन अनुसार वन रेंजर रमाशंकर शुक्ला प्रभागीय वनाधिकारी मिर्जापुर में कार्यरत थे। उन्होंने बिना परिमिट की लकड़ी को ले जा रहे एक ट्रक को पकड़कर उसके चालक से पूछताछ किया तो उसने बताया कि आपके विभाग में तैनात सुरक्षा गार्ड सुरेश नारायण पांडेय ही सुविधा शुल्क लेकर अवैध तरीके लकड़ियों को लेकर जाने वाले वाहनों को पास कराता है। जानकारी होने ही रेंजर ने सुरक्षा गार्ड के विरूद्घ कार्रवाई करने के लिए डीएफओ को पत्र लिखकर संस्तुति की थी। जिससे नाराज होकर सुरक्षा सुरेेश नारायण ने सात नवंबर 1997 को डीएफओ कार्यालय जोगियाबारी स्थित रेंजर के दफ्तर में पहुंचा और अपहरान तीन बजे अपने राइफल से उनके कनपटी व सीने पर दो गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। घटना की जानकारी होने पर वन क्षेत्राधिकारी रामदयाल सिंह ने शहर कोतवाली में सुरक्षा गार्ड के खिलाफ लिखित तहरीर दी थी। उनके अनुसार वह लल्लन श्रीवास्तव के कक्ष में बैठे थे कि अचानक गोली चलने की आवाज सुनी। जब कमरे से बाहर निकले तो दूसरी गोली भी चलने की आवाज सुनाई दी। देखा कि सुरेश नारायण पांडेय सुरक्षा गार्ड अपने हाथ में राइफल लेकर लोगों को धक्का देते हुए आफिस से बाहर भागा जा रहा है। उसके हाथ में असलहा होने के कारण किसी ने उसको पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई। कमरे में पहुंचे तो देखा कि रेंजर रमाशंकर शुक्ल मृत पड़े थे। रेंजर की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी सुरेश नारायण के खिलाफ धारा 302 का मुकदमा दर्ज कर विवेचना करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। 20 वर्ष पुराने रेंजर हत्याकांड के मामले की सुनवाई शनिवार को न्यायालय द्वारा किया गया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्याम नारायण पांडेय व सुनीता गुप्ता ने 17 गवाह प्रस्तुत कराया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान, अधिवक्ताओं के दलील के आधार पर कोर्ट ने आरोपी सुरेश नारायण पांडेय को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जुमाने की राशि में से 50 प्रतिशत मृतक रमाशंकर शुक्ला की पत्नी तथा उनके पुत्र पुत्रियों को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का आदेश दिया। क्षतिपूर्ति की यह धनराशि अपर्याप्त है। इसलिए विधिक सेवा प्राधिकरण को उनके मृतक आश्रितों को राज्य सरकार से समुचित मुआवजा भी प्रदान करने का आदेश दिया है।
अभियोजन अनुसार वन रेंजर रमाशंकर शुक्ला प्रभागीय वनाधिकारी मिर्जापुर में कार्यरत थे। उन्होंने बिना परिमिट की लकड़ी को ले जा रहे एक ट्रक को पकड़कर उसके चालक से पूछताछ किया तो उसने बताया कि आपके विभाग में तैनात सुरक्षा गार्ड सुरेश नारायण पांडेय ही सुविधा शुल्क लेकर अवैध तरीके लकड़ियों को लेकर जाने वाले वाहनों को पास कराता है। जानकारी होने ही रेंजर ने सुरक्षा गार्ड के विरूद्घ कार्रवाई करने के लिए डीएफओ को पत्र लिखकर संस्तुति की थी। जिससे नाराज होकर सुरक्षा सुरेेश नारायण ने सात नवंबर 1997 को डीएफओ कार्यालय जोगियाबारी स्थित रेंजर के दफ्तर में पहुंचा और अपहरान तीन बजे अपने राइफल से उनके कनपटी व सीने पर दो गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। घटना की जानकारी होने पर वन क्षेत्राधिकारी रामदयाल सिंह ने शहर कोतवाली में सुरक्षा गार्ड के खिलाफ लिखित तहरीर दी थी। उनके अनुसार वह लल्लन श्रीवास्तव के कक्ष में बैठे थे कि अचानक गोली चलने की आवाज सुनी। जब कमरे से बाहर निकले तो दूसरी गोली भी चलने की आवाज सुनाई दी। देखा कि सुरेश नारायण पांडेय सुरक्षा गार्ड अपने हाथ में राइफल लेकर लोगों को धक्का देते हुए आफिस से बाहर भागा जा रहा है। उसके हाथ में असलहा होने के कारण किसी ने उसको पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटाई। कमरे में पहुंचे तो देखा कि रेंजर रमाशंकर शुक्ल मृत पड़े थे। रेंजर की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी सुरेश नारायण के खिलाफ धारा 302 का मुकदमा दर्ज कर विवेचना करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में दिया था। 20 वर्ष पुराने रेंजर हत्याकांड के मामले की सुनवाई शनिवार को न्यायालय द्वारा किया गया। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्याम नारायण पांडेय व सुनीता गुप्ता ने 17 गवाह प्रस्तुत कराया। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान, अधिवक्ताओं के दलील के आधार पर कोर्ट ने आरोपी सुरेश नारायण पांडेय को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जुमाने की राशि में से 50 प्रतिशत मृतक रमाशंकर शुक्ला की पत्नी तथा उनके पुत्र पुत्रियों को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का आदेश दिया। क्षतिपूर्ति की यह धनराशि अपर्याप्त है। इसलिए विधिक सेवा प्राधिकरण को उनके मृतक आश्रितों को राज्य सरकार से समुचित मुआवजा भी प्रदान करने का आदेश दिया है।
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