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वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट न होने पर होगी कार्रवाई
Updated Wed, 05 Jul 2017 12:31 AM IST
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मिर्जापुर। जनपद के समस्त विद्यालय अपने वाहनों का निरीक्षण करा लें तथा जिन वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है, उसे कार्यालय में वाहन प्रस्तुत कर प्राप्त कर लें। इसके लिए विद्यालयों को 10 जुलाई तक का समय दिया गया है। इस अवधि के उपरांत अनफिट दशा में संचालित स्कूली वाहनों के विरुद्घ कड़ी कार्रवाई की जाएगी तथा विद्यालयों में जाकर वाहनों का औचक निरीक्षण भी किया जाएगा यह बातें बुधवार को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन अलका शुक्ला ने बताई।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन अलका शुक्ला ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत हो गई है। कुछ विद्यालयी वाहन एवं कुछ विद्यालय में संबद्घ वाहनों के द्वारा स्कूली बच्चों को आने-जाने की सुविधा प्रदान की जाती है। इन स्कूली वाहनों का सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी मानकों तथा सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत निर्धारित मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है। दिशा-निर्देश में शामिल है कि वाहन गोल्डेन यलो विथ ब्राउन-ब्लू लाइनिंग रंग का हो एवं उसके आगे-पीछे स्कूल बस लिखा हो। प्रत्येक स्कूल बस पर विद्यालय का नाम तथा टेलीफोन नंबर लिखा हो। स्कूल बस तथा वाहन चालक के पास व्यवसायिक वाहन चलाने का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव हो तथा वाहन स्कूल परमिट से आच्छादित हो। वाहन में पंजीकृत सीटिंग क्षमता से डेढ़ गुने से अधिक बच्चे न बैठाएं जाएं तथा वाहनों की सीट आदि आरामदायक एवं ठीक हालात में होनी चाहिए। एआरटीओ ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय प्रबंधन के साथ-साथ अभिभावकों का भी सहयोग अपेक्षित है। अभिभावक उन्हीं स्कूली वाहनों से अपने बच्चों को स्कूल भेजें, जो निर्धारित मानकों का पालन करते हों।
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सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन अलका शुक्ला ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत हो गई है। कुछ विद्यालयी वाहन एवं कुछ विद्यालय में संबद्घ वाहनों के द्वारा स्कूली बच्चों को आने-जाने की सुविधा प्रदान की जाती है। इन स्कूली वाहनों का सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी मानकों तथा सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत निर्धारित मानकों के अनुरूप होना आवश्यक है। दिशा-निर्देश में शामिल है कि वाहन गोल्डेन यलो विथ ब्राउन-ब्लू लाइनिंग रंग का हो एवं उसके आगे-पीछे स्कूल बस लिखा हो। प्रत्येक स्कूल बस पर विद्यालय का नाम तथा टेलीफोन नंबर लिखा हो। स्कूल बस तथा वाहन चालक के पास व्यवसायिक वाहन चलाने का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव हो तथा वाहन स्कूल परमिट से आच्छादित हो। वाहन में पंजीकृत सीटिंग क्षमता से डेढ़ गुने से अधिक बच्चे न बैठाएं जाएं तथा वाहनों की सीट आदि आरामदायक एवं ठीक हालात में होनी चाहिए। एआरटीओ ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय प्रबंधन के साथ-साथ अभिभावकों का भी सहयोग अपेक्षित है। अभिभावक उन्हीं स्कूली वाहनों से अपने बच्चों को स्कूल भेजें, जो निर्धारित मानकों का पालन करते हों।
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