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दलित की हत्या में पिता पुत्र को उम्रकैद

Fri, 16 Nov 2018 01:27 AM IST
Updated Fri, 16 Nov 2018 01:27 AM IST
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दलित की हत्या में पिता पुत्र को उम्रकैद
मिर्जापुर। दलित की हत्या के 15 वर्ष पुराने मामले की सुनवाई कर रही भगवती प्रसाद सक्सेना की विशेष अदालत (एससी-एसटी) ने दोष सिद्ध होने पर पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर दस-दस हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। पड़री थाना क्षेत्र के अघवार गांव निवासी एवं वादी अदालत धइकार पुत्र सीरभय ने 15 मई 2003 को थाने में तहरीर दी थी। उनका आरोप था कि उसका छोटा भाई फौजदार धइकार शाम पांच बजे दुर्गा धइकार के दरवाजे पर अपना ट्रैक्टर बनवा रहा था। उसी समय गांव के दया शंकर पांडेय अपने दो बेटों पीयूष उर्फ पप्पू और मृत्युंजय उर्फ बच्चा पांडेय के साथ लंबू निवासी कम्हारी की जीप से वहां पहुंच और उनके भाई फौजदार पर हमला कर दिया। दया शंकर के हाथ में भुजाली और उनके दोनों बेटों के हाथ में तमंचे थे। जान से मारने की नीयत से दोनों ने तमंचे से फायर कर दिया। गोली लगने से उसका भाई फौजदार गिरकर तड़पने लगा। जमीन पर गिरते ही दयाशंकर ने उसके भाई पर भुजाली से हमला करना शुरू कर दिया। आरोप है कि अपने भाई का बचाव करने पहुंचे अदालत को भी तीनों ने घायल कर दिया। इसके बाद आटो से फौजदार को अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में उसकी मौत हो गई। हत्याकांड की वजह यह थी कि दयाशंकर पांडेय की बेटी रक्षा उर्फ गुड़िया और मेरे भाई फौजदार ने कोर्ट मैरिज कर ली थी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने दया शंकर और उनके दोनों बेटों पीयूष व मृत्युंजय के खिलाफ धारा 302, 307 एवं एसी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना करते हुए आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया था। दया शंकर के छोटे बेटे मृत्युंजय को किशोर होने के कारण वाद अलग कर उसे बाल न्यायालय में प्रेषित किया गया। भगवती प्रसाद सक्सेना की विशेष अदालत ने साक्ष्य और गवाहों के बयान पूरे होने पर दयाशंकर और उनके बेटे पीयूष को हत्या समेत अन्य आरोप में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
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