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दूसरे दिन गांव में छाया रहा धुंध का मातम
Updated Wed, 13 Dec 2017 12:01 AM IST
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राजगढ़। गढ़वा के लोगों पर शीतला धाम मुंडन में करने के लिए जाते समय सोमवार की भोर में हुए हादसे में 10 लोगों की मौत के सदमे से पूरा गांव दूसरे दिन भी उबर नहीं पाया। मंगलवार को भी गांव में केवल चीख और सिसकियां हीं सुनाई देती रहीं। जिस घर के पांच शव एक साथ जले हों और घर में केवल एक बूढ़ा बचा हो उसकी क्या वेदना का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गांव में रुक-रुक कर केवल लोगों के रोने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। लगातार दूसरे दिन भी तमाम घरों में चूल्हे तक नहीं जले। ग्रामीणों ने कहा कि इकलौते बेटे, दो बेटियों, पत्नी और सास का अंतिम संस्कार करना किसी व्यक्ति के लिए कितना पीड़ादायक होगा, यह सोच कर लोग सिहर जा रहे हैं। इस दर्द यह पीड़ित ही जान सकता है। जिस घर में चारों ओर रौनक रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। लक्ष्मण यादव एवं राधेश्याम पटेल के घर सांत्वना देने वाले पहुंचते तो ढाढ़स बंधाते-बंधाते खुद ही रोने लगते थे। लक्ष्मण यादव का इकलौता पुत्र श्याम मुरारी तथा राधेश्याम के घर का चिराग अखिलेश की मौत का सदमा बेहद गहरा है। राधेश्याम के घर में अब केवल दो बेटियां बची हैं, जिसमें एक शादीशुदा है तथा दूसरी घर पर रहती है। वह भी घायल है। राधेश्याम ने कहा कि जिंदगी का सहारा ही चला गया। अब किसके सहारे जीवन कटेगा।
किलकारी की जगह सिसकारी
मिर्जापुर। गढ़वा गांव निवासी लक्ष्मण यादव अपने सात वर्षीय बेटे श्याम मुरारी के मौत की खबर सुन सन्न रह गया। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कल तक घर में अपने मीठी बोली से लोगों को हंसाने वाला उनका लाल अब नहीं रहा। बताया कि सुबह हो या शाम हर समय लोग उसको प्यार करते रहते थे। घर में खेलता रहता था। उसकी मीठी मीठी बातें अब लोगों को यादों में चुभ रही है। अगर उसे पता होता कि भगवान उसके लाल को उससे छीन लेगा तो वह मुंडन कार्यक्रम में जाने ही नहीं देता। होनी को कौन जानता है। एक बहाना बना कर घट जाता है। ऐसा ही कुछ मेरे बेटे के साथ हुआ। जो अब जीवन भर उसे याद कर अंदर ही अंदर कुढ़ने के लिए छोड़ गया।
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गांव में रुक-रुक कर केवल लोगों के रोने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। लगातार दूसरे दिन भी तमाम घरों में चूल्हे तक नहीं जले। ग्रामीणों ने कहा कि इकलौते बेटे, दो बेटियों, पत्नी और सास का अंतिम संस्कार करना किसी व्यक्ति के लिए कितना पीड़ादायक होगा, यह सोच कर लोग सिहर जा रहे हैं। इस दर्द यह पीड़ित ही जान सकता है। जिस घर में चारों ओर रौनक रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। लक्ष्मण यादव एवं राधेश्याम पटेल के घर सांत्वना देने वाले पहुंचते तो ढाढ़स बंधाते-बंधाते खुद ही रोने लगते थे। लक्ष्मण यादव का इकलौता पुत्र श्याम मुरारी तथा राधेश्याम के घर का चिराग अखिलेश की मौत का सदमा बेहद गहरा है। राधेश्याम के घर में अब केवल दो बेटियां बची हैं, जिसमें एक शादीशुदा है तथा दूसरी घर पर रहती है। वह भी घायल है। राधेश्याम ने कहा कि जिंदगी का सहारा ही चला गया। अब किसके सहारे जीवन कटेगा।
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किलकारी की जगह सिसकारी
मिर्जापुर। गढ़वा गांव निवासी लक्ष्मण यादव अपने सात वर्षीय बेटे श्याम मुरारी के मौत की खबर सुन सन्न रह गया। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कल तक घर में अपने मीठी बोली से लोगों को हंसाने वाला उनका लाल अब नहीं रहा। बताया कि सुबह हो या शाम हर समय लोग उसको प्यार करते रहते थे। घर में खेलता रहता था। उसकी मीठी मीठी बातें अब लोगों को यादों में चुभ रही है। अगर उसे पता होता कि भगवान उसके लाल को उससे छीन लेगा तो वह मुंडन कार्यक्रम में जाने ही नहीं देता। होनी को कौन जानता है। एक बहाना बना कर घट जाता है। ऐसा ही कुछ मेरे बेटे के साथ हुआ। जो अब जीवन भर उसे याद कर अंदर ही अंदर कुढ़ने के लिए छोड़ गया।
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