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Mirzapur: गबन के आरोप में इंटर कॉलेज का लिपिक गिरफ्तार, आर्थिक अपराध अनुसंधान वाराणसी की टीम ने की कार्रवाई
Tue, 31 Jan 2023 05:15 PM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मिर्जापुर
Published by: किरन रौतेला
Updated Tue, 31 Jan 2023 05:15 PM IST
सार
आरोप है कि गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज, कछवा मिर्जापुर में कार्यरत सहायक लिपिक विजय शंकर निवासी ग्राम उमरपुर थाना कछवा मिर्जापुर ने सह आरोपियों के साथ मिलकर संस्था के 28 लाख रुपये का गबन कर लिया। उसने धोखाधड़ी की नियत से फर्जी हस्ताक्षर, फर्जी मुहर के द्वारा कूटरचित अभिलेख तैयार करके शासकीय धन रुपये 28 लाख व्यक्तिगत लाभ में लिया।
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गबन के आरोप में इंटर कॉलेज का लिपिक गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मिर्जापुर में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन वाराणसी की टीम ने मंगलवार को कछवां के गांधी विद्यालय इंटर कालेज में कार्यरत लिपिक विजय शंकर को 28 लाख रुपये के गबन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी को भ्रष्टाचार न्यायालय वाराणसी में पेश कर जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।अन्य आरोपियों की की तलाश जारी है।
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आरोप है कि गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज, कछवा मिर्जापुर में कार्यरत सहायक लिपिक विजय शंकर निवासी ग्राम उमरपुर थाना कछवा मिर्जापुर ने सह आरोपियों के साथ मिलकर संस्था के 28 लाख रुपये का गबन कर लिया। उसने धोखाधड़ी की नियत से फर्जी हस्ताक्षर, फर्जी मुहर के द्वारा कूटरचित अभिलेख तैयार करके शासकीय धन रुपये 28 लाख व्यक्तिगत लाभ में लिया। श्री गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज कछवा मिर्जापुर के प्रबंधक हरिमोहन सिंह ने थाना कछवा पर प्रथम सूचना रिपोर्ट वर्ष 2018 में दर्ज कराया था।
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कहा गया कि चंद्रभूषण उपाध्याय ने स्वयं को प्रबंधक मानते हुए वर्ष 2013 से वर्ष 2016 के मध्य फर्जी मुहर,हस्ताक्षर एवं सदस्यों की फर्जी सूची व धोखाधड़ी से अन्य अभियुक्तों से मिलीभगत करके विद्यालय के लगभग 28 लाख रुपये का लाभ व्यक्तिगत हित मे लेते हुए संस्था को क्षति पहुँचाया। वर्ष 2019 में शासन ने प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन वाराणसी को सुपुर्द किया। प्रकरण की जांच में आरोपो की पुष्टि होने पर एक आरोपी को मंगलवार को विद्यालय से दोपहर में आर्थिक अपराध अनुसंधान की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए निरीक्षक सुनील कुमार वर्मा,निरीक्षक विध्यवासिनी मणि त्रिपाठी, मुख्य आरक्षी रामाश्रय सिंह और आरक्षी सरफराज अंसारी की एक टीम का गठन किया गया था। गिरफ्तार आरोपी की संलिप्तता धोखाधड़ी समेत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध में पायी गयी है।
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