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माफिया के बजाय गरीबों के घरों पर चल रहा बुलडोजर: दीपांकर भट्टाचार्य
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सिटी क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में बोलते भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट
मिर्जापुर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी–लेनिनवादी) लिबरेशन की तरफ से बुधवार को सिटी क्लब में आदिवासी वनाधिकार और भूमि अधिकार संघर्ष को लेकर जनसभा का आयोजन हुआ। सभा में वनाधिकार क़ानून, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग उठाई। भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने भाकपा माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव तथा मिर्जापुर सचिव जीरा भारती समेत दलित आदिवासियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने की निंदा की। कहा ये गिरफ़्तारियां किसी क़ानून के उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि वनाधिकार आंदोलन को कमज़ोर करने के उद्देश्य से की गई थीं। दीपांकर भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि जिस बुलडोज़र को राजनीतिक रूप से भू-माफ़िया के ख़िलाफ़ कार्रवाई का प्रतीक बताया जाता है, वही बुल्डोजर ग़रीबों, भूमिहीनों और आदिवासियों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल हो रहा है। उन्होने कहा वनाधिकार की मांग करने वाले आदिवासियों को अतिक्रमणकारी बताया जा रहा है, जबकि बड़े पैमाने पर हो रहे वन विनाश और कॉर्पोरेट हितों की अनदेखी की जा रही है। यह वनाधिकार क़ानून की सीधी अवहेलना है। उन्होने कहा भाजपा की सरकार पुलिसिया दमन के बावजूद भाकपा माले के जुझारू संघर्ष के कारण सुधाकर यादव समेत तमाम साथियों को रिहा करना पड़ा। कहा पार्टी ने बिना डरे लड़ कर बुलडोजर को पीछे धकेला। यह लड़ाई इस देश के संविधान और स्वाभिमान को बचाने की है। सभा में 12 फरवरी को होने वाले देशव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए 23 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा घेरने का आवाहन किया गया। अध्यक्षता सुरेश कोल व संचालन ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने किया। सभा को कृष्णा अधिकारी, रामजी राय, जयप्रकाश नारायण, कुसुम वर्मा, मनीष कुमार, सुनील मौर्य आदि मौजूद रहे।
वनाधिकार आंदोलन को कमजोर करने की साजिश है नेताओं पर कार्रवाई : दीपांकर
मिर्जापुर। लालगंज के तेंदुई खुर्द में नेताओं की गिरफ़्तारी किसी कानून के उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि वनाधिकार आंदोलन को कमज़ोर करने के उद्देश्य से की गई थीं। यह बातें भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बुधवार को सिटी क्लब में पत्रकार वार्ता में कही। भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव कहा, हमारे नेताओं को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि उन्होंने कोई गलत काम किया, बल्कि इसलिए किया गया क्योंकि वे उन आदिवासी समुदायों की आवाज बनकर खड़े हैं, जिन्हें संसद द्वारा बनाए गए वनाधिकार क़ानून के तहत अधिकार प्राप्त हैं। दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि हाल के वर्षों में श्रम कानूनों और ग्रामीण रोजगार से जुड़े ढांचों में किए गए बदलाव एक ही दिशा की ओर संकेत करते हैं, जहाँ सामूहिक अधिकारों को कमज़ोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में बड़े पैमाने पर हुए पलायन के दौरान मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों को सहारा दिया था और जरूरत इस क़ानून को मजबूत करने की थी, न कि उसे कमजोर करने की। राष्ट्रीय महासचिव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के ज़रिए मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में लोगों के नाम काटे जाने पर भी चिंता व्यक्त की। कहा कि सत्यापन के नाम पर गरीब और हाशिए पर खड़े नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को सांप्रदायिक रंग देकर खतरनाक माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से बंगाली भाषी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
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वनाधिकार आंदोलन को कमजोर करने की साजिश है नेताओं पर कार्रवाई : दीपांकर
मिर्जापुर। लालगंज के तेंदुई खुर्द में नेताओं की गिरफ़्तारी किसी कानून के उल्लंघन के कारण नहीं, बल्कि वनाधिकार आंदोलन को कमज़ोर करने के उद्देश्य से की गई थीं। यह बातें भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बुधवार को सिटी क्लब में पत्रकार वार्ता में कही। भाकपा (माले) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव कहा, हमारे नेताओं को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया गया क्योंकि उन्होंने कोई गलत काम किया, बल्कि इसलिए किया गया क्योंकि वे उन आदिवासी समुदायों की आवाज बनकर खड़े हैं, जिन्हें संसद द्वारा बनाए गए वनाधिकार क़ानून के तहत अधिकार प्राप्त हैं। दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि हाल के वर्षों में श्रम कानूनों और ग्रामीण रोजगार से जुड़े ढांचों में किए गए बदलाव एक ही दिशा की ओर संकेत करते हैं, जहाँ सामूहिक अधिकारों को कमज़ोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में बड़े पैमाने पर हुए पलायन के दौरान मनरेगा ने ग्रामीण गरीबों को सहारा दिया था और जरूरत इस क़ानून को मजबूत करने की थी, न कि उसे कमजोर करने की। राष्ट्रीय महासचिव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के ज़रिए मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में लोगों के नाम काटे जाने पर भी चिंता व्यक्त की। कहा कि सत्यापन के नाम पर गरीब और हाशिए पर खड़े नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। इस प्रक्रिया को सांप्रदायिक रंग देकर खतरनाक माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से बंगाली भाषी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
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