मिर्जापुर। कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को जन सुनवाई पोर्टल पर आए 96 डिफाल्टर संदर्भों की समीक्षा की गई। सबसे अधिक 21 डिफाल्टर संदर्भ खण्ड विकास अधिकारी नरायनपुर से संबंधित थे। जिस पर जिलाधिकारी ने फटकार लगाते हुये अविलम्ब निस्तारण कराने का निर्देश दिया। समीक्षा में खण्ड विकास अधिकारी सीखड़ के 14, तहसीलदार मड़िहान के 13, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका के आठ, अधिशासी अभियन्ता सिंचाई के छह, उप जिलाधिकारी मड़िहान के पांच, जिला विकास अधिकारी के पांच, चिकित्साधिकारी के चार, सहायक विकास अधिकारी (पं.) पटेहरा के चार सहित 21 अधिकारियों/विभागों के 96 शिकायतों का निस्तारण जिलाधिकारी ने अविलंब करने को कहा। जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुये कहा कि किसी भी दशा मे प्रत्येक माह की शिकायतों का समाधान माह के अन्त तक अवश्य कर लिया जाये। डिफाल्टर शिकायतों से संबंधित कई अधिकारियों के अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने उनका वेतन रोकने का आदेश जारी किया। जन सुनवाई की समीक्षा के साथ ही जिलाधिकारी ने जन सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के कुल 21 अधिकारियों से सम्बन्धित 140 लम्बित प्रकरणो की भी प्रगति समीक्षा का अवलोकन किया। इसमें उपजिलाधिकारी चुनार के 29, उपजिलाधिकारी सदर के 27, पुलिस अधीक्षक के 14, विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी के नौ, उप जिलाधिकारी मड़िहान के आठ, जिला पंचायत राज अधिकारी के आठ, प्रभारी आयुष के सात, मुख्य चिकित्साधिकारी के छह, नगर मजिस्टेऊट के पांच, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी चार, पीओ डूडा के चार प्रकरण लम्बित हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि जन सूचना अधिकार के सभी लम्बित प्रकरणो को आप अपने स्तर से निस्तारण करना सुनिश्चित करें सूचनाओ को सही समय पर न दिये जाने के कारण ही द्वितीय अपील के बाद अनावश्यक 25 हजार रूपये जुर्माना भरना पड़ता है। मुख्य विकास अधिकारी श्रीलक्ष्मी वीएस, अपर जिलाधिकारी (वि/रा) यूपी सिंह, अपर जिलाधिकारी (भू-राजस्व) हरिशंकर, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे अमरेन्द्र कुमार, उप जिलाधिकारी गौरव श्रीवास्तव, रोशनी यादव, अमित शुक्ला एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।