मिर्जापुर। लोकगायिका ऊषा गुप्ता के आवास पर शुक्रवार को लोक संस्कृति संरक्षण केंद्र के तत्वावधान में पार्श्वगायिका आशा भोसले के निधन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। विचार गोष्ठी में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। मुख्य अतिथि डॉ. योगानंद गिरि ने कहा कि आशा भोसले ने जीवन में कठिनाईयों के बाद भी संगीत के उच्च शिखर पर पहुंची।
डॉ. योगानंद गिरि ने वैदिक एवं पौराणिक उद्धरणों के साथ अपनी बात कही। उन्होंने प्राचीन काल, भक्ति काल से लेकर वर्तमान दौर तक का सजीव चित्रण किया। डॉ गिरि ने कहा कि आशा भोसले का संगीत के प्रति समर्पण मीराबाई, कृष्ण भक्ति शाखा के कवि सूरदास से कम नहीं था। उनके 12 से 14 हजार गाए गीतों की डॉ गिरि ने सराहना की। कहा कि शास्त्रीय संगीत से पॉप गीत तक के गायन में वे आगे रहीं। इस मौके पर संतोष श्रीवास्तव, राजेंद्र तिवारी, शिवशंकर उपाध्याय, शिवभोला सिंह, कर्मचारी नेता लल्लू तिवारी, लोकगीत गायक शिवलाल गुप्ता ने विचार व्यक्त किया। संस्था की अध्यक्ष ऊषा गुप्ता ने गीतों से श्रद्धांजलि दी। धन्यवाद ज्ञापन जिला सूचनाधिकारी ओमप्रकाश उपाध्याय व संचालन सलिल पाण्डेय ने किया। संगोष्ठी में अजय गुप्ता, संतोष देव गिरि, संदर्भ पाण्डेय, राकेश द्विवेदी, विकास तिवारी आदि उपस्थित रहे।