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मां विंध्यवासिनी के आगे भक्तों ने फैलाई झोली
Mirzapur
Updated Sat, 20 Apr 2013 05:30 AM IST
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विंध्याचल। महानवमी के अवसर पर मां विंध्यवासिनी देवी के दरबार में श्रद्धालुआें का रेला उमड़ पड़ा। शुक्रवार की सुबह बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में पहुंचे। नवरात्र के पहले दिन जिन लोगों ने संकल्प लिया था उन्होंने अंतिम दिन शुक्र वार को मंदिर परिसर में स्थित हवन कुंड में पुर्णाहुति दी। इसके अलावा बहुत सारे ऐसे भक्त दिखे जो नवरात्र का व्रत मां के चरणों पर चढ़ाए जाने वाले अक्षत (चावल) को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर अपना व्रत तोड़े।
गुरुवार महाअष्टमी की रात से ही विंध्याचल की सभी गलियां दर्शनार्थियाें से पट गई थी। दर्शनार्थियों की भीड़ महानवमी पर शुक्रवार को और अधिक बढ़ गई थी। भक्तजन कतार में खड़े होकर माता का जयकारा करते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे। मंदिर में माता के भव्य आरती-पूजन के समय कपाट बंद होने से श्रद्धालु जिस कतार में खड़े थे, वहीं पर बैठकर उसके खुलने का इंतजार करते रहे। विंध्याचल के कोतवाली गली, जैपुरिया गली, कचौड़ी गली, बच्चा पाठक गली, खोया-पाया केंद्र गली, न्यू वीआईपी गली व पुरानी वीआईपी गली में भक्तों की लगी कतार धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी। दूरदराज से आए अधिकांश भक्ताें ने विंध्याचल स्थित पक्काघाट, कच्चाघाट, बलुआ घाट, दीवान घाट पर स्नान करने करने के बाद माता का दर्शन करने प्रसाद लेकर मंदिर में पहुंचे, जहां मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन पाकर भक्त अभीभुत हो गए। झांकी दर्शन के लिए अलग तथा गर्भगृह में जाकर दर्शन करने के लिए भक्ताें की अलग-अलग कतार लगावाई गई थी। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्ताें ने धाम परिसर में स्थित महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्मी, मां दुर्गा, सहित बटूक भैरव, बाबा भोलेनाथ, राधा-कृष्ण, हनुमान जी के मंदिर में जाकर विधिवत दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना किया। विंध्यधाम पहुंचे भक्ताें ने हवन-कुंड की परिक्रमा कर पुण्य लाभ कमाया। विंध्याचल मंदिर के छत पर मुंडन संस्कार कराने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे तथा छत पर पाठ व अनुष्ठान करने को कई साधक तल्लीन देखे गए।
नवमी पर्व पर उमड़ी दर्शनार्थियाें की भारी भीड़ के चलते विंध्याचल के तमाम धर्मशाला एवं होटल पुरी तरह से बुक रहे। वाहन स्टैंड दो पहिया व चार पहिया वाहनाें से पटे रहे। नवरात्र के मद्देनजर विंध्याचल मंदिर की आकर्षक फूल-पत्तियों के साथ ही बिजली के झालराें से की गई आकर्षक सजावट एक अद्भुत छटा बिखेर रही थी।
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गुरुवार महाअष्टमी की रात से ही विंध्याचल की सभी गलियां दर्शनार्थियाें से पट गई थी। दर्शनार्थियों की भीड़ महानवमी पर शुक्रवार को और अधिक बढ़ गई थी। भक्तजन कतार में खड़े होकर माता का जयकारा करते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे। मंदिर में माता के भव्य आरती-पूजन के समय कपाट बंद होने से श्रद्धालु जिस कतार में खड़े थे, वहीं पर बैठकर उसके खुलने का इंतजार करते रहे। विंध्याचल के कोतवाली गली, जैपुरिया गली, कचौड़ी गली, बच्चा पाठक गली, खोया-पाया केंद्र गली, न्यू वीआईपी गली व पुरानी वीआईपी गली में भक्तों की लगी कतार धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी। दूरदराज से आए अधिकांश भक्ताें ने विंध्याचल स्थित पक्काघाट, कच्चाघाट, बलुआ घाट, दीवान घाट पर स्नान करने करने के बाद माता का दर्शन करने प्रसाद लेकर मंदिर में पहुंचे, जहां मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन पाकर भक्त अभीभुत हो गए। झांकी दर्शन के लिए अलग तथा गर्भगृह में जाकर दर्शन करने के लिए भक्ताें की अलग-अलग कतार लगावाई गई थी। मां विंध्यवासिनी देवी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्ताें ने धाम परिसर में स्थित महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्मी, मां दुर्गा, सहित बटूक भैरव, बाबा भोलेनाथ, राधा-कृष्ण, हनुमान जी के मंदिर में जाकर विधिवत दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि के लिए कामना किया। विंध्यधाम पहुंचे भक्ताें ने हवन-कुंड की परिक्रमा कर पुण्य लाभ कमाया। विंध्याचल मंदिर के छत पर मुंडन संस्कार कराने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे तथा छत पर पाठ व अनुष्ठान करने को कई साधक तल्लीन देखे गए।
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नवमी पर्व पर उमड़ी दर्शनार्थियाें की भारी भीड़ के चलते विंध्याचल के तमाम धर्मशाला एवं होटल पुरी तरह से बुक रहे। वाहन स्टैंड दो पहिया व चार पहिया वाहनाें से पटे रहे। नवरात्र के मद्देनजर विंध्याचल मंदिर की आकर्षक फूल-पत्तियों के साथ ही बिजली के झालराें से की गई आकर्षक सजावट एक अद्भुत छटा बिखेर रही थी।
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