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बरसों से सिंचाई की सुविधा से वंचित हैं किसान
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जिगना। छानबे क्षेत्र का पश्चिमी भाग बरसों से सिंचाई की सुविधा से वंचित है। यह क्षेत्र जो कोनिया के नाम से भी जाना जाता है, सिंचाई साधन से वंचित है। इस लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा किसानों द्वारा प्रमुखता से उठाया जा रहा है । नहरें बंद होने से तालाबों में भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है ।
बता दें कि किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए तीन दशक पूर्व हरगढ प्रथम व हरगढ द्वितीय नहर का निर्माण कराया गया था। जिससे भौरूपुर, साटन पट्टी, हरगढ, नरैना, बभनी, करनी, भांवा, जरैला, भांवा पंडित पुर, मनिकठी, काशीसरपत्ती, गजाका पुरा, भिटरिया, भौरूपुर अजगना तथा गोगांव, खैरा, बसेवरा मिश्रपुर आदि गांवों के किसानों को सिंचाई व्यवस्था देने की बात थी लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के तानाशाही रवैया के चलते किसानों के खेतों तक पानी नही पहुंच पा रहा है। हर बार किसानों की फसलें सूख जाती हैं। हालत यह है कि पानी न आने से कई जगहों पर लोगों ने नहर को समतल कर दिया है। राजेश कुमार चतुर्वेदी का आरोप है कि हरगढ़ प्रथम नहर अधिकारियों की लापरवाही से चार वर्ष से बंद है और चालू करने के नाम लगभग तीन करोड़ रुपया खर्च करने के बाद भी काम अधूरा है। दो बार विधायक भी आए लेकिन अधिकारी उनकी बात भी नहीं सुने। आलोक पांडेय का कहना है कि यदि किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो जाय तो उनकी आय मे बढ़ोत्तरी हो सकती है। चुनाव में हर दल के नेता प्रत्याशी सड़क, सिंचाई, पानी व बिजली की बात करते हैं लेकिन इस क्षेत्र की नहरों की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है जो गम्भीर समस्या है। राघवेंद्र सिंह का कहना है कि हरगढ़ द्वितीय पम्प कैनाल भी वर्तमान समय में बंद है जब चालू भी रहती है तो इसका पानी गोगांव गांव के पूर्वी छोर तक ही रह जाता है। नहर की आशा में किसानों की फसलें सूख जाती हैं। नहर की हालत जर्जर हो चुकी है, कोई किसानों की समस्याओं पर ध्यान ही नही दे रहा है। सुनील कुमार पांडेय का कहना है कि किसानों की आय, बढने की बजाय सिंचाई विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की तानाशाही रवैया व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षात्मक रवैया के कारण, घटती जा रही है। इस चुनाव मे इस क्षेत्र का सिंचाई समस्या प्रमुख है इसका निदान होना चाहिए।
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बता दें कि किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए तीन दशक पूर्व हरगढ प्रथम व हरगढ द्वितीय नहर का निर्माण कराया गया था। जिससे भौरूपुर, साटन पट्टी, हरगढ, नरैना, बभनी, करनी, भांवा, जरैला, भांवा पंडित पुर, मनिकठी, काशीसरपत्ती, गजाका पुरा, भिटरिया, भौरूपुर अजगना तथा गोगांव, खैरा, बसेवरा मिश्रपुर आदि गांवों के किसानों को सिंचाई व्यवस्था देने की बात थी लेकिन सिंचाई विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के तानाशाही रवैया के चलते किसानों के खेतों तक पानी नही पहुंच पा रहा है। हर बार किसानों की फसलें सूख जाती हैं। हालत यह है कि पानी न आने से कई जगहों पर लोगों ने नहर को समतल कर दिया है। राजेश कुमार चतुर्वेदी का आरोप है कि हरगढ़ प्रथम नहर अधिकारियों की लापरवाही से चार वर्ष से बंद है और चालू करने के नाम लगभग तीन करोड़ रुपया खर्च करने के बाद भी काम अधूरा है। दो बार विधायक भी आए लेकिन अधिकारी उनकी बात भी नहीं सुने। आलोक पांडेय का कहना है कि यदि किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो जाय तो उनकी आय मे बढ़ोत्तरी हो सकती है। चुनाव में हर दल के नेता प्रत्याशी सड़क, सिंचाई, पानी व बिजली की बात करते हैं लेकिन इस क्षेत्र की नहरों की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है जो गम्भीर समस्या है। राघवेंद्र सिंह का कहना है कि हरगढ़ द्वितीय पम्प कैनाल भी वर्तमान समय में बंद है जब चालू भी रहती है तो इसका पानी गोगांव गांव के पूर्वी छोर तक ही रह जाता है। नहर की आशा में किसानों की फसलें सूख जाती हैं। नहर की हालत जर्जर हो चुकी है, कोई किसानों की समस्याओं पर ध्यान ही नही दे रहा है। सुनील कुमार पांडेय का कहना है कि किसानों की आय, बढने की बजाय सिंचाई विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों की तानाशाही रवैया व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षात्मक रवैया के कारण, घटती जा रही है। इस चुनाव मे इस क्षेत्र का सिंचाई समस्या प्रमुख है इसका निदान होना चाहिए।
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