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धूप खिली पर जमीन में नमी बरकरार
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हलिया। बेमौसम की हुई बरसात ने किसानों पर कहर ढा दिया है। स्थानीय विकास खंड के पठारी तथा कोरावल क्षेत्रों में बोई गई अगैती फसलों में शामिल मसूर, सरसों व तीसी की तैयार फसल खलिहान में रखकर मड़ाई की तैयारी में क्षेत्रीय किसान जुटे थे। इसी दौरान एक दिन पूर्व बारिश के चलते भींगकर फसल सड़ने के कगार पर हो गई है। मंगलवार को धूप दिखाने के लिए तिरपाल बाहर करके फसल बचाने में जुट गए। लेकिन जमीन में नमी होने के कारण अभी मड़ाई कार्य नहीं हो पा रही है।
पठारी तथा कोरावल क्षेत्रों में सोंनगढ़ा, सेंदुराह, बेलाही राजपुर , बरया, मुड़पेली, पिपरा, नैडिहवा, पवारी खुर्द, बढ़वार, सुकतरवा, सेदुराह आदि दर्जनों गांव के किसानों के द्वारा मड़ाई कार्य बैलों के माध्यम से किया जाता है। जमीन गीली होने के कारण मड़ाई कार्य बाधित हो गया है। क्षेत्रीय किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें मंडरा रही हैं। क्षेत्रीय किसान विश्वनाथ, सुरेशदुबे , सुक्खी चंद सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, राधेश्याम, माधवलाल, किशुन लाल, दिनेश दुबे आदि का कहना है कि असिंचित क्षेत्र में जीविकोपार्जन हेतु मसूर, सरसों, चना की खेती किया गया था। बरसात के कारण खलिहान में रखी फसल सड़ने के कगार पर हो गई है।
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पठारी तथा कोरावल क्षेत्रों में सोंनगढ़ा, सेंदुराह, बेलाही राजपुर , बरया, मुड़पेली, पिपरा, नैडिहवा, पवारी खुर्द, बढ़वार, सुकतरवा, सेदुराह आदि दर्जनों गांव के किसानों के द्वारा मड़ाई कार्य बैलों के माध्यम से किया जाता है। जमीन गीली होने के कारण मड़ाई कार्य बाधित हो गया है। क्षेत्रीय किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें मंडरा रही हैं। क्षेत्रीय किसान विश्वनाथ, सुरेशदुबे , सुक्खी चंद सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, राधेश्याम, माधवलाल, किशुन लाल, दिनेश दुबे आदि का कहना है कि असिंचित क्षेत्र में जीविकोपार्जन हेतु मसूर, सरसों, चना की खेती किया गया था। बरसात के कारण खलिहान में रखी फसल सड़ने के कगार पर हो गई है।
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